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करनाल में भीषण गर्मी का असर: पारा 40°C पार, डिहाइड्रेशन के मरीजों में तेज बढ़ोतरी; डॉक्टरों ने जारी की चेतावनी

हरियाणा के करनाल जिले में बढ़ती गर्मी अब सीधे लोगों की सेहत पर असर डालने लगी है। तापमान के 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचते ही अस्पतालों में डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गई है। जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना 200 से अधिक मरीज पानी की कमी, चक्कर, उल्टी और कमजोरी जैसी समस्याओं के साथ पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या सबसे ज्यादा है, जो इस मौसम में सबसे अधिक संवेदनशील माने जाते हैं।

गर्मी ने बढ़ाई परेशानी, शरीर में पानी की कमी आम समस्या

तेज धूप, गर्म हवाएं और उमस भरे वातावरण के कारण शरीर से पानी तेजी से निकल रहा है। यही वजह है कि लोगों में डिहाइड्रेशन की समस्या बढ़ रही है। अस्पताल में आने वाले मरीजों में अत्यधिक प्यास लगना, सिरदर्द, चक्कर आना, उल्टी, थकान और कमजोरी जैसे लक्षण आम हो गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है, तो यह केवल कमजोरी ही नहीं बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती है। समय रहते ध्यान न देने पर स्थिति और बिगड़ सकती है।

बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

डॉक्टरों के अनुसार, इस मौसम में सबसे ज्यादा खतरा बच्चों और बुजुर्गों को होता है। बच्चों का ध्यान खेल-कूद में अधिक रहता है, जिससे वे समय पर पानी पीना भूल जाते हैं। वहीं बुजुर्गों के शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे वे जल्दी डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं।

अस्पताल में भर्ती कई मामलों में यह देखा गया है कि बच्चों को अचानक चक्कर आना, उल्टी होना या अत्यधिक कमजोरी की शिकायत के साथ लाया गया। ऐसे मामलों में तुरंत इलाज जरूरी होता है।

डॉक्टरों की सलाह: प्यास लगने का इंतजार न करें

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में केवल प्यास लगने पर ही पानी पीना पर्याप्त नहीं है। शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए नियमित अंतराल पर पानी पीना जरूरी है। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए, चाहे प्यास लगे या नहीं।

डॉक्टरों का यह भी कहना है कि घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल साथ रखना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत पानी पिया जा सके। इसके अलावा, ओआरएस घोल, नींबू पानी, नारियल पानी जैसे पेय पदार्थ भी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं।

दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें

विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। इस समय सूर्य की किरणें सबसे तेज होती हैं और लू लगने का खतरा अधिक रहता है।

अगर किसी कारणवश बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर को ढककर निकलें। टोपी, दुपट्टा या छाता इस्तेमाल करना लाभकारी होता है। साथ ही हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनने चाहिए, ताकि शरीर को ठंडक मिल सके।

खानपान में बदलाव जरूरी

गर्मी के मौसम में खानपान का विशेष ध्यान रखना भी जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय पानी से भरपूर फल और सब्जियों का सेवन बढ़ाना चाहिए। तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी और नींबू जैसे खाद्य पदार्थ शरीर को ठंडा रखने और पानी की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं।

इसके अलावा बहुत अधिक ठंडे पेय पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं। धूप से आने के तुरंत बाद ठंडा पानी पीने या नहाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि इससे शरीर को झटका लग सकता है।

लक्षणों को नजरअंदाज न करें

डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को लगातार चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी, उल्टी, तेज सिरदर्द या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर जांच करवाना जरूरी है।

समय पर इलाज न मिलने पर डिहाइड्रेशन गंभीर रूप ले सकता है, जिससे मरीज की हालत बिगड़ सकती है।

अस्पतालों में बढ़ा दबाव

जिला नागरिक अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ा दिया है। डॉक्टरों और स्टाफ को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है, ताकि सभी मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।

स्वास्थ्य विभाग ने भी लोगों से अपील की है कि वे सावधानी बरतें और अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें, ताकि इस समस्या को कम किया जा सके।

गर्मी से बचाव ही सबसे बड़ा उपाय

विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी से बचाव ही डिहाइड्रेशन से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है। सही दिनचर्या, संतुलित खानपान और पर्याप्त पानी का सेवन करके इस समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।

इसके अलावा बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि वे इस मौसम में जल्दी बीमार पड़ सकते हैं।

निष्कर्ष

करनाल में बढ़ती गर्मी और डिहाइड्रेशन के मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या और आदतों में बदलाव करना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही स्वास्थ्य के लिए बड़ी समस्या बन सकती है।

जरूरत है जागरूकता और सतर्कता की, ताकि इस भीषण गर्मी के असर से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखा जा सके।

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