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बिहार:: नीलगायों के उपद्रव से कई गांवों​ के किसान परेशान, हाईकोर्ट के आदेश की राज्य सरकार कर रही अवहेलना

मधुबनी : अंधराठाढी प्रखंड के आधे दर्जन से अधिक गांवो के किसान नीलगायों के उपद्रव से परेशान है। यहॉ के प्रभावित किसान स्थानीय प्रशासन से लेकर माननीय उच्च न्यायालय तक के दरवाजा खटखटा चुके हैं।माननीय उच्च न्यायालय के पारित आदेश के बावजूद यहां के प्रशासन खामोश है।

मालूम हो कि महरैल, हरना , भदुआर , रामखेतारी, गोपलखा , मेहथ ,महिनाथपुर आदि गांव के किसानों की तकरीबन 3600 एकड़ उपजाऊ जमीन कमला नदी के दोनों तटबंध के बीच में है। उनकी जमीन में प्रति वर्ष हजारों की फसल को नीलगायें चट कर जाती है। यहां के किसानों के मुताबिक नीलगायों की संख्या करीब 15000 से भी अधिक है। प्रभावित किसान स्थानीय प्रशासन से लेकर माननीय उच्च न्यायालय पटना तक इंसाफ के लिए पहुंचा। माननीय उच्च न्यायालय पटना के चार वर्ष पूर्व ही फैसला दिया था कि सरकार अविलम्व नील गायों को वन विभाग के सहयोग से हटावे या नहीं तो प्रति एकड़ 10,000 की मुआवजा का भुगतान किसान को करे। इसके लिये उन्होंने यह भी फरमान जारी किया था कि लाईसेंसी बंदूकधारी बतौर मुआवजा देकर हटावे। मारने वाले को प्रतिनील गाय 1500 रू0 एवं गारने वाले को 1000 रू निर्धारित किया गया था। परन्तु ऐसा कुछ भी नहीं हुआ । आदेश के बावजूद यहां के किसान परेशान है। जिन किसानों को खेती ही सबकुछ है। परिवार की भरण पोषण के अलावे बच्चों की पढ़ाई लिखाई से विवाह शादी तक की जिम्मेवारी को निर्वहन करना होता है। फसल के लागत मूल्य भी घर नहीं लौटता है।
प्रभावित किसानो में कृत नारायण मिश्र, जागे मिश्र, कमलू झा, त्रिलोक झा, युगे झा, भिखारी मंडल, भीम पासवान, राम प्रसाद साफी, गुंजा सदाय आदि कई दर्जन किसानों का आरोप है कि सरकार कोर्ट के आदेश की भी अवमानना कर रही है। अबतक कोई निदान नहीं निकला। प्रभावित लोग दूसरे प्रदेश में मजदूरी के लिए विवश हैं। किसान बच्चे के पढाई लिखाई विवाह शादी आदि के लिए परेशान हैं। बिहार सरकार ने जानवर से फसलों के नुकसान , मुआवजा आदि योजना वर्ष 2010 में प्रारंभ किया था । प्रति हेक्टेयर फसल नुकसान पर 10 हजार रू। जानवर के हमले से मरने वाले व्यक्ति के आश्रित को अथवा हमले में पूर्णतः अपंग व्यक्ति को एक लाख रू। हल्की चोट लगने पर 5000 रू। मानदेय वन्य प्राणी प्रतिपालक – फसलों की क्षति से बचाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजना है। नीलगाय के शिकार की अनुमति वन पार्यावरण विभाग को प्रदान की गयी है। नीलगाय की मृत शरीर सौपने पर 500 रू पुरस्कार देने की योजना है। झंझारपुर के अनुमंडल पदाधिकारी जगदीश कुमार ने पूछने पर बताया कि उच्च न्यायालय के पारित आदेश के आलोक में अनुपालन किया जा रहा है। बंदूकधारी की तलाश की जा रही है। इस वास्ते उच्चाधिकारियों को भी लिखा गया है। निकट भविष्य में समाधान का आसार दिखने लगा है।

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