सौरभ शेखर श्रीवास्तव की ब्यूरो दरभंगा। जेडीयू नेता एवं समाजसेवी राजेश्वर राणा के पिता तथा क्षेत्र के सम्मानित समाजसेवी राजकुमार सिंह का शुक्रवार देर रात्रि हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार, रिश्तेदारों, शुभचिंतकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके असामयिक निधन को समाज और क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। वे अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार, सामाजिक विरासत और जनसेवा की अमिट पहचान छोड़ गए हैं।

राजकुमार सिंह अपने सरल स्वभाव, विनम्र व्यवहार, मिलनसार व्यक्तित्व और समाज के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे। वे उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने बिना किसी पद या प्रचार की इच्छा के समाज के बीच रहकर लोगों की सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया। वर्षों तक उन्होंने सामाजिक सरोकारों से जुड़े विभिन्न कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभाई और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए हमेशा तत्पर रहे। क्षेत्र के लोगों के बीच उनकी पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में थी, जो हर सुख-दुख में लोगों के साथ खड़े रहते थे।
उनके निधन की सूचना मिलते ही शनिवार सुबह से ही लहेरियासराय के बलभद्रपुर स्थित उनके आवास पर लोगों का तांता लग गया। अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग पहुंचे। सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की तथा शोकाकुल परिवार को सांत्वना दी। इस दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम दिखीं और सभी ने उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए उन्हें सच्चा समाजसेवी और मानवीय मूल्यों का प्रतीक बताया।

राजकुमार सिंह का जीवन संघर्ष, सेवा और सामाजिक प्रतिबद्धता का उदाहरण रहा। उन्होंने हमेशा समाज में सद्भाव, भाईचारा और आपसी सहयोग की भावना को बढ़ावा देने का कार्य किया। वे मानते थे कि समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब सभी लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनें। इसी सोच के साथ उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय सामाजिक कार्यों में लगाया और लोगों के बीच विश्वास तथा सम्मान अर्जित किया।
क्षेत्र के वरिष्ठ लोगों का कहना है कि राजकुमार सिंह का व्यवहार सभी वर्गों के लोगों के प्रति समान था। वे जाति, धर्म और राजनीतिक विचारधारा से ऊपर उठकर लोगों की मदद करते थे। किसी भी व्यक्ति को यदि किसी प्रकार की समस्या होती थी तो वे उसकी सहायता के लिए आगे आते थे। यही कारण है कि उनके निधन की खबर सुनकर समाज के हर वर्ग के लोग गमगीन हो उठे।
राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि राजकुमार सिंह का जाना समाज के लिए एक बड़ी क्षति है। उन्होंने अपने जीवन में जो सम्मान और विश्वास अर्जित किया, वह उनके उत्कृष्ट चरित्र और सेवा भावना का परिणाम था। लोगों ने कहा कि आज के समय में ऐसे व्यक्तित्व विरले ही देखने को मिलते हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के समाज के लिए समर्पित होकर कार्य करते हों।
परिजनों के अनुसार शुक्रवार देर रात अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। हृदय गति रुक जाने के कारण उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार में शोक का माहौल छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
स्वर्गीय राजकुमार सिंह अपने पीछे पत्नी रेणु सिंह, दो पुत्र राजेश्वर राणा एवं रामशंकर सिंह, दो पुत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिवार के सभी सदस्य उनके आदर्शों और संस्कारों को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं। परिजनों ने बताया कि उन्होंने हमेशा परिवार को सामाजिक मूल्यों, ईमानदारी और सेवा की भावना के साथ जीवन जीने की प्रेरणा दी। उनके मार्गदर्शन और स्नेह ने परिवार को मजबूत आधार प्रदान किया।

अंतिम दर्शन के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि राजकुमार सिंह ने अपने व्यवहार और कार्यों से समाज में जो पहचान बनाई, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी। उन्होंने लोगों को जोड़ने का कार्य किया और हमेशा सकारात्मक सोच के साथ समाज के विकास में योगदान दिया। उनके निधन से जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसकी भरपाई कर पाना आसान नहीं होगा।
श्रद्धांजलि देने पहुंचे लोगों ने कहा कि राजकुमार सिंह का जीवन सादगी, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण था। वे हमेशा दूसरों के हितों को प्राथमिकता देते थे और समाज में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने के पक्षधर थे। उनका व्यक्तित्व इतना प्रभावशाली था कि जो भी उनसे एक बार मिलता था, वह उनके व्यवहार और आत्मीयता से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता था।
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि राजकुमार सिंह ने समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए हमेशा चिंता की। वे लोगों की समस्याओं को सुनते थे और उनके समाधान के लिए हर संभव प्रयास करते थे। उनकी यही विशेषता उन्हें आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाती थी। उन्होंने अपने जीवन में जो मानवीय संबंध बनाए, वही आज उनके प्रति लोगों के अपार प्रेम और सम्मान के रूप में दिखाई दे रहे हैं।
शोक व्यक्त करने वालों ने उनके जीवन से जुड़े कई संस्मरण साझा किए। लोगों ने बताया कि वे हमेशा मुस्कुराकर लोगों का स्वागत करते थे और किसी भी व्यक्ति को निराश नहीं लौटाते थे। उनके व्यक्तित्व में विनम्रता और आत्मीयता का अद्भुत समन्वय था। यही कारण है कि उनके निधन की खबर सुनते ही दूर-दूर से लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने कहा कि राजकुमार सिंह का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची प्रतिष्ठा पद, धन या शक्ति से नहीं, बल्कि सेवा, सदाचार और मानवीय मूल्यों से प्राप्त होती है। उन्होंने अपने आचरण से समाज को यह संदेश दिया कि दूसरों की सहायता और समाज के प्रति जिम्मेदारी ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।
उनके निधन पर शोक व्यक्त करने वालों ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें। लोगों ने कहा कि भले ही राजकुमार सिंह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्य, उनके विचार और उनकी मानवीय संवेदनाएं हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेंगी।
स्वर्गीय राजकुमार सिंह का निधन केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक ऐसी क्षति है जिसे लंबे समय तक महसूस किया जाएगा। समाज सेवा के प्रति उनका समर्पण, लोगों के प्रति उनका स्नेह और मानवीय मूल्यों के प्रति उनकी आस्था आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। क्षेत्र के लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी स्मृतियां सदैव जीवित रहेंगी और उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।

स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !