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मंदसौर में केमिकल से बन रहा था ‘जहरीला दूध’, तीन साल पुराना खेल पुलिस ने किया बेनकाब

मध्य प्रदेश के Mandsaur से सामने आया नकली दूध का मामला लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि आखिर वे रोज जो दूध पीते हैं, वह कितना सुरक्षित है। यहां पुलिस ने एक ऐसी फैक्ट्री का खुलासा किया है, जहां केमिकल्स के जरिए सिंथेटिक दूध तैयार कर उसे बाजार में सप्लाई किया जा रहा था। यह सिर्फ मिलावट नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ है।

पूरा मामला मंदसौर जिले के कोटड़ा बुजुर्ग गांव का है, जहां लंबे समय से इस अवैध फैक्ट्री का संचालन किया जा रहा था। गुप्त सूचना मिलने के बाद Madhya Pradesh Police की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापा मारा। जैसे ही पुलिस मौके पर पहुंची, वहां का दृश्य बेहद चौंकाने वाला था।

फैक्ट्री के अंदर बड़े ड्रमों और कंटेनरों में संदिग्ध केमिकल भरे हुए थे। इन्हीं केमिकल्स को मिलाकर दूध जैसा सफेद तरल तैयार किया जा रहा था। पहली नजर में यह बिल्कुल असली दूध जैसा दिखाई देता था, लेकिन असल में यह पूरी तरह नकली और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक था।

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 1000 लीटर केमिकल और लगभग 1500 लीटर तैयार नकली दूध जब्त किया। इसके साथ ही मशीनें, पाइपलाइन और अन्य उपकरण भी बरामद किए गए, जो इस अवैध कारोबार को चलाने में इस्तेमाल हो रहे थे। इससे साफ है कि यह काम बड़े स्तर पर और पूरी योजना के साथ किया जा रहा था।

सबसे हैरानी की बात यह है कि यह फैक्ट्री करीब तीन साल से लगातार चल रही थी। इतने लंबे समय तक इस तरह का कारोबार बिना किसी रोक-टोक के चलता रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या निगरानी में चूक हुई या फिर कहीं न कहीं सिस्टम की कमजोरी का फायदा उठाया गया—यह जांच का विषय है।

जांच में यह भी सामने आया है कि यहां तैयार किया गया सिंथेटिक दूध आसपास के कई इलाकों में सप्लाई किया जाता था। यानी यह दूध सीधे लोगों के घरों तक पहुंच रहा था और लोग अनजाने में इसका सेवन कर रहे थे। इस खुलासे के बाद इलाके में डर और चिंता का माहौल है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के नकली दूध में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं। यह दूध दिखने में असली जैसा जरूर होता है, लेकिन इसमें कोई पोषण नहीं होता। उल्टा, यह शरीर के अंदर कई तरह की बीमारियों को जन्म दे सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे दूध के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, एलर्जी और यहां तक कि गंभीर बीमारियां भी हो सकती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह और भी ज्यादा खतरनाक साबित हो सकता है।

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। पुलिस ने फैक्ट्री को सील कर दिया है और जब्त किए गए सैंपलों को जांच के लिए लैब भेजा गया है। इसके अलावा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी की जा रही है, ताकि पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह नकली दूध किन-किन जगहों पर सप्लाई किया गया था, ताकि वहां भी जांच की जा सके।

यह घटना एक बड़ी चेतावनी है कि खाने-पीने की चीजों में मिलावट का खतरा कितना गंभीर हो चुका है। दूध जैसी जरूरी चीज में इस तरह की मिलावट न सिर्फ कानूनन अपराध है, बल्कि यह इंसानियत के खिलाफ भी है।

ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन नियमित रूप से जांच अभियान चलाए और मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। वहीं, आम लोगों को भी सतर्क रहना होगा। दूध खरीदते समय उसकी गुणवत्ता पर ध्यान देना और भरोसेमंद स्रोत से ही खरीदारी करना बेहद जरूरी है।

मंदसौर का यह मामला यह दिखाता है कि थोड़ी सी लापरवाही किस तरह लोगों की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। अगर समय रहते ऐसे मामलों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो इसका असर आने वाले समय में और भी गंभीर हो सकता है।

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