बिहार :: क्या DMCH अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की मानवता भी मर चुकी है?

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दरभंगा (इम्तेयाज़ अहमद) :: DMCH अस्पताल प्रशासन की कुव्यवस्था और यहाँ के डॉक्टरों की दबंगई तो जग जाहिर है, इस मामले में ये अस्पताल अक्सर ही अख़बारों की सुर्खियां बटोरता चला आ रहा है। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन या डॉक्टरों में कोई बदलाव नज़र नहीं आता।
इसी कड़ी में एक बार फिर अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की अमानवीय हरकतों के कारण अस्पताल के बीचोबीच मानवता दम तोड़ती नज़र आई।

जी हाँ… पिछले करीब 5 दिनों से एक लावारिस घायल व्यक्ति इलाज के लिए अस्पताल में तड़पता रहा मगर अस्पताल के किसी भी डॉक्टरों ने उस घायल व्यक्ति को पलट कर देखना भी जरूरी नहीं समझा। घायल का एक पैर बुरी तरह फ्रैक्चर हो चूका था और उसे तुरंत ही इलाज की जरूरत थी, मगर इलाज नहीं होने के कारण वो घायल व्यक्ति अस्पताल के ही आउटडोर मैन गेट के बगल की गन्दी नाली के पास भूखा प्यासा 5 दिनों तक पड़ा रहा इस बीच घायल व्यक्ति इतना कमज़ोर हो गया कि उसने कपड़े में ही मल मूत्र त्यागना शुरू कर दिया जिसके कारण घायल व्यक्ति के इर्द गिर्द काफी दुर्गन्ध पैदा हो गई।

अस्पताल के ही कुछ चश्मदीद कर्मचारियों ने नाम जाहिर ना किये जाने के शर्त पर ये सारी बातें बताई, और ये भी बताया के इस लावारिस घायल व्यक्ति को पुलिस के दुआरा यहाँ छोड़ा गया था, और इसके इलाज में हो रही लापरवाही की शिकायत हमलोगों ने अस्पताल अधीक्षक,उपाधीक्षक,हैल्थ मैनेजर के इलावे कई और सक्षम डॉक्टरों से भी किया मगर किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
बता दें कि अपनी जिम्मेदारी समझते हुए जब मैंने आज इस मामले की तहकीकात करना शुरू किया तो अस्पताल प्रशासन सकते में आया और आनन फानन में उस घायल व्यक्ति का उपचार शुरू करते हुए उसे एडमिट किया गया। फिलहाल उस व्यक्ति को ccw के पुरुष वार्ड में रखा गया है।

पूछने पर घायल व्यक्ति ने बताया के उसका नाम अशोक है और पिता का नाम जगदीश प्रसाद। और वह मुज़फ़्फ़रपुर जिला के काँटी थाना क्षेत्र के गाँव टार्मा पोस्ट कलमाड़ी का निवासी बता रहा है। काफी कमज़ोर होने के कारण ठीक तरह से बात नहीं कर पा रहा है, मगर किसी तरह उसने बताया के वह किसी ईंट भट्ठे में काम करता था और रास्ते से गुज़रते वक़्त किसी अज्ञात गाड़ी ने उसे ठोकर मार दिया जिसमें उसका एक पैर बुरी तरह घायल हो गया। जब सड़क पर घायल पड़े इस व्यक्ति को पुलिस वालों ने देखा तो उसे इलाज के लिए DMCH लेकर आगए।

उसने ये भी बताया के उसके पिता साइकल पर फेरी लगा कर सब्ज़ी बेचते है, जबकि बड़ा भाई अनिल शहद बेच कर रोज़गार कमाता है। ऐसे में ये भी बहुत जरूरी है कि उसके परिजनों तक जल्द से जल्द अशोक की खबर पहुंचाई जाए।