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खुली टंकी बनी मौत का कुआं: दिल्ली में 9 साल के मासूम की दर्दनाक मौत, पिता ने उठाए सवाल

दक्षिण-पूर्व दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने एक परिवार की खुशियों को पलभर में खत्म कर दिया। तुगलकाबाद क्षेत्र में खेलते-खेलते एक 9 वर्षीय मासूम बच्चे की निर्माणाधीन मकान में बनी पानी की टंकी में गिरकर मौत हो गई। इस घटना ने न केवल इलाके में शोक की लहर दौड़ा दी, बल्कि सुरक्षा मानकों और लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

मृतक बच्चे की पहचान श्रेयांश के रूप में हुई है, जो अपने परिवार के साथ तुगलकाबाद गांव में रहता था। वह पास के नगर निगम स्कूल में चौथी कक्षा का छात्र था। घटना 8 अप्रैल की है, लेकिन इसके बाद सामने आए तथ्यों और पिता द्वारा जताए गए संदेह ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

खेलते-खेलते मौत के मुंह में समा गया मासूम

घटना वाले दिन श्रेयांश रोज की तरह स्कूल गया था। स्कूल की छुट्टी के बाद उसकी बहन उसे लेने गई थी। दोनों घर की ओर लौट रहे थे, लेकिन रास्ते में बहन उसका बैग लेकर आगे चलने लगी, जबकि श्रेयांश अपने दोस्तों के साथ पीछे रह गया।

घर पहुंचने पर जब बहन ने देखा कि उसका भाई साथ नहीं आया है, तो उसने पिता को बताया कि वह शायद रास्ते में दोस्तों के साथ खेलने के लिए रुक गया है। परिवार को उस समय इस बात का अंदेशा नहीं था कि कुछ ही देर में एक भयानक खबर उनका इंतजार कर रही है।

दोस्त ने दी हादसे की जानकारी

कुछ ही देर बाद श्रेयांश का एक दोस्त उसके घर पहुंचा और घबराए हुए अंदाज में बताया कि श्रेयांश एक निर्माणाधीन मकान के अंदर बनी पानी की टंकी में गिर गया है। यह सुनते ही परिवार के लोग तुरंत मौके की ओर दौड़े।

जब वे निर्माणाधीन मकान पर पहुंचे, तो वहां का नजारा बेहद डरावना था। टंकी का मुंह खुला हुआ था और उसके पास ही श्रेयांश की चप्पल पड़ी हुई थी। इससे साफ हो गया कि वह खेलते-खेलते अनजाने में टंकी में गिर गया था।

पिता ने टंकी में उतरकर निकाला बेटा

बिना देर किए श्रेयांश के पिता खुद टंकी के अंदर उतरे। करीब 10 फीट गहरी टंकी से उन्होंने अपने बेटे को बाहर निकाला। उस समय श्रेयांश बेहोश था और उसकी हालत बेहद गंभीर थी।

परिजनों ने तुरंत उसके शरीर से पानी निकालने की कोशिश की और उसे मुंह से सांस देकर होश में लाने का प्रयास किया। इसके बाद उसे तुरंत एक निजी अस्पताल ले जाया गया।

अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

परिवार की उम्मीदें अस्पताल पहुंचते ही टूट गईं, जब डॉक्टरों ने जांच के बाद श्रेयांश को मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

पिता ने जताया संदेह

इस पूरे मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब श्रेयांश के पिता ने उसकी मौत को लेकर संदेह जताया। उनका कहना है कि जब उन्होंने अपने बेटे को टंकी से बाहर निकाला, तो उसके मुंह से झाग निकल रहे थे। इस बात ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि कहीं उसके साथ कुछ और तो नहीं हुआ।

पिता की इस आशंका ने मामले को और गंभीर बना दिया है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

पुलिस ने शुरू की जांच

घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने लापरवाही से मौत का मामला दर्ज करते हुए निर्माणाधीन मकान के मालिक जगदीश (61) को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में यह मामला लापरवाही का प्रतीत होता है, क्योंकि टंकी खुली हुई थी और वहां कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं थे। हालांकि, पिता द्वारा जताए गए संदेह को ध्यान में रखते हुए पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे

पुलिस ने आसपास के इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगालनी शुरू कर दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के समय वहां क्या हुआ था और श्रेयांश टंकी में कैसे गिरा।

अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असली कारणों का खुलासा हो सकेगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

निर्माणाधीन भवनों में सुरक्षा की कमी

यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि निर्माणाधीन इमारतों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाते। खुले टैंक, बिना ढक्कन के गड्ढे और असुरक्षित ढांचे बच्चों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे स्थानों को पूरी तरह से सुरक्षित करना जरूरी है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

श्रेयांश के माता-पिता छोटे स्तर पर चाय की दुकान चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उनके लिए यह हादसा असहनीय है। जिस बेटे को उन्होंने प्यार से पाला, उसकी अचानक मौत ने उन्हें पूरी तरह से तोड़ दिया है।

समाज के लिए सबक

यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि हमें अपने आसपास के माहौल को सुरक्षित बनाना होगा, खासकर बच्चों के लिए। छोटी सी लापरवाही भी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है।

निष्कर्ष

गोविंदपुरी की यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही का परिणाम है। एक मासूम की जान चली गई, और एक परिवार हमेशा के लिए दुख में डूब गया।

जरूरत है कि हम इस घटना से सीख लें और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाएं। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना हम सभी की जिम्मेदारी है, ताकि कोई और परिवार इस तरह के दर्द से न गुजरे।

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