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अल नीनो की दस्तक के साथ बढ़ी तपिश—उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में लू का कहर, अगले चार दिन बेहद चुनौतीपूर्ण

देश के बड़े हिस्से में गर्मी ने समय से पहले ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में ही हालात जून जैसी भीषण गर्मी का अहसास कराने लगे हैं। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत के कई इलाके इस समय तेज धूप, गर्म हवाओं और बढ़ते तापमान की चपेट में हैं। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले तीन से चार दिन और भी मुश्किल भरे हो सकते हैं, क्योंकि लू का प्रभाव लगातार बना रहेगा।

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भारतीय मौसम विभाग यानी India Meteorological Department ने चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि फिलहाल राहत के आसार कम हैं। खासकर मैदानी इलाकों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर बना हुआ है, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

सुबह से ही चढ़ रहा पारा

गर्मी का असर इस कदर बढ़ चुका है कि सुबह 9-10 बजे के बाद ही बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। तेज धूप और गर्म हवाएं शरीर को झुलसा देने वाली स्थिति पैदा कर रही हैं। Delhi NCR समेत कई बड़े शहरों में हालात और भी गंभीर हो गए हैं, जहां एक ओर तापमान बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदूषण ने समस्या को और जटिल बना दिया है।

सड़कों पर निकलने वाले लोग लू के थपेड़ों से बचने के लिए तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं, लेकिन दोपहर के समय हालात सबसे ज्यादा खराब हो जाते हैं। खासकर मजदूर, रिक्शा चालक और खुले में काम करने वाले लोग इस मौसम की सबसे बड़ी मार झेल रहे हैं।

किन इलाकों में सबसे ज्यादा असर

मौसम विभाग के अनुसार हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मैदानी हिस्सों में लू की स्थिति लगातार बनी हुई है। इसके अलावा गंगा के मैदानी क्षेत्रों, खासकर पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में भी गर्मी का असर तेज हो गया है।

इन इलाकों में दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच चुका है और कई जगहों पर यह 45 डिग्री के करीब जा रहा है। गर्म हवाएं शरीर में पानी की कमी तेजी से बढ़ा रही हैं, जिससे डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है।

पहाड़ी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में राहत

जहां एक ओर मैदानी इलाकों में गर्मी का प्रकोप जारी है, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना बना हुआ है। इन क्षेत्रों में बारिश, तेज हवाएं और ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी ने तापमान को नियंत्रित रखा है।

Uttarakhand और Assam जैसे राज्यों में बारिश के कारण लोगों को राहत मिली है, जिससे वहां का मौसम संतुलित बना हुआ है। हालांकि, यह राहत देश के बाकी हिस्सों तक पहुंचने में अभी समय लगेगा।

अल नीनो की वापसी का खतरा

इस बीच एक और बड़ी चिंता का विषय है El Niño की संभावित वापसी। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी World Meteorological Organization ने संकेत दिए हैं कि 2026 के मध्य तक अल नीनो की स्थिति फिर से बन सकती है।

अल नीनो एक ऐसी जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है। इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है। इससे हवा के दबाव, बारिश और तापमान के पैटर्न में बड़े बदलाव आते हैं।

क्यों खतरनाक है अल नीनो

अल नीनो का सीधा असर भारत जैसे देशों पर गर्मी और सूखे के रूप में देखने को मिलता है। यह मानसून को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे बारिश कम या अनियमित हो सकती है। इसके कारण कृषि, जल संसाधन और जनजीवन पर व्यापक असर पड़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में अल नीनो के कारण वैश्विक तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है। 2023 और 2024 जैसे सालों में तापमान ने नए रिकॉर्ड बनाए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि जलवायु परिवर्तन और अल नीनो मिलकर स्थिति को और गंभीर बना सकते हैं।

समुद्री तापमान में तेजी से वृद्धि

डब्ल्यूएमओ की रिपोर्ट के अनुसार समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जो आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति बनने का संकेत दे रहा है। मई से जुलाई के बीच इसके सक्रिय होने की संभावना जताई गई है।

यदि ऐसा होता है, तो इसका असर केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों पर पड़ेगा। कहीं अत्यधिक गर्मी तो कहीं भारी बारिश जैसी चरम मौसम घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।

जलवायु परिवर्तन का बढ़ता प्रभाव

वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन ने मौसम की घटनाओं को और अधिक तीव्र बना दिया है। भले ही यह सीधे तौर पर अल नीनो की आवृत्ति को न बढ़ाए, लेकिन इसके प्रभाव को जरूर बढ़ा देता है।

गर्म महासागर और वातावरण में अधिक ऊर्जा होने के कारण लू, तूफान और भारी बारिश जैसी घटनाएं ज्यादा खतरनाक हो जाती हैं। यही कारण है कि इस बार भीषण गर्मी का खतरा पहले से अधिक गंभीर माना जा रहा है।

लोगों के लिए सावधानी जरूरी

इस तरह की भीषण गर्मी में स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। डॉक्टरों का कहना है कि दिन के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचना चाहिए। अधिक से अधिक पानी पीना, हल्के कपड़े पहनना और सिर को ढककर रखना जरूरी है।

बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि वे लू के प्रभाव में जल्दी आ सकते हैं। इसके अलावा, खुले में काम करने वाले लोगों को समय-समय पर आराम करना और पानी पीते रहना चाहिए।

आगे क्या उम्मीद?

मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन से चार दिन तक स्थिति में ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है। इसके बाद कुछ इलाकों में हल्की राहत मिल सकती है, लेकिन पूरी तरह से गर्मी से निजात मिलने में अभी समय लगेगा।

यदि अल नीनो की स्थिति बनती है, तो आने वाले महीनों में गर्मी और भी बढ़ सकती है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि सरकार और आम लोग दोनों ही इस चुनौती के लिए तैयार रहें।

निष्कर्ष

देश इस समय भीषण गर्मी और संभावित जलवायु संकट के दोहरे दबाव का सामना कर रहा है। एक ओर लू का प्रकोप लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर अल नीनो की आशंका भविष्य को लेकर चिंता बढ़ा रही है।

आने वाले दिनों में यह स्थिति किस हद तक गंभीर होती है, यह मौसम के रुख पर निर्भर करेगा। फिलहाल जरूरत है सतर्क रहने की, ताकि इस भीषण गर्मी के प्रभाव को कम किया जा सके और स्वास्थ्य को सुरक्षित रखा जा सके।

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