देश के उत्तर-पश्चिम हिस्सों में इन दिनों मौसम ने अचानक करवट ले ली है। जहां पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी का दौर जारी है, वहीं मैदानी इलाकों में बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि ने लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर दिया है। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ दिनों तक यह बदला हुआ मौसम जारी रहने की संभावना है, जिससे तापमान में गिरावट और ठंड का एहसास बढ़ सकता है।

मौसम में इस बदलाव की मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ है, जो उत्तरी ईरान और कैस्पियन सागर के आसपास सक्रिय हुआ है। इसी के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्यों में बादल छाए हुए हैं और लगातार बारिश तथा बर्फबारी हो रही है। इसका असर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक साफ देखा जा रहा है।
पहाड़ी इलाकों की बात करें तो जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। कई स्थानों पर इतनी बर्फ गिरी है कि सड़कें बंद करनी पड़ी हैं। जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग और बांदीपोरा-गुरेज मार्ग बर्फबारी के कारण बंद हो गए हैं, जिससे आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन ने लोगों को बिना जरूरत यात्रा न करने की सलाह दी है, क्योंकि कुछ इलाकों में हिमस्खलन और भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है।
हिमाचल प्रदेश में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं। रोहतांग दर्रा, कुंजुम पास और बारालाचा जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी हिमपात हुआ है। कई जगहों पर 15 से 20 सेंटीमीटर तक बर्फ जमी है, जिससे रास्ते फिसलन भरे और खतरनाक हो गए हैं। कुल्लू, लाहौल-स्पीति और मनाली के आसपास के इलाकों में भी बर्फबारी और बारिश का असर देखने को मिला है। अटल टनल रोहतांग की ओर जाने वाले रास्तों पर भी कुछ समय के लिए यातायात बाधित रहा।
मध्यम और निचले इलाकों में भी मौसम ने करवट ली है। शिमला, धर्मशाला और आसपास के क्षेत्रों में बारिश हुई है, जिससे ठंड में एक बार फिर इजाफा हो गया है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी ठंड से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।
मैदानी राज्यों में भी मौसम का असर कम नहीं है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। कुछ इलाकों में ओले भी गिरे हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खासकर गेहूं की फसल इस समय पकने की अवस्था में है, और ऐसे में बारिश और तेज हवाएं फसल को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, 30 और 31 मार्च के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में कई जगहों पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है। साथ ही 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि भी हो सकती है, जिससे जनजीवन और कृषि दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इसका मतलब है कि लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है, हालांकि स्थिति गंभीर नहीं है। इन राज्यों में 30 मार्च से लेकर 3 अप्रैल तक हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रह सकता है। 4 अप्रैल को भी मौसम में ज्यादा बदलाव की संभावना नहीं है।
राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी मौसम ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। यहां निचले स्तर पर बने कम दबाव के क्षेत्र और चक्रवाती हवाओं के कारण बादल छाए हुए हैं और हल्की बारिश हो रही है। 30 और 31 मार्च को इन इलाकों में भी ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।
पूर्वोत्तर भारत में भी मौसम सक्रिय बना हुआ है। यहां कई जगहों पर हल्की से भारी बारिश की संभावना है, खासकर 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच। इसके अलावा दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में भी गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।
इस बदलते मौसम का असर तापमान पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पंजाब और हरियाणा में बारिश के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। चंडीगढ़ समेत कई शहरों में ठंड का एहसास बढ़ गया है, जो इस समय के हिसाब से असामान्य माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने तक मौसम का यह पैटर्न जारी रहेगा। 2 अप्रैल के आसपास एक और पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे बारिश और बर्फबारी का दौर और लंबा खिंच सकता है।
इस बीच, प्रशासन और मौसम विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वालों को विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है, वहीं किसानों को भी अपनी फसल को सुरक्षित रखने के उपाय करने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, मार्च के अंत में मौसम का यह बदला हुआ रूप जहां एक ओर ठंडक और राहत लेकर आया है, वहीं दूसरी ओर कई चुनौतियां भी खड़ी कर रहा है। ऐसे में जरूरी है कि लोग मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें और सुरक्षित रहें।
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