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वकील समीर सैफी हत्याकांड: तीन दोषियों को फांसी**

मुजफ्फरनगर में चर्चित समीर सैफी हत्याकांड में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए तीन आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है, जबकि एक अन्य को सात साल की कैद दी गई है। इस फैसले से सात साल पुराने इस मामले में न्याय की उम्मीद लगाए बैठे परिवार को बड़ी राहत मिली है।

यह फैसला अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-3) रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने सुनाया। अदालत ने मुख्य आरोपी सिंगोल अल्वी, रिजवान उर्फ सोनू और शालू उर्फ अरबाज को हत्या का दोषी मानते हुए मृत्युदंड दिया। वहीं, इस अपराध में सहयोग करने वाले दिनेश को सात वर्ष की सजा सुनाई गई है। साथ ही सभी दोषियों पर जुर्माना भी लगाया गया है, जिसकी कुल राशि 13.30 लाख रुपये है।

मामले की शुरुआत अक्टूबर 2019 में हुई थी, जब 28 वर्षीय एडवोकेट समीर सैफी अचानक लापता हो गए थे। 15 अक्टूबर को उन्होंने अपने नए चैंबर का उद्घाटन किया था, लेकिन उसी दिन के बाद उनका कोई पता नहीं चला। अगले दिन उनके पिता मोहम्मद अजहर ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।

जांच के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल डिटेल्स का विश्लेषण किया। इन सुरागों के आधार पर 19 अक्टूबर 2019 को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें सिंगोल अल्वी, रिजवान, शालू उर्फ अरबाज और दिनेश शामिल थे।

पूछताछ में सामने आया कि समीर सैफी और सिंगोल अल्वी के बीच पैसों का विवाद चल रहा था। सीकरी गांव में स्थित पोल्ट्री फार्म में दोनों की साझेदारी थी और सिंगोल पर समीर के लगभग 45 लाख रुपये बकाया थे। इसी आर्थिक विवाद ने हत्या की साजिश को जन्म दिया।

अभियोजन के अनुसार, सिंगोल ने अपने साथियों के साथ मिलकर समीर का अपहरण किया। उन्हें एक कार में बैठाकर भोपा रोड की ओर ले जाया गया, जहां रस्सी से गला दबाकर उनकी हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए सीकरी गांव के पास गड्ढा खोदकर दफना दिया गया।

दिनेश, जो पोल्ट्री फार्म पर काम करता था, ने शव को छिपाने में आरोपियों की मदद की। पुलिस ने बाद में आरोपियों की निशानदेही पर शव बरामद किया, जिससे पूरे मामले का खुलासा हुआ।

पुलिस ने अपनी जांच पूरी करने के बाद 30 जनवरी 2020 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने छह गवाह पेश किए और सीसीटीवी फुटेज सहित कई अहम साक्ष्य अदालत में प्रस्तुत किए। इन मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों मुख्य आरोपियों को दोषी करार दिया।

अदालत ने सिंगोल अल्वी पर सबसे अधिक 11.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया, जबकि रिजवान और शालू उर्फ अरबाज पर 2.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं, दिनेश को सात साल की सजा के साथ 10 हजार रुपये का अर्थदंड दिया गया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जुर्माने की पूरी राशि मृतक के पिता को दी जाए।

फैसला सुनाने के बाद चारों दोषियों को तुरंत हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया। जानकारी के अनुसार, मुख्य आरोपी सिंगोल अल्वी पहले से ही जेल में बंद था, जबकि अन्य आरोपी जमानत पर बाहर थे।

इस मामले में अदालत ने जांच में लापरवाही को भी गंभीरता से लिया है। तत्कालीन थाना प्रभारी और संबंधित क्षेत्राधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश जारी किए गए हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायालय ने इस पूरे प्रकरण को बेहद गंभीरता से देखा।

यह मामला इस बात की मिसाल है कि पैसों के विवाद किस तरह हिंसक अपराध का रूप ले सकते हैं। साथ ही, यह फैसला यह भी दिखाता है कि न्यायिक प्रक्रिया भले ही लंबी हो, लेकिन ठोस साक्ष्यों के आधार पर अंततः न्याय मिलता है।

कुल मिलाकर, मुजफ्फरनगर के इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में आया यह फैसला न सिर्फ पीड़ित परिवार के लिए राहत भरा है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि कानून से बचना संभव नहीं है और अपराध का अंजाम सजा ही होता है।

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