हरियाणा के रोहतक स्थित PGIMS Rohtak से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल की सफाई व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। अस्पताल, जहां लोग इलाज और सुरक्षित माहौल की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं अब गंदगी और लापरवाही के कारण मरीजों को अतिरिक्त खतरे का सामना करना पड़ रहा है।

ताजा घटना अस्पताल के मेडिसिन वॉर्ड के ICU की है, जहां एक चूहे ने मरीज को लगाए जाने वाले इंजेक्शन को कुतर दिया और उसमें मौजूद दवा को पी गया। यह घटना न सिर्फ हैरान करने वाली है, बल्कि यह दर्शाती है कि अस्पताल में साफ-सफाई और कीट नियंत्रण की स्थिति कितनी खराब हो चुकी है।
बताया जा रहा है कि ICU में मौजूद एक तीमारदार ने सबसे पहले इस घटना को देखा। उसने देखा कि एक चूहा इंजेक्शन के साथ छेड़छाड़ कर रहा है। यह देखकर वह घबरा गया और तुरंत वहां तैनात सफाईकर्मी को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही सफाई कर्मचारी मौके पर पहुंचे।
जानकारी के अनुसार, इंजेक्शन की दवा पीने के बाद चूहा वहीं सुस्त अवस्था में पहुंच गया था। सफाई कर्मचारियों ने उसे कचरा उठाने वाले उपकरण की मदद से उठाया और ICU से बाहर ले जाकर छोड़ दिया। इस दौरान ICU में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों में डर और असुरक्षा की भावना फैल गई।
यह कोई पहली बार नहीं है जब इस अस्पताल में इस तरह की घटनाएं सामने आई हों। पहले भी कई बार मरीजों और उनके तीमारदारों ने वार्डों में चूहों और कॉकरोच की मौजूदगी की शिकायत की है। मरीजों का कहना है कि कॉकरोच अक्सर उनके बेड के पास रखी दराजों में घूमते नजर आते हैं, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती है।
अब स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि चूहे मरीजों के खाने-पीने के सामान के साथ-साथ उनके बैग में रखे कपड़ों को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। यहां तक कि दवाइयां भी सुरक्षित नहीं हैं, जो सीधे तौर पर मरीजों की जान के लिए खतरा बन सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की लापरवाही बेहद गंभीर परिणाम दे सकती है। चूहों के संपर्क में आने से कई खतरनाक बीमारियां फैल सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि चूहों से प्लेग जैसी गंभीर बीमारी का खतरा रहता है, वहीं इनके काटने से बुखार और संक्रमण भी हो सकता है। ICU जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की घटनाएं मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।
अस्पताल प्रशासन का रवैया भी इस पूरे मामले में सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि पहले भी इस तरह की समस्याओं को लेकर शिकायतें सामने आई थीं और हर बार प्रशासन ने सुधार का आश्वासन दिया था। लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे स्थिति और बिगड़ती चली गई।
जब इस मामले में प्रशासन से प्रतिक्रिया ली गई, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ऐसा कोई मामला सामने आता है, तो इसकी जांच कराई जाएगी और उचित कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, लगातार सामने आ रही घटनाएं यह दर्शाती हैं कि समस्या को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
यह घटना न केवल एक अस्पताल की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक चेतावनी भी है। अस्पतालों में साफ-सफाई और सुरक्षा का स्तर उच्च होना चाहिए, खासकर ICU जैसे क्षेत्रों में, जहां मरीजों की स्थिति पहले से ही नाजुक होती है।
इस घटना के बाद मरीजों और उनके परिजनों में आक्रोश और भय का माहौल है। लोग चाहते हैं कि प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले और अस्पताल में साफ-सफाई की व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित सफाई, कीट नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी है। इसके अलावा, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।
फिलहाल, यह मामला एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका खामियाजा मरीजों को अपनी सेहत और जिंदगी से चुकाना पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि अस्पताल प्रशासन तुरंत सख्त कदम उठाए और मरीजों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराए।
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