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हनुमान जयंती पर दिल्ली में सतर्कता के साए में निकलीं शोभायात्राएं, पुलिस की मुस्तैदी से टला बड़ा तनाव

हनुमान जयंती के अवसर पर राजधानी दिल्ली में इस बार भक्ति और सतर्कता का अनोखा संगम देखने को मिला। उत्तम नगर, जहांगीरपुरी और तुगलकाबाद जैसे संवेदनशील इलाकों में शोभायात्राएं निकाली गईं, लेकिन इन यात्राओं के दौरान कई बार हल्के तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हुई। हालांकि, दिल्ली पुलिस की मुस्तैदी और समय पर की गई कार्रवाई के चलते हालात पूरी तरह नियंत्रण में रहे और किसी बड़ी घटना को टाल दिया गया।

इस धार्मिक पर्व को लेकर प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड में था। पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे, जिसमें बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई। इसके अलावा, संवेदनशील इलाकों में सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी और लगातार पेट्रोलिंग के जरिए हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी।

तुगलकाबाद में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब शोभायात्रा एक धार्मिक स्थल के पास से गुजर रही थी। इसी दौरान कुछ शरारती तत्व छत पर चढ़कर नाचने लगे, जिससे माहौल बिगड़ने की आशंका पैदा हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और हालात को संभाल लिया। अतिरिक्त बल तैनात कर स्थिति को शांतिपूर्ण बनाया गया।

वहीं जहांगीरपुरी के डबल ई ब्लॉक में बिना अनुमति शोभायात्रा निकालने की कोशिश की गई। पुलिस ने लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ लोग नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए कई लोगों को हिरासत में लिया। हालांकि, इसके बावजूद पूरे इलाके में बड़ी घटना नहीं हुई और माहौल सामान्य बना रहा।

उत्तम नगर में भी शोभायात्रा के दौरान भावनात्मक माहौल देखने को मिला। यहां पंचमुखी हनुमान की प्रतिमा के साथ एक दिवंगत युवक की तस्वीर रखी गई थी, जिसने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। बड़ी संख्या में लोग यात्रा में शामिल हुए और भक्ति भाव के साथ भगवान हनुमान का स्मरण किया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस बार सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष ध्यान दिया गया था, खासकर उन इलाकों में जहां पहले भी तनाव की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। 2022 में जहांगीरपुरी में हनुमान जयंती के दौरान हुई हिंसा को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन ने कोई भी जोखिम नहीं लिया। अमन समितियों की बैठकें कराई गईं और स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई।

दिल्ली सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी इस अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने करोल बाग स्थित 108 फुट ऊंचे संकट मोचन धाम में पूजा-अर्चना कर दिल्ली की खुशहाली और शांति की कामना की। उन्होंने कहा कि भगवान हनुमान का जीवन सेवा, साहस और समर्पण का प्रतीक है, जिससे हर व्यक्ति को प्रेरणा लेनी चाहिए।

आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने चिराग दिल्ली में शोभायात्रा का आयोजन किया। इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने भी कई मंदिरों में जाकर पूजा की और देश-प्रदेश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की।

इस दौरान एक सकारात्मक तस्वीर भी सामने आई, जब जहांगीरपुरी में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने शोभायात्रा का स्वागत करते हुए पुष्प वर्षा की। इस पहल ने सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल पेश की। स्थानीय लोगों ने इसे एकता का प्रतीक बताया और कहा कि ऐसे प्रयास समाज को जोड़ने का काम करते हैं।

सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने पूरे इलाके में फ्लैग मार्च भी निकाला। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त खुद बुलेट पर सवार होकर क्षेत्र का निरीक्षण करते नजर आए, जिससे लोगों में सुरक्षा की भावना मजबूत हुई। जगह-जगह चेकिंग की गई और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष चौकियां बनाई गईं।

इस बीच एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर भंडारों पर भी देखने को मिला। कई आयोजकों को गैस एजेंसियों से सिलेंडर नहीं मिल पाए, लेकिन श्रद्धालुओं ने इसका समाधान भी निकाल लिया। लोगों ने अपने घरों से सिलेंडर देकर भंडारे को सफल बनाया। जहां गैस की व्यवस्था नहीं हो सकी, वहां फल और मिठाइयों का वितरण किया गया।

लक्ष्मी नगर, निर्माण विहार और सदर बाजार जैसे इलाकों में भी श्रद्धालुओं ने मिल-जुलकर भंडारे आयोजित किए। सामाजिक संगठनों और स्थानीय आरडब्ल्यूए ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस दौरान जरूरतमंदों को भोजन और प्रसाद वितरित किया गया।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि वे किसी भी तरह की अफवाह या सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक जानकारी पर विश्वास न करें। उन्होंने कहा कि शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है और इसमें जनता का सहयोग बेहद जरूरी है।

कुल मिलाकर, इस बार हनुमान जयंती पर दिल्ली में जहां एक ओर श्रद्धा और उत्साह देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की सतर्कता ने यह सुनिश्चित किया कि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो। हल्के तनाव के बावजूद किसी बड़ी घटना का न होना इस बात का संकेत है कि सही रणनीति और सामूहिक सहयोग से हर चुनौती का सामना किया जा सकता है।

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