आगरा जिले के पिनाहट थाना क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक और मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक युवक को घरेलू विवाद में पुलिस से मदद मांगना इतना भारी पड़ गया कि उसे खुद ही पुलिस की कथित बर्बरता का शिकार बनना पड़ा। आरोप है कि 112 नंबर पर कॉल करने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने विवाद सुलझाने के बजाय शिकायतकर्ता को ही उठाकर बेरहमी से पीटा और फिर उसे अधमरी हालत में एक सुनसान मैदान में फेंक दिया।

यह पूरा मामला पिनाहट के गांव देवगढ़ का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, गांव निवासी पंकज का अपने रिश्तेदार भोले के साथ काफी समय से एक ट्रैक्टर को लेकर विवाद चल रहा था। बताया जाता है कि पंकज ने करीब पांच साल पहले भोले को ट्रैक्टर खरीदने में आर्थिक मदद की थी, लेकिन भोले ने उसका बीमा नहीं कराया। इसी मुद्दे को लेकर दोनों के बीच कहासुनी हो गई, जो धीरे-धीरे विवाद में बदल गई।
स्थिति बिगड़ती देख पंकज ने 13 अप्रैल को दोपहर करीब 2 बजे आपातकालीन सेवा 112 पर कॉल कर पुलिस से मदद मांगी। उसे उम्मीद थी कि पुलिस मौके पर पहुंचकर मामले को शांतिपूर्वक सुलझाएगी, लेकिन घटनाक्रम ने अप्रत्याशित और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया। आरोप है कि पुलिसकर्मी बार-बार कॉल आने से नाराज हो गए और मौके पर पहुंचते ही उन्होंने पंकज को डांट-फटकार लगाई। इसके बाद उसे जबरन गाड़ी में बैठाकर अपने साथ ले गए।
परिजनों के अनुसार, पुलिसकर्मी पंकज को घर से करीब दो किलोमीटर दूर ‘बीच का पुरा’ गांव के पास एक सुनसान मैदान में ले गए। वहां पहुंचकर उसके साथ जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। आरोप है कि दारोगा और साथ मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने मिलकर पंकज की बेरहमी से पिटाई की। उसे लाठियों और डंडों से इतना पीटा गया कि वह गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गया। उसके शरीर के कई हिस्सों पर गहरे नीले निशान पड़ गए, जो इस क्रूरता की कहानी खुद बयां कर रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पुलिसकर्मी उसे उसी हालत में मैदान में छोड़कर चले गए। तेज धूप में घंटों तक पंकज बेहोश पड़ा रहा। किसी ने उसकी मदद नहीं की, क्योंकि घटना सुनसान जगह पर हुई थी। शाम के समय जब कुछ बच्चे वहां खेलने के लिए पहुंचे, तब उन्होंने पंकज को जमीन पर पड़ा देखा। बच्चों ने तुरंत गांव जाकर उसके परिवार को सूचना दी।
सूचना मिलते ही परिजन घबराए हुए मौके पर पहुंचे और पंकज को तुरंत पास के एक निजी अस्पताल ले गए। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। वर्तमान में पंकज वहीं भर्ती है और उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी हालत गंभीर थी, हालांकि अब धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
परिजनों का कहना है कि पंकज न सिर्फ शारीरिक रूप से घायल है, बल्कि मानसिक रूप से भी गहरे सदमे में चला गया है। जब भी उसे होश आता है, वह डर के मारे चिल्लाने लगता है और कहता है—“साहब, अब मत मारो… मैं मर जाऊंगा।” उसकी यह स्थिति बताती है कि उसने किस हद तक यातना झेली है। उसके शरीर पर पड़े चोट के निशान अभी भी साफ दिखाई दे रहे हैं।
यह मामला घटना के लगभग 14 दिन बाद उस समय सामने आया, जब परिजनों ने पंकज की घायल अवस्था की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं। तस्वीरें वायरल होते ही लोगों में आक्रोश फैल गया और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। स्थानीय लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा की और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
लोगों का कहना है कि जब सुरक्षा देने वाली पुलिस ही इस तरह के आरोपों में घिरने लगे, तो आम जनता का भरोसा किस पर रहेगा। इस घटना ने न केवल पुलिस की छवि को धूमिल किया है, बल्कि कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
इसी बीच पिनाहट क्षेत्र से जुड़ा एक और मामला भी सामने आया है, जिसमें एक दारोगा पर घर में घुसकर मारपीट करने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि दारोगा केपी सिंह एक महिला द्वारा दर्ज कराए गए मामले में नोटिस देने के लिए गए थे, लेकिन इस दौरान उनके व्यवहार को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आईं। इस मामले में उच्च अधिकारियों ने कार्रवाई करते हुए दारोगा को निलंबित कर दिया है।
दोनों घटनाएं एक साथ सामने आने के बाद पुलिस विभाग पर दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, पंकज अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है और उसका परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या आम आदमी वास्तव में सुरक्षित है, और क्या उसे मदद मांगने से पहले भी अब डरना पड़ेगा।
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