राजधानी दिल्ली में गुरुवार को भक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। Hanuman Janmotsav के पावन अवसर पर शहर के प्रमुख मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंदिरों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं और “जय बजरंगबली” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंजता रहा।

इस खास दिन पर Hanuman जी के दर्शन के लिए लोगों में गहरी श्रद्धा और उत्साह देखने को मिला। भक्तों ने अपने परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और संकटों से मुक्ति तथा सुख-समृद्धि की कामना की। हर उम्र के लोग इस पर्व में बढ़-चढ़कर शामिल हुए।
दिल्ली के प्रसिद्ध Shri Marghat Wale Hanuman Mandir में तड़के सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। श्रद्धालु हाथों में प्रसाद, फूल और सिंदूर लेकर लाइन में खड़े रहे और अपनी बारी का इंतजार करते रहे। यहां पूरे विधि-विधान से पूजा की गई और भक्तों ने हनुमान जी को सिंदूर अर्पित कर आशीर्वाद लिया।
इसी तरह Hanuman Mandir Connaught Place में भी दिनभर भक्तों की भारी भीड़ रही। यह मंदिर अपनी ऐतिहासिकता और धार्मिक मान्यता के कारण विशेष महत्व रखता है। यहां हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया और भक्तों ने आरती में शामिल होकर आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार Hanuman जी का जन्म चैत्र पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए हर वर्ष इसी दिन उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन को विशेष रूप से शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
हनुमान जी को भगवान Rama के सबसे बड़े भक्त के रूप में जाना जाता है। उनकी निष्ठा और समर्पण की मिसाल आज भी दी जाती है। उन्होंने अपने जीवन में जो साहस और सेवा भाव दिखाया, वह हर व्यक्ति के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा-पाठ के साथ-साथ भजन-कीर्तन और सुंदरकांड का आयोजन किया गया। कई जगहों पर भक्तों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया। भक्ति गीतों और मंत्रों की गूंज ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
इसके अलावा, शहर के कई इलाकों में भंडारे का आयोजन भी किया गया, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना इस दिन विशेष पुण्य का कार्य माना जाता है, इसलिए बड़ी संख्या में लोग इस सेवा कार्य में भी शामिल हुए।
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। मंदिरों के आसपास पुलिस बल तैनात किया गया था और ट्रैफिक व्यवस्था को भी सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष योजना बनाई गई थी। इससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
हनुमान जी के गुरु को लेकर भी धार्मिक मान्यताओं में रोचक चर्चा मिलती है। आमतौर पर Surya देव को उनका गुरु माना जाता है, क्योंकि उन्होंने ही उन्हें ज्ञान प्रदान किया था। लेकिन कुछ विद्वान Sita माता को भी उनका गुरु मानते हैं। यह उनकी विनम्रता और श्रद्धा को दर्शाता है।
हनुमान जन्मोत्सव मनाने की परंपरा सरल होने के साथ-साथ अत्यंत प्रभावशाली भी है। इस दिन भक्त सुबह स्नान कर मंदिर जाते हैं, पूजा करते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। कई लोग व्रत रखते हैं और दिनभर भगवान का स्मरण करते हैं। शाम के समय आरती और भजन-कीर्तन के साथ उत्सव का समापन होता है।
यह माना जाता है कि इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और व्यक्ति को मानसिक शांति प्राप्त होती है। इसलिए इस दिन को ‘संकट मोचन दिवस’ के रूप में भी देखा जाता है।
हनुमान जयंती और जन्मोत्सव के बीच अंतर को लेकर भी अक्सर सवाल उठते हैं। ‘जयंती’ शब्द उन महापुरुषों के लिए प्रयोग किया जाता है, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं, जबकि ‘जन्मोत्सव’ उन देवी-देवताओं के लिए कहा जाता है, जिन्हें अमर माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार Hanuman जी चिरंजीवी हैं, यानी वे आज भी जीवित माने जाते हैं। इसलिए उनके जन्मदिन को ‘जन्मोत्सव’ कहना अधिक उचित माना जाता है। हालांकि आम भाषा में ‘हनुमान जयंती’ शब्द भी उतना ही प्रचलित है।
इस अवसर पर दिल्ली के कई हिस्सों में धार्मिक झांकियां भी निकाली गईं, जिनमें हनुमान जी के जीवन से जुड़े प्रसंगों को दर्शाया गया। बच्चों और युवाओं ने इन झांकियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पूरे उत्साह के साथ इस पर्व को मनाया।
हनुमान जन्मोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह समाज को एकजुट करने वाला पर्व भी है। यह हमें भक्ति, सेवा और समर्पण का संदेश देता है। हनुमान जी का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची निष्ठा और विश्वास के साथ हम हर कठिनाई को पार कर सकते हैं।
कुल मिलाकर, दिल्ली में इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव पूरे उत्साह, श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। मंदिरों में उमड़ी भीड़, गूंजते जयकारे और भक्तों की अटूट आस्था ने इस पर्व को और भी विशेष बना दिया।
आने वाले वर्षों में भी यह पर्व इसी तरह धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता रहेगा और लोगों को साहस, भक्ति और सकारात्मकता का संदेश देता रहेगा।
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