दिल्ली के रोहिणी इलाके से बुधवार तड़के एक ऐसी दर्दनाक खबर सामने आई, जिसने हर किसी को अंदर तक झकझोर दिया। बुद्ध विहार की झुग्गी बस्ती में लगी भीषण आग ने एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जिंदगी छीन ली। मरने वालों में पति-पत्नी और उनकी करीब दो साल की मासूम बेटी शामिल हैं। यह हादसा न सिर्फ एक परिवार के लिए त्रासदी बना, बल्कि पूरे इलाके के लिए गहरा सदमा छोड़ गया।

आधी रात के बाद अचानक भड़की आग
घटना देर रात करीब 1:25 बजे की है। उस समय झुग्गी बस्ती में रहने वाले लोग गहरी नींद में थे। अचानक एक झुग्गी से आग की लपटें उठीं और देखते ही देखते आग ने आसपास के कई घरों को अपनी चपेट में ले लिया। तेज हवा और ज्वलनशील सामग्री की वजह से आग तेजी से फैलती चली गई।
कुछ ही मिनटों में हालात इतने भयावह हो गए कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़ा। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई और लोग किसी तरह अपने परिवार को सुरक्षित निकालने की कोशिश करने लगे।
मौके पर पहुंची दमकल, लेकिन रास्ता बना बाधा
आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग को तुरंत जानकारी दी गई। कुछ ही देर में छह फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। लेकिन झुग्गी बस्ती की संकरी गलियों ने राहत कार्य में बड़ी बाधा खड़ी कर दी।
दमकल की बड़ी गाड़ियां घटनास्थल तक पूरी तरह नहीं पहुंच सकीं, जिससे आग बुझाने में देरी हुई। कर्मियों को पाइप के जरिए दूर से ही पानी डालकर आग पर काबू पाने की कोशिश करनी पड़ी। काफी मशक्कत के बाद सुबह तक आग को नियंत्रित किया जा सका।
नहीं बच सकी एक छोटी सी जिंदगी
इस भीषण हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई। पति-पत्नी के साथ उनकी दो साल की मासूम बेटी भी आग की चपेट में आ गई। बताया जा रहा है कि आग इतनी तेजी से फैली कि उन्हें बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिल पाया।
जब तक राहत टीम वहां पहुंची, तब तक तीनों बुरी तरह झुलस चुके थे। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, यह दृश्य बेहद दिल दहला देने वाला था। एक मासूम की मौत ने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
कबाड़ और प्लास्टिक ने बढ़ाया खतरा
अधिकारियों के मुताबिक, जिस जगह आग लगी वहां करीब 400 वर्ग गज का प्लॉट था, जिसमें बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और कबाड़ जमा किया गया था। यही ज्वलनशील सामग्री आग के तेजी से फैलने का मुख्य कारण बनी।
दमकल अधिकारी अजय शर्मा ने बताया कि शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आग कबाड़ में लगी और फिर आसपास की झुग्गियों में फैल गई। प्लास्टिक जैसी सामग्री ने आग को और ज्यादा भड़काने का काम किया।
जांच जारी, कारणों की तलाश
फिलहाल प्रशासन ने आग लगने के असली कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। यह देखा जा रहा है कि कहीं आग शॉर्ट सर्किट, लापरवाही या किसी अन्य कारण से तो नहीं लगी।
मौके पर पुलिस, दमकल विभाग, बिजली विभाग और अन्य एजेंसियां मौजूद रहीं। तीनों शवों को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना की सच्चाई सामने आ पाएगी।
पहले भी लग चुकी है आग
दिल्ली में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। इससे पहले 12 अप्रैल को राजघाट बस डिपो के पास झाड़ियों में भी भीषण आग लग गई थी, जिसने कई किलोमीटर क्षेत्र को प्रभावित किया था।
उस घटना में दमकल विभाग को आग बुझाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। हालांकि उस समय किसी की जान नहीं गई थी, लेकिन इस बार रोहिणी की घटना ने हालात की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है।
झुग्गी बस्तियों की हालत पर सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर झुग्गी बस्तियों की खराब स्थिति और सुरक्षा की कमी को उजागर किया है। संकरी गलियां, अव्यवस्थित निर्माण और ज्वलनशील सामग्री का खुले में जमा होना ऐसे हादसों को बढ़ावा देता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन को ऐसे इलाकों में नियमित जांच करनी चाहिए और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करना चाहिए। साथ ही, लोगों को भी सतर्क रहने और आग से बचाव के उपाय अपनाने की जरूरत है।
दर्द, डर और सीख
रोहिणी की इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मासूम बच्ची समेत पूरे परिवार की मौत ने हर किसी को भावुक कर दिया है। यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि लापरवाही और अव्यवस्था कितनी बड़ी कीमत वसूल सकती है।
अब जरूरी है कि प्रशासन और समाज मिलकर ऐसे कदम उठाएं, जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। रोहिणी की झुग्गियों में लगी यह आग भले ही बुझ गई हो, लेकिन इसके जख्म लंबे समय तक लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगे।
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