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मेरठ में गैस संकट गहराया: बुकिंग और OTP के बाद भी नहीं मिल रहा सिलिंडर, उपभोक्ताओं में बढ़ा गुस्सा

उत्तर प्रदेश के Meerut में घरेलू एलपीजी गैस को लेकर गंभीर स्थिति सामने आई है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि ऑनलाइन बुकिंग और ओटीपी मिलने के बावजूद उन्हें समय पर गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। इस समस्या ने शहर में व्यापक असंतोष पैदा कर दिया है और गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रही गैस

शहर के कई इलाकों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि लोग गैस की रिफिल बुकिंग तो कर रहे हैं, लेकिन कई दिनों तक उन्हें सिलिंडर की डिलीवरी नहीं हो रही। उपभोक्ताओं के मोबाइल पर बुकिंग कन्फर्मेशन का मैसेज आता है, इसके बाद डिलीवरी के लिए ओटीपी भी भेजा जाता है, लेकिन इसके बावजूद गैस उनके घर तक नहीं पहुंचती।

इस स्थिति से लोगों की परेशानी बढ़ गई है, खासकर उन परिवारों की जो पूरी तरह घरेलू गैस पर निर्भर हैं। कई लोगों को मजबूरी में बाहर खाना बनवाना या वैकल्पिक इंतजाम करना पड़ रहा है।

एजेंसियों पर बढ़ी भीड़ और नाराजगी

गैस की समय पर डिलीवरी न होने के कारण उपभोक्ता सीधे एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं। इससे वहां भारी भीड़ लग रही है और कई जगहों पर हंगामे जैसी स्थिति भी बन रही है।

लोगों का कहना है कि जब ऑनलाइन सिस्टम मौजूद है, तो उन्हें एजेंसियों के चक्कर क्यों लगाने पड़ रहे हैं। यह व्यवस्था की बड़ी विफलता को दर्शाता है।

प्रशासन ने लिया संज्ञान

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पूर्ति विभाग सक्रिय हो गया है। जिला पूर्ति अधिकारी विनय कुमार सिंह ने गैस कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपनी एजेंसियों की व्यवस्था में तुरंत सुधार करें।

इसके तहत Indian Oil Corporation Limited, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited के अधिकारियों को पत्र लिखकर स्थिति को नियंत्रित करने के निर्देश दिए गए हैं।

उच्च अधिकारियों ने जताई नाराजगी

पूर्ति विभाग के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर उच्च स्तर पर लगातार समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों ने गैस वितरण व्यवस्था पर असंतोष जताया है और इसे जल्द से जल्द सुधारने के आदेश दिए हैं।

प्रशासन का कहना है कि गैस बुकिंग के बाद उपभोक्ताओं को तय समय सीमा के भीतर उनके घर तक सिलिंडर पहुंचना चाहिए, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।

उपभोक्ता सुविधा पर जोर

अधिकारियों ने गैस कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे उपभोक्ताओं की सुविधा को प्राथमिकता दें। लोगों को यह भरोसा दिलाया जाए कि वे घर बैठे गैस बुक करें और 2 से 4 दिनों के भीतर उन्हें सिलिंडर की डिलीवरी मिल जाए।

इसके अलावा सभी गैस एजेंसी संचालकों को अपने मोबाइल नंबर चालू रखने और उपभोक्ताओं के सवालों का संतोषजनक जवाब देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

कॉमर्शियल गैस की स्थिति और गंभीर

जहां घरेलू गैस की सप्लाई को लेकर लगातार सुधार के दावे किए जा रहे हैं, वहीं कॉमर्शियल गैस की स्थिति और भी खराब बताई जा रही है।

रेस्टोरेंट, होटल, अस्पताल और स्कूल-कॉलेज जैसे संस्थानों को पर्याप्त मात्रा में कॉमर्शियल सिलिंडर नहीं मिल पा रहे हैं। फिलहाल केवल जरूरी सेवाओं के लिए सीमित संख्या में सिलिंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

इससे व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा है और कई छोटे व्यवसायों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

कालाबाजारी पर भी नजर

गैस की कमी के बीच कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ गई है। इसे देखते हुए पूर्ति विभाग ने ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है जो अवैध रूप से गैस की बिक्री कर रहे हैं।

गैस एजेंसियों को भी इस अभियान में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। मेरठ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नमो जैन ने कहा है कि कालाबाजारी रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

डिलीवरी सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि बिना वैध कोड या पहचान के किसी को गैस सिलिंडर न दिया जाए।

समस्या की जड़ क्या है?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या सप्लाई चेन में गड़बड़ी, डिलीवरी सिस्टम की कमजोरी और निगरानी की कमी के कारण पैदा हो रही है।

ऑनलाइन बुकिंग और ओटीपी जैसी सुविधाएं तभी प्रभावी होती हैं जब उनके पीछे मजबूत वितरण तंत्र हो। यदि डिलीवरी समय पर नहीं होती, तो पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं।

आम जनता पर असर

इस संकट का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। घरेलू गैस आज हर घर की जरूरत बन चुकी है और इसकी कमी से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।

महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उन्हें खाना बनाने के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।

आगे क्या?

प्रशासन और गैस कंपनियों के बीच लगातार संवाद चल रहा है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही स्थिति में सुधार होगा। हालांकि, इसके लिए जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

यदि वितरण व्यवस्था को समय रहते ठीक नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

निष्कर्ष

Meerut में गैस सिलिंडर की समस्या ने प्रशासन और गैस कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुकिंग और ओटीपी जैसी आधुनिक सुविधाओं के बावजूद यदि लोगों को समय पर गैस नहीं मिलती, तो यह व्यवस्था की कमजोरी को दर्शाता है।

अब जरूरत है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न पैदा हो।

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