दिल्ली में उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े गोरखधंधे का खुलासा हुआ है। पुलिस की अपराध शाखा ने राजधानी के दिल्ली के कंझावला इलाके में चल रही नकली टूथपेस्ट बनाने वाली फैक्टरी पर छापा मारकर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। इस कार्रवाई में हजारों की संख्या में नकली टूथपेस्ट ट्यूब, कच्चा माल और उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बरामद की गई हैं। पुलिस ने इस मामले में फैक्टरी संचालक हरि ओम मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के अनुसार, यह अवैध फैक्टरी बेहद गुप्त तरीके से चलाई जा रही थी, जहां स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए पेस्ट को नामी ब्रांड के पैकेज में भरकर बाजार में बेचा जा रहा था। इस पूरे रैकेट का खुलासा एक गुप्त सूचना के आधार पर हुआ, जिसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए छापा मारा।
अपराध शाखा के अधिकारियों ने बताया कि यह छापा कंझावला स्थित महावीर विहार के एक गोदाम में मारा गया, जहां बड़े पैमाने पर नकली उत्पाद तैयार किए जा रहे थे। जब पुलिस टीम मौके पर पहुंची, तो वहां काम कर रहे मजदूर स्थानीय रूप से तैयार किए गए पेस्ट को Sensodyne जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड के ट्यूब में भर रहे थे। इसके बाद उन्हें सील कर आकर्षक पैकिंग में बाजार में असली उत्पाद के रूप में भेजा जाता था।
इस दौरान पुलिस ने मौके से करीब 1,800 तैयार नकली टूथपेस्ट ट्यूब, 10,472 खाली ट्यूब और 616 ढक्कन लगे ट्यूब बरामद किए। इसके अलावा लगभग 130 किलोग्राम स्थानीय स्तर पर बना कच्चा पेस्ट, पैकेजिंग सामग्री, ब्रांडेड टेप, गोंद, हीटिंग गन और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए। पुलिस का कहना है कि जब्त किए गए सामान की कुल कीमत लाखों रुपये में आंकी गई है।
जांच में यह भी सामने आया कि इस फैक्टरी में किसी भी तरह के स्वास्थ्य या स्वच्छता मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। बेहद गंदगी भरे माहौल में तैयार किए जा रहे इस नकली पेस्ट से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता था। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे उत्पादों के इस्तेमाल से दांतों और मसूड़ों में संक्रमण, एलर्जी और अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
पुलिस उपायुक्त के अनुसार, मौके पर मौजूद मजदूरों ने पूछताछ में बताया कि यह यूनिट रोहिणी निवासी हरि ओम मिश्रा द्वारा संचालित की जा रही थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को उत्तम नगर के ओम विहार एक्सटेंशन इलाके से गिरफ्तार किया। आरोपी के खिलाफ बिना लाइसेंस, फर्जी ब्रांडिंग और अवैध उत्पादन के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी लंबे समय से इस धंधे में लिप्त था और बड़े पैमाने पर नकली उत्पाद बाजार में सप्लाई कर रहा था। वह सस्ते कच्चे माल का उपयोग कर कम लागत में उत्पाद तैयार करता और उन्हें महंगे ब्रांड के नाम पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाता था।
इस पूरे गोरखधंधे का सबसे खतरनाक पहलू यह था कि आम उपभोक्ता असली और नकली उत्पाद में अंतर नहीं कर पाते थे। पैकेजिंग इतनी मिलती-जुलती होती थी कि पहली नजर में कोई भी धोखा खा सकता था। यही कारण है कि ऐसे रैकेट लंबे समय तक बिना पकड़े चलते रहते हैं।
पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से बाजार में बड़े पैमाने पर पहुंचने वाले नकली और हानिकारक उत्पादों पर रोक लगी है। साथ ही, इस मामले में जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क का विस्तार किन-किन क्षेत्रों तक था और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बाजार में बिकने वाले उत्पादों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी को लेकर व्यवस्था कितनी मजबूत है। विशेषज्ञों का मानना है कि उपभोक्ताओं को भी सतर्क रहने की जरूरत है और किसी भी उत्पाद को खरीदते समय उसकी पैकेजिंग, कीमत और गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए।
सरकार और संबंधित एजेंसियों के लिए यह एक चेतावनी है कि नकली उत्पादों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। खासतौर पर स्वास्थ्य से जुड़े उत्पादों में इस तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बड़े खतरे को समय रहते टाल दिया है। लेकिन यह भी सच है कि ऐसे गोरखधंधे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। इसलिए जरूरी है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां लगातार सतर्क रहें और उपभोक्ता भी जागरूक बनें, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े से बचा जा सके।
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