22 अप्रैल 2025 का दिन देश कभी नहीं भूल सकता। जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पहलगाम स्थित बायसरन घाटी, जो हमेशा सैलानियों की हंसी और सुकून के लिए जानी जाती थी, उस दिन गोलियों की आवाज से गूंज उठी। आतंकियों ने निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाया और 26 लोगों की जान ले ली। इस कायरतापूर्ण हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। हर तरफ गुस्सा था, शोक था और एक ही सवाल था—इसका जवाब कब और कैसे दिया जाएगा?

हमले के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विदेश दौरे पर थे, लेकिन घटना की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तुरंत अपना दौरा बीच में छोड़ा और भारत लौट आए। अगले ही दिन 23 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की आपात बैठक बुलाई गई। इस बैठक में कई बड़े फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ा। भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, अटारी बॉर्डर बंद कर दिया और पाकिस्तान के नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए। इसके अलावा पाकिस्तान उच्चायोग के कर्मचारियों की संख्या भी घटा दी गई।
दूसरी तरफ, गृह मंत्री अमित शाह ने श्रीनगर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और सुरक्षा एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और आतंकियों के स्केच जारी किए गए। इस बीच सीमा पर भी तनाव बढ़ने लगा। पाकिस्तान की ओर से लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया जाने लगा, जिसका भारतीय सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया।
हालात धीरे-धीरे युद्ध जैसे बनते जा रहे थे। 7 मई 2025 की सुबह भारत ने एक निर्णायक कदम उठाया और “ऑपरेशन सिंदूर” की शुरुआत की। यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि एक सटीक और रणनीतिक जवाब था। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में आतंकियों के कई ठिकाने पूरी तरह तबाह हो गए और बड़ी संख्या में आतंकी मारे गए।
भारत की इस कार्रवाई से पाकिस्तान बौखला गया। उसने 7 से 9 मई के बीच भारत के कई हिस्सों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने की कोशिश की। लेकिन भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने इन सभी हमलों को नाकाम कर दिया। एक भी हमला अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका। इसके उलट, भारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के 13 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें 11 एयरबेस भी शामिल थे। इन हमलों से पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि आखिरकार पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मदद की जरूरत पड़ी। उसने अमेरिका से हस्तक्षेप की अपील की। 10 मई 2025 को पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत से संपर्क कर युद्धविराम की मांग की। भारत ने अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने के बाद इस पर सहमति जताई और शाम 5 बजे से दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोक दी गई।
लेकिन भारत का मिशन यहीं खत्म नहीं हुआ था। असली मकसद उन आतंकियों को सजा देना था, जिन्होंने पहलगाम में मासूमों की जान ली थी। इसके लिए शुरू हुआ “ऑपरेशन महादेव”। यह ऑपरेशन धैर्य, तकनीक और सटीक रणनीति का उदाहरण बना।
खुफिया एजेंसियों को पता चला कि इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा के तीन विदेशी आतंकी शामिल थे—सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिबरान भाई। ये आतंकी दक्षिण कश्मीर के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में छिप गए थे। उन्हें पकड़ना आसान नहीं था।
सेना ने अपने सबसे प्रशिक्षित पैरा स्पेशल फोर्सेज को इस मिशन में लगाया। ड्रोन, सैटेलाइट इमेजिंग और आधुनिक सेंसर की मदद से करीब 300 वर्ग किलोमीटर इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। धीरे-धीरे आतंकियों को घेरते हुए सेना ने उन्हें दाचीगाम के सीमित इलाके में कैद कर दिया।
करीब 93 दिनों तक चले इस ऑपरेशन का अंत 28 जुलाई 2025 को हुआ। उस रात सेना की एक विशेष टीम ने दुर्गम पहाड़ियों में 10 घंटे पैदल चलकर आतंकियों को चारों ओर से घेर लिया। इसके बाद हुई मुठभेड़ में तीनों आतंकी मारे गए। इस तरह पहलगाम हमले के गुनहगारों को उनके अंजाम तक पहुंचा दिया गया।
ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव ने यह साबित कर दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलता है। चाहे दुश्मन सीमा पार हो या देश के अंदर छिपा हो, उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। यह सिर्फ बदला नहीं था, बल्कि एक संदेश था—भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर हद तक जा सकता है।
पहलगाम की उस दर्दनाक घटना के एक साल बाद, देश ने यह दिखा दिया कि वह न सिर्फ अपने जख्मों को भरना जानता है, बल्कि दुश्मनों को करारा जवाब देना भी जानता है।
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