अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते ईरान-इजरायल तनाव और उससे जुड़ी अफवाहों का असर अब स्थानीय स्तर पर भी दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में गुरुवार को रसोई गैस सिलिंडर को लेकर अचानक अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई। इंडेन गैस के सर्वर पर “नो बुकिंग” का संदेश आने के बाद बड़ी संख्या में लोग गैस एजेंसियों पर पहुंच गए। देखते ही देखते कई एजेंसियों के बाहर सैकड़ों लोगों की लंबी कतारें लग गईं। घंटों इंतजार करने के बाद भी जब कई उपभोक्ताओं को सिलिंडर नहीं मिला तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और कई जगहों पर हंगामा और नोकझोंक की स्थिति बन गई।

सुबह से ही एजेंसियों पर जुटने लगी भीड़
मेरठ के कई इलाकों में सुबह से ही गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की भीड़ दिखाई देने लगी थी। परतापुर थाना क्षेत्र के पुट्ठा रोड स्थित ब्रह्म ज्योति गैस एजेंसी, गगोल रोड की बाल सुंदरा गैस एजेंसी और मोहिद्दीनपुर की वर्धमान गैस एजेंसी पर तड़के छह बजे से ही लोग लाइन में लग गए थे।
कई उपभोक्ता बिना नाश्ता किए घंटों तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें सिलिंडर मिल जाएगा, लेकिन लंबी प्रतीक्षा के बावजूद जब गैस नहीं मिली तो उनकी नाराजगी बढ़ने लगी। धीरे-धीरे स्थिति ऐसी बन गई कि कुछ स्थानों पर लोगों के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की तक होने लगी।
कई जगहों पर हुआ हंगामा
लंबे समय तक लाइन में खड़े रहने के बाद भी सिलिंडर नहीं मिलने पर कुछ उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। वर्धमान गैस एजेंसी के बाहर लोगों ने विरोध जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। हालात बिगड़ते देख एजेंसी संचालक ने डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर शांत कराने की कोशिश की। पुलिस ने उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाया कि गैस वितरण की व्यवस्था जल्द सामान्य कर दी जाएगी। इसके बाद किसी तरह स्थिति को नियंत्रण में लाया गया।
कालाबाजारी के आरोप
लाइन में लगे कई उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए। लोगों का कहना था कि कुछ प्रभावशाली लोगों को एजेंसी कर्मचारी ऊंचे दामों पर सिलिंडर उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि आम उपभोक्ताओं को कई-कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग एजेंसियों से मिलीभगत कर गैस सिलिंडर बाजार में अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। उनका कहना था कि एजेंसी से सिलिंडर उठाकर उन्हें घर-घर पहुंचाया जा रहा है और इसके लिए उपभोक्ताओं से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं।
उपभोक्ताओं के अनुसार जब वे एजेंसी पर पहुंचते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि गैस उपलब्ध नहीं है, जबकि दूसरी तरफ कुछ लोगों को तुरंत सिलिंडर मिल जाता है। इसी वजह से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
कतार में खड़े लोगों में हुई नोकझोंक
भीड़ अधिक होने के कारण कतार में लगे लोगों के बीच कई बार बहस की स्थिति बन गई। कुछ लोग लाइन तोड़कर आगे जाने की कोशिश कर रहे थे, जिससे अन्य उपभोक्ता नाराज हो गए। इस कारण कई स्थानों पर तीखी बहस और धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई।
घंटों तक खड़े रहने के बाद भी जब लोगों को सिलिंडर नहीं मिला तो कई उपभोक्ता एजेंसी संचालकों से उलझ पड़े। हालांकि पुलिस और एजेंसी कर्मचारियों ने समझदारी दिखाते हुए स्थिति को संभालने की कोशिश की।
होटल और ढाबा संचालक भी परेशान
घरेलू गैस के साथ-साथ कॉमर्शियल गैस की आपूर्ति भी प्रभावित होने की खबर सामने आई है। इसके कारण शहर के कई होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
होटल संचालकों का कहना है कि अगर समय पर गैस सिलिंडर नहीं मिला तो उन्हें अपने कारोबार में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। कई जगहों पर भोजन बनाने का काम भी प्रभावित होने लगा है।
स्कूलों में मिड डे मील पर संकट
गैस की कमी का असर केवल घरों और व्यवसायों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव स्कूलों में चलने वाले मिड डे मील कार्यक्रम पर भी पड़ने लगा है। दौराला विकास खंड के कई परिषदीय विद्यालयों में गैस सिलिंडर की कमी के कारण मिड डे मील बनाना मुश्किल हो गया है।
भराला स्थित प्राथमिक विद्यालय की इंचार्ज शशि कौशिक ने बताया कि स्कूल में बच्चों के लिए भोजन बनाने के लिए उन्हें 1350 रुपये में घरेलू सिलिंडर खरीदना पड़ा। उन्होंने कहा कि पहले गैस आसानी से उपलब्ध हो जाती थी, लेकिन अब बुकिंग तक नहीं हो पा रही है।
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि अगर जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन बनाना मुश्किल हो सकता है।
प्रशासन ने दी सफाई
इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि जिले में घरेलू गैस की कोई कमी नहीं है। जिलाधिकारी वी.के. सिंह ने कहा कि कुछ लोग अफवाहों के कारण घबराकर गैस एजेंसियों पर भीड़ लगा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि कई उपभोक्ताओं के घरों में पहले से भरा हुआ सिलिंडर मौजूद है, लेकिन भविष्य में गैस खत्म होने की आशंका के कारण लोग अतिरिक्त सिलिंडर लेने के लिए एजेंसियों पर पहुंच रहे हैं।
कालाबाजारी पर सख्ती के निर्देश
जिलाधिकारी ने कहा कि गैस की कालाबाजारी को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने गैस डीलरों और जिला पूर्ति अधिकारी को सख्त निर्देश दिए हैं कि बाजार में सिलिंडर निर्धारित कीमत पर ही उपलब्ध कराया जाए।
इसके साथ ही प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति गैस की जमाखोरी करता हुआ पाया गया या निर्धारित कीमत से अधिक दाम पर सिलिंडर बेचता हुआ मिला तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अफवाहों से बचने की अपील
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराकर गैस एजेंसियों पर भीड़ न लगाएं। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत होने पर ही गैस की बुकिंग कराएं और अनावश्यक रूप से सिलिंडर जमा न करें।
इसके अलावा प्रशासन ने यह भी निर्देश दिए हैं कि ठेले-रेहड़ी और छोटे व्यवसायों में घरेलू गैस सिलिंडर का इस्तेमाल रोकने के लिए अभियान चलाया जाए। जिला पूर्ति अधिकारी को इस संबंध में छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष
मेरठ में गैस सिलिंडर को लेकर पैदा हुई अफरा-तफरी ने यह दिखा दिया है कि अफवाहें किस तरह लोगों में घबराहट पैदा कर सकती हैं। हालांकि प्रशासन का दावा है कि गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन उपभोक्ताओं की भीड़ और कालाबाजारी के आरोप इस बात की ओर इशारा करते हैं कि स्थिति को संभालने के लिए प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।
अगर समय रहते आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर नहीं किया गया और अफवाहों पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए जरूरी है कि प्रशासन सख्ती से कालाबाजारी पर रोक लगाए और लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराए।
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