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दिल्ली में बदला मौसम, खांसी का बढ़ता कहर: 10-15 दिनों तक नहीं मिल रही राहत, अस्पतालों में मरीजों की भीड़

दिल्ली में मौसम के अचानक बदलते मिजाज ने लोगों की सेहत पर गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। सुबह-शाम ठंडक और दिन में हल्की गर्माहट के इस उतार-चढ़ाव ने खासकर खांसी, जुकाम और वायरल संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी कर दी है। राजधानी के विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में इन दिनों मरीजों की संख्या में भारी इजाफा देखा जा रहा है। स्थिति यह है कि ओपीडी में सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं और मरीजों को डॉक्टर से मिलने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।

सबसे ज्यादा परेशानी की बात यह है कि इस बार खांसी जल्दी ठीक नहीं हो रही। सामान्यतः कुछ दिनों में ठीक होने वाली खांसी अब 10 से 15 दिनों तक लोगों को परेशान कर रही है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर आयु वर्ग के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। कई मरीजों का कहना है कि दवाइयां लेने के बावजूद खांसी पूरी तरह खत्म नहीं हो रही, बल्कि लंबे समय तक बनी रह रही है।

अस्पतालों में बढ़ी भीड़ ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा दिया है। खासकर मेडिसिन और बाल रोग विभागों में मरीजों की संख्या अधिक है। डॉक्टरों के अनुसार, इस समय वायरल संक्रमण का प्रकोप बढ़ा हुआ है, जो खांसी को लंबे समय तक बनाए रख रहा है। कई मामलों में मरीजों को सूखी खांसी के साथ गले में खराश, बलगम और सांस लेने में हल्की तकलीफ भी हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम बदलने के दौरान शरीर को नए तापमान और वातावरण के अनुसार ढलने में समय लगता है। इसी दौरान इम्युनिटी कमजोर हो जाती है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया आसानी से शरीर पर हमला कर देते हैं। यही कारण है कि इस समय खांसी और जुकाम के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है।

डॉक्टरों के अनुसार, इस बार देखने में आ रहा है कि खांसी केवल संक्रमण के दौरान ही नहीं, बल्कि संक्रमण खत्म होने के बाद भी बनी रहती है। इसे पोस्ट-वायरल खांसी कहा जाता है। इस स्थिति में मरीज को लगातार सूखी खांसी या हल्की बलगम वाली खांसी बनी रहती है, जो कई बार 2 हफ्ते या उससे अधिक समय तक भी चल सकती है।

खांसी के लंबे समय तक बने रहने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। सबसे बड़ा कारण पोस्ट-वायरल प्रभाव है, जिसमें शरीर वायरस से तो लड़ लेता है, लेकिन गले और श्वसन तंत्र में सूजन बनी रहती है। इसके अलावा बदलते मौसम के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे रिकवरी धीमी हो जाती है। धूल, प्रदूषण और एलर्जी भी खांसी को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दिल्ली जैसे शहर में हवा की गुणवत्ता का खराब होना भी एक बड़ा कारण है, जिससे लोगों को गले में जलन और खांसी की शिकायत बढ़ जाती है।

कुछ मामलों में यह भी देखा गया है कि इस बार का वायरल संक्रमण फेफड़ों में कफ जमा कर रहा है, जिससे खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। ऐसे में डॉक्टर मरीजों को एंटी-एलर्जिक दवाएं, कफ सिरप और जरूरत पड़ने पर नेबुलाइजर का इस्तेमाल करने की सलाह दे रहे हैं। नेबुलाइजर के जरिए दवा सीधे फेफड़ों तक पहुंचती है, जिससे मरीज को जल्दी राहत मिलती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों और बुजुर्गों को इस समय विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बुजुर्गों की इम्युनिटी पहले से ही कमजोर होती है, जिससे वे जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। वहीं बच्चों का इम्यून सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता, इसलिए वे भी जल्दी बीमार पड़ सकते हैं। ऐसे में दोनों वर्गों को मौसम बदलने के दौरान खास ध्यान रखने की सलाह दी जा रही है।

डॉक्टरों ने लोगों को चेतावनी दी है कि यदि खांसी लंबे समय तक बनी रहे, या इसके साथ बुखार, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।

हालांकि, कुछ घरेलू उपायों की मदद से खांसी से राहत पाई जा सकती है। जैसे शहद और अदरक का सेवन गले को आराम देता है और सूजन को कम करता है। भाप लेना भी एक प्रभावी उपाय है, जिससे नाक और गले की जकड़न कम होती है। हल्दी वाला दूध पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण से लड़ने में मदद मिलती है।

इसके अलावा, गर्म तरल पदार्थ जैसे गुनगुना पानी, सूप और हर्बल चाय का सेवन भी काफी फायदेमंद होता है। नमक के पानी से गरारे करने से गले की खराश कम होती है और संक्रमण नियंत्रित रहता है। डॉक्टरों का कहना है कि इन उपायों को अपनाने के साथ-साथ पर्याप्त आराम करना भी जरूरी है, ताकि शरीर जल्दी रिकवर कर सके।

अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि मौसम में बदलाव के साथ बीमारियां बढ़ना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इस बार खांसी का लंबे समय तक बने रहना चिंता का विषय बन गया है। ऐसे में जरूरी है कि लोग अपनी सेहत के प्रति सतर्क रहें, साफ-सफाई का ध्यान रखें, संतुलित आहार लें और समय पर इलाज कराएं। जागरूकता और सावधानी ही इस समस्या से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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