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दिल्ली में घरेलू सहायिका की करतूत उजागर: गूगल सर्च से खुला लाखों की चोरी का राज, दूसरी घटना में नौकर ने रची डकैती की साजिश

राजधानी दिल्ली में हाल ही में सामने आई दो अलग-अलग घटनाओं ने घरेलू सहायकों पर भरोसे और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर केशवपुरम इलाके में एक घरेलू सहायिका द्वारा बुजुर्ग महिला के घर से लाखों के गहनों की चोरी का मामला सामने आया, तो दूसरी ओर लुटियंस दिल्ली के हाई-प्रोफाइल इलाके गोल्फ लिंक्स में घरेलू सहायक की मिलीभगत से डकैती की वारदात ने सभी को चौंका दिया। दोनों घटनाएं यह दर्शाती हैं कि घर के अंदर से होने वाला खतरा कितना बड़ा हो सकता है।

पहला मामला उत्तर-पश्चिम दिल्ली के केशवपुरम इलाके का है, जहां 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला संतोष देवी के घर से करीब ढाई सौ ग्राम सोने के गहनों की चोरी हो गई। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि चोरी को इतनी सफाई से अंजाम दिया गया कि शुरुआती जांच में कोई सुराग तक नहीं मिला। घर में काम करने वाली सहायिका सुखवती पर किसी को शक नहीं हुआ, क्योंकि उसने बेहद चालाकी से अपने निशान मिटा दिए थे।

घटना की जानकारी 15 अप्रैल को पुलिस को दी गई, जिसके बाद केशवपुरम थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। साथ ही घर में आने-जाने वाले सभी लोगों से पूछताछ की गई, जिनमें घरेलू सहायिका सुखवती और उसका पति उमेश भी शामिल थे।

पूछताछ के दौरान सुखवती ने खुद को निर्दोष बताते हुए चोरी से इनकार कर दिया। लेकिन पुलिस को उसके पति उमेश के व्यवहार पर संदेह हुआ। जब पुलिस ने उमेश के मोबाइल फोन की जांच की, तो एक अहम सुराग हाथ लगा। पता चला कि उसने घटना से कुछ दिन पहले गूगल पर सोने के भाव की जानकारी सर्च की थी। यही एक छोटी सी गलती उसके लिए बड़ी मुसीबत बन गई।

इस जानकारी के बाद पुलिस का शक गहरा गया और दोनों से सख्ती से पूछताछ की गई। अंततः सुखवती ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। उसने बताया कि लालच में आकर उसने बुजुर्ग महिला के गहनों को चुरा लिया था। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर लॉरेंस रोड स्थित झुग्गी से करीब 250 ग्राम सोने के गहने बरामद कर लिए। फिलहाल आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके पति की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

इस मामले में एक और दिलचस्प पहलू यह है कि आरोपी महिला का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था। यानी यह अपराध पूरी तरह लालच के कारण किया गया। इस घटना ने यह भी दिखाया कि तकनीक का उपयोग, चाहे अनजाने में ही क्यों न हो, अपराधियों को पकड़ने में कितना महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

दूसरी घटना राजधानी के बेहद सुरक्षित माने जाने वाले लुटियंस दिल्ली क्षेत्र के गोल्फ लिंक्स इलाके की है, जहां एक कारोबारी के घर में हाई-प्रोफाइल डकैती की वारदात हुई। इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि डकैती की पूरी साजिश घर में हाल ही में रखे गए घरेलू सहायक ने ही रची थी।

पुलिस के अनुसार, आरोपी घरेलू सहायक सुशील को घटना से महज पांच दिन पहले ही नौकरी पर रखा गया था। इतने कम समय में उसने घर की बनावट, परिवार की दिनचर्या और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी जुटा ली। इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर डकैती की योजना बनाई।

घटना वाली रात सुशील ने जानबूझकर घर का मुख्य दरवाजा खुला छोड़ दिया। इसी का फायदा उठाकर सात बदमाश घर के अंदर घुस गए। उन्होंने घर में मौजूद कारोबारी प्रवीण चावला, उनकी पत्नी, बहू और पोते को बंधक बना लिया और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद उन्होंने आराम से घर की अलमारियां तोड़ीं और लाखों रुपये के गहने व नकदी लूटकर फरार हो गए।

पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें गुड्डू कुमार कामत, रमन कामत और अमित सिंह उर्फ गब्बर शामिल हैं। इनमें से कुछ आरोपी पहले भी आपराधिक मामलों में शामिल रह चुके हैं। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी गुड्डू कुमार कामत पहले कई जगहों पर घरेलू सहायक के रूप में काम कर चुका है और इसी अनुभव का इस्तेमाल उसने इस वारदात को अंजाम देने में किया।

जांच में यह भी सामने आया कि जिन घरेलू सहायकों को नौकरी पर रखा गया था, उनका पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था। यही लापरवाही इस बड़ी वारदात की वजह बनी। फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में दिल्ली-एनसीआर, बिहार और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में छापेमारी कर रही है।

इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम अपने घरों में काम करने वाले लोगों की पृष्ठभूमि की सही तरीके से जांच करते हैं? अक्सर लोग जल्दी में या सुविधा के लिए बिना सत्यापन के ही घरेलू सहायकों को काम पर रख लेते हैं, जो आगे चलकर जोखिम भरा साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू सहायकों का पुलिस सत्यापन कराना बेहद जरूरी है। इसके अलावा घर में सीसीटीवी कैमरे लगाना, कीमती सामान को सुरक्षित स्थान पर रखना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखना भी आवश्यक है।

दिल्ली में सामने आई ये घटनाएं केवल अपराध की कहानियां नहीं हैं, बल्कि एक चेतावनी भी हैं। ये हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि सुरक्षा केवल बाहरी खतरों से ही नहीं, बल्कि अंदरूनी जोखिमों से भी करनी जरूरी है। अगर समय रहते सावधानी बरती जाए, तो इस तरह की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

फिलहाल पुलिस दोनों मामलों में आगे की जांच कर रही है और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। लेकिन इन घटनाओं ने लोगों के मन में डर और सतर्कता दोनों को बढ़ा दिया है, जो आने वाले समय में सुरक्षा के प्रति जागरूकता को और मजबूत कर सकता है।

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