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मां की पुकार अधूरी रह गई—नीलकंठ दर्शन को निकला कपिल, घर लौटी उसकी निर्जीव देह

दिल्ली के नांगलोई क्षेत्र में रहने वाले एक संयुक्त परिवार के लिए बुधवार का दिन जिंदगी का सबसे दुखद दिन बन गया। घर के आंगन में जहां कभी हंसी-खुशी और सपनों की बातें हुआ करती थीं, वहीं अब हर तरफ सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है। परिवार के होनहार बेटे कपिल पराशर की एक सड़क हादसे में मौत ने न सिर्फ उनके अपनों को तोड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को भी शोक में डुबो दिया।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

18 सदस्यों के इस संयुक्त परिवार में कपिल की खास जगह थी। वह आठ पोते-पोतियों में चौथे नंबर पर था और सभी का चहेता था। परिवार के बुजुर्ग रतन लाल शर्मा के सामने जब उनके पोते की अर्थी उठी, तो यह दृश्य इतना दर्दनाक था कि वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।

किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जो बेटा कुछ समय पहले तक हंसता-बोलता नजर आ रहा था, वह अब हमेशा के लिए खामोश हो गया है। घर के हर कोने में सिर्फ एक ही चर्चा थी—“ऐसा कैसे हो गया?”

पढ़ाई पूरी कर बड़े सपनों की ओर बढ़ रहा था कपिल

कपिल पराशर ने हाल ही में बहादुरगढ़ स्थित PDM University से बीटेक (आईटी) की पढ़ाई पूरी की थी। वह पढ़ाई में अच्छा था और अपने भविष्य को लेकर बेहद गंभीर था।

उसका सपना था कि वह पुलिस सेवा में अधिकारी बने। इसके लिए वह दिन-रात मेहनत कर रहा था। उसने राज्य और केंद्र स्तर की परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी थी। परिवार को पूरा विश्वास था कि कपिल एक दिन वर्दी पहनकर उनका नाम रोशन करेगा।

आखिरी बार मां से कही थी ये बात

हादसे से पहले कपिल ने अपनी मां से जो बातचीत की, वह अब हमेशा के लिए याद बन गई है। मंगलवार रात करीब साढ़े नौ बजे उसने फोन कर बताया कि वह हरिद्वार जा रहा है।

उसने मां से कहा था कि वह नीलकंठ मंदिर में भगवान के दर्शन करेगा और अपने करियर के लिए प्रार्थना करेगा। मां ने भी बेटे को आशीर्वाद दिया और कहा कि जल्दी वापस आना। लेकिन यह उनकी आखिरी बातचीत साबित हुई।

आधी रात को आई दुखद सूचना

रात करीब 11:45 बजे परिवार के पास पुलिस का फोन आया। फोन पर मिली खबर ने पूरे परिवार को हिला कर रख दिया। बताया गया कि कपिल का एक्सीडेंट हो गया है।

यह सुनते ही घर में चीख-पुकार मच गई। कपिल के चाचा और अन्य परिजन तुरंत बागपत के लिए रवाना हो गए। रास्ते भर सभी भगवान से यही प्रार्थना करते रहे कि कपिल सुरक्षित हो, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

हाईवे पर हुआ भीषण हादसा

जानकारी के अनुसार, कपिल अपने दोस्त प्रयागराज कौशिक के साथ कार से देहरादून जा रहा था। दोनों रास्ता देखने के लिए Google Maps का इस्तेमाल कर रहे थे।

वे दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड हाईवे पर आगे बढ़ रहे थे। मवीकलां गांव के पास उनकी कार अचानक सड़क पर लगे अस्थायी बैरियर से टकरा गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।

पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

शव घर पहुंचते ही मचा कोहराम

बुधवार शाम जब कपिल का शव घर लाया गया, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। परिवार के लिए यह पल असहनीय था।

सबसे मुश्किल घड़ी तब आई, जब उसके पिता को इस हादसे के बारे में बताया गया। उनकी तबीयत पहले से ही खराब थी, इसलिए परिवार ने उन्हें पहले यह खबर नहीं दी थी। लेकिन अंतिम संस्कार के लिए उनका मौजूद होना जरूरी था।

जब उन्हें सच्चाई पता चली, तो वे पूरी तरह टूट गए। बेटे को अंतिम विदाई देते समय उनका दर्द हर किसी को झकझोर रहा था।

मां का दर्द—हर दिल को छू गया

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाला दृश्य कपिल की मां का था। वह बार-बार एक ही सवाल पूछ रही थीं—“मेरा कपिल आ गया क्या?”

उन्हें अब भी विश्वास नहीं हो रहा था कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। एक मां के लिए अपने जवान बेटे को खोना सबसे बड़ा दुख होता है, और यही दर्द इस परिवार में साफ दिखाई दे रहा था।

अधूरी रह गई जिंदगी की कहानी

कपिल के जाने से सिर्फ एक बेटा नहीं खोया, बल्कि उसके साथ कई सपने भी खत्म हो गए। जिस बेटे से परिवार को उम्मीद थी कि वह अधिकारी बनकर घर का नाम रोशन करेगा, वह अब सिर्फ यादों में रह गया है।

उसकी मेहनत, उसका संघर्ष और उसका जुनून अब अधूरा रह गया है। परिवार के हर सदस्य के दिल में एक ही सवाल है—अगर वह उस रात यात्रा पर नहीं जाता, तो क्या आज वह जिंदा होता?

जिंदगी की अनिश्चितता का सबक

यह हादसा एक बार फिर यह याद दिलाता है कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है। इंसान भविष्य के लिए कितनी ही योजनाएं बना ले, लेकिन किस पल क्या हो जाए, यह कोई नहीं जानता।

कपिल भगवान के दर्शन करने निकला था, अपने सपनों के लिए दुआ मांगने जा रहा था, लेकिन वह खुद ही एक दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया।

निष्कर्ष

आज कपिल का परिवार गहरे सदमे में है। घर की दीवारें, उसकी किताबें और उसकी यादें हर किसी को रुला रही हैं। एक होनहार युवक का यूं अचानक चले जाना न सिर्फ उसके परिवार के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ी क्षति है।

यह कहानी सिर्फ एक हादसे की नहीं, बल्कि उन टूटे हुए सपनों की है, जो अब कभी पूरे नहीं हो पाएंगे। कपिल भले ही इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन उसकी यादें हमेशा उसके परिवार के दिलों में जिंदा रहेंगी।

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