यूपी :: टमाटर की फसल में कीट लगने से किसान चिंतित, कर रहे कीटनाशक का छिड़काव

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लखनऊ(राज प्रताप सिंह) : टमाटर की पौध रोपाई से लेकर फसल की कटाई तक बड़ी संख्या में कि उठो और रोगों का प्रभाव अधिकांश बना रहता है फसल में इस समय फल छेदक,माहू,सफेद मक्खी, पत्ती खनिक, बदबूदार कीड़ो का प्रभाव है। फसल में नौकरी के कारण उपाधि को कम करते हैं आदित्य टमाटर पत्ती कर्ल वायरस जैसे सयंत्र रोगों को फैलाने में मदद करते हैं।स्टाउट,मध्यम आकर,अग्रपंख के केंद्र के मध्य में गहरे धब्बे होते हैं पिछले पंख पीले रंग के साथ में ही काले भूरे रंग की सीमा एवं पीले रंग का मार्जिन पाया जाता है। वयस्कों द्वारा भूरे पीले रंग के वाह्यदलपुंज तथा नवीनतम फलों पर खूबसूरती से उकेरे हुए अंडे देते हैं। अंडे तीन-चार दिन में अंडे फूटते हैं तथा नवजात शिशु आरंभ में ताजा हरे ऊतकों को खाते हैं। तथा बाद में फलों में छेद कर देते हैं। लावी छेद के दूसरी ओर फल के पीछे अंत में एक छेद करते हैं पूर्ण विकसित लावी की विशेषता सफेद रंग के साथ काले भूरे रंग के अनुधैर्य धारियां दिखाई देती हैं सबसे हानिकारक चरण युवा लवी होता है। अंडे सेने पर लावी मुलायम पते पर हमला करते हैं एक लावी 4 या 6 फल नष्ट करने में सक्षम है। ऐसे फल उपभोक्ताओं द्वारा पसंद नहीं किया जाते हैं फल पर किए गए छेद गोल होते हैं और केवल छेद के अंदर ऊपरी हिस्से को ही खाते हैं। पर्याक्रमण हरे फल पर अधिक है और अम्लता बढ़ जाती हैं। और यह फल धीरे-धीरे कम पसंद किए जाते है। अच्छी 25 दिन पुरानी टमाटर की पौध को 1:16 के अनुपात में पंक्तियों में एक साथ बोयें। मादा पतंगे अंडे देने के लिए आकर्षित होती हैं प्रकाश जाल की अस्थापना से वयस्क पतंगों को मारने के लिए आकर्षित किया जा सकता है।फेरोमोन जाल के स्थापना एक हेक्टेयर में 12 करनी चाहिए क्षतिग्रस्त फलों को इकट्ठा करके नष्ट कर देना चाहिए प्रारंभिक दौर लावी को मारने के लिए 5% नीम के बीज गिरी के तेल का छिड़काव करें प्रति हेक्टेअर 15-20 पक्षियों के बैठने के लिए रखना चाहिए जो कीट भक्षी पक्षियों को आमंत्रित करने में मदद करता है। फल छेदक से संरक्षण के लिए 250 एल ई/ हेक्टर के साथ-साथ 20 ग्राम/लीटर गुड़ का 10 दिनों के अंतराल पर छिड़काव भी लाभदायक होता है। अंडा परजीवी जैसे ट्राइकोग्राम सिलीनियस को 50,000/हेक्टेयर/सप्ताह की दर से छह बार जारी करना चाहिए और पहले रिलीज फूल समय के साथ मिलनी चाहिए पानी का बेसिलस थुरिजेसिस 2 ग्रा/लीटर या फ्लूबेंडिएमाइड 20 डब्लू जी 5 ग्रा/10 लीटर या इंडोक्साकाव 5 एससी 8 मिली/10 लीटर की दर से छिड़काव करना चाहिए वयस्क छोटे धातुनुमा मक्खियां पत्ता की सतह पर छेद करके एसएपी खिलाती है। वाह पत्तियों के बाहरी मार्जिन पर अंडे देता है।2-3 दिनों के स्वतः ही कीड़े इन अंडो से बाहर आते है और मिट्टी में 6-10 दिनों में और कभी-कभी पत्ती की सतह पर कोषस्थ धारण करना शुरू कर देते हैं।ये भुनगे एपीडमिर्स के बीच चक्करदार सुरंगे बना कर खाना शुरू कर देते हैं नर्सरी में टेढ़ी पत्तियों को देखने पर इन्हें हाथ द्वारा नष्ट कर देना चाहिए रोपण के 15-20 दिनों बाद क्षेत्र में नीम के वीर पाउडर 4% या नीम साबुन 1% का छिड़काव करना चाहिए घटना उच्च है अगर खुले परिस्थितियों में अगर संक्रमण अधिक है तो संक्रमित पत्तियों को हटा दें और ट्राईजोफोस 40ईसी 5 ग्राम नीम/लीटर के साथ मिश्रित करके छिड़काव करें।

संरक्षित जगहों पर सिंथेटिक कीटनाशकों के लगातार छिड़काव करने से बचें अगर आवश्यकता है तब डेल्टामेथ्रिन8ईसी एक मिली/लीटर या साइपरमेथ्रिन 25 ईसी 0.5 मिली/लीटर या ट्राईजोफोस 40 ई सी 2 मिली/लीटर की दर से छिड़काव  किया जा सकता है व्यस्क लगभग 1 मीमी लंबे, पुरुष महिला से थोड़ा छोटे होते हैं शरीर और पंखों के दोनों जोड़े रंग में थोड़ा पीले रंग, सफेद एक खस्ता, मोमी स्त्राव जैसे होते हैं अंडे आधार पर एक डंडी कील के साथ नासपत्ती के आकार के हैं,लगभग 0.2मिमी लंबे होते हैै अनियमित अंडाकार आकार के लगभग 0.7मिमी लंबे एक जैसे बढ़ाना त्रिकोणीय छिद्र वाले होते हैं। एक चिकनी पत्ती पर वह दिखाई नहीं देते लेकिन अगर पत्ती बालों वाली हो तो 2 या 6 लंबे प्रस्ठीय बालनुमा मौजूद होते हैं। सफेद मक्खियों द्वारा आर को चूसने और संयंत्र पोषक तत्वों को हटाने के कारण पौधे कमजोर हो जाते हैं और वह प्रत्यक्ष नुकसान होता है। अगर पौधों के आसपास पानी भरा हुआ है तो नुकसान और अधिक गंभीर हो सकता है। सफेद मक्खी टमाटर पत्ती कर्ल वायरस के संक्रमण और संचारित होने से फसल के पूर्ण रूप से नुकसान होने का खतरा बना रहता है ववस्क को आकर्षित करने के लिए 12/ हेक्टेयर किधर से पीला चिपचिपा जाल स्थापित करें।ऐबूटीलोन इंडीकम नामक वैकल्पिक मेजबान खरपतवार को निकाल दें सफेद मक्खी पत्ती कर्ल वायरस के प्रसार करने में वैक्टर के रूप में कार्य करती है सभी प्रभावित पौधों को आगे प्रसार से बचाने के लिए उखाड़ कर निकाल देना चाहिए। नरम शरीर नासपाती के आकार कीड़े पेट साफ करने वाला एक पुच्छ की के साथ एक जोड़ी गहरे शंख़कार पंखो वाला या पंखहीन हो सकता है आमतौर पर पंख हीन रूप में ही होता है।  झुंड में खाना मलिन किरण या पत्ते कोमोड़ना तथा  शहदनुमा पदार्थ छोड़ता है।जिस पर मकड़ी जैसे लाल रंगक घुन,पत्ते  के नीचे धागे नुमा आकृति बनाकर उसका रस चूसती है जिससे पत्ते का ऊपरी भाग पीले रंग जैसा दिखाई देता है बाद में पत्ता मुड़कर पूरी तरह से सूख जाता है। जिससे पैदावार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है वह कीट गर्म आर्द्र जलवायु में अधिक सक्रिय हो जाता है पौधशाला में पौधे की मौत के लिए लेकिन सामान्य शब्द है यह अत्यधिक गीलापन होने के कारण पौधों के उगने के तुरंत बाद या कुछ दिन बाद शुरू होती है मुख्य रूप से यह अगेती मौसम की ठंडी गीली मिट्टी में होने वाली सबसे खतरनाक समस्या है वह एक कवक रोग है जो सभी प्रकार की मिट्टी में हो जा सकता है जहां टमाटर वर्गीय फसलें उगाई जाती हैं और जहां मिट्टी गीला है वहां पर य टमाटर को भी संक्रमित कर सकते हैं हालांकि संक्रमण ठंडे मौसम में अधिक रहता है परंतु फाइटोप्थेरा और राइजोक्टोनिआ भी गर्म मौसम में पौधों को संक्रमित कर सकते हैं टमाटर के अंकुर दो या तीन पत्ती के स्तर तक पहुंच जाने के बाद पिथियम य राइजोक्टोनिय द्वारा संक्रमण की कोई संभावना नहीं होती है किंतु फाइटोप्थेरा किसी भी स्तर पर टमाटर के पौधों को संक्रमित कर सकते हैं हरी खाद के रूप में ऐसे स्वयंसेवक अनाज पौधा लगाने से पहले मृत्यु में मौजूद रहते हैं तो वहां पर पिथियम द्वारा कमरतोड़ वृद्धि हो सकती है पौध उगने से पहले या तुरंत बाद गिर का खत्म हो जाती है कमरतोड़ आमतौर पर जल निकासी ना होने से या उन क्षेत्रों में जहां की मिट्टी कठोर होती है तथा पानी खड़ा हो जाता है तथा पौध रोपण के तुरंत बाद अत्यधिक पानी के संपर्क में आने से आती है जरूरी नहीं कि या बीमारी एक मौसम से दूसरे मौसम जाए लेकिन जब परिस्थितियां अनुकूल हो जाते हैं तो इसके संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है अंकुरण के लिए छिड़काव विधि का उपयोग करने के तथा पानी के बेहतर नियंत्रण करने से संक्रमण की संभावना कम हो जाती है बैक्टीरियल धब्बा संतोषजनक से संक्रमण पौधों के सभी भागों पर घाव का उत्पादन कर सकते हैं जैसे पत्तियां,तन, फूल और फल। प्रारंभिक पत्ती पर लक्षण एक पीले रंग की प्रभामंडल से गिरा हो सकता है जो छोटे गोल से अनियमि गहरे घावो जैसे होते हैं।घाव,पत्ती के किनारो और अग्र भाग पर 3-5 मिमी ब्यास के आकार में बृद्धि करते है।प्रभावित पत्तियां पर एक झुलस जैसी दिखाई देती है।स्पॉट अनेक हो जाते है तथा जब पत्ते पीले रंग में बदल जाते है और अंत में पौधे के निचले हिस्से के पतझड़ होकर पौधा मर जाता है।आरम्भ में फलों के घावों केवल हरे फल पर सुरु कर होते है,अपरिपक फलों पर संक्रमण की सबसे अधिक संभावना बनी रहती है।फल पर पहला लक्षण छोटे गहरे भूरे रंग के काले धब्बे बनना सुरु होते है।घाव चिड़िया की आँख जैसे धब्बों के साथ जीवाणु कर्क की तरह सफेद हेलो हो सकता है।फलो की उम्र के साथ-साथ सफेद हेलो गायब हो जाते है।इसके बिपरीत,बैक्टिरियल घावों का ब्यास 4-6मिमी के आकार में भूरा चिकना और कभी-कभी रूखा हो सकता है।फ्यूजेरियम उखटा कवक जनित रोग है। जो आरम्भिक जड़ो के माध्यम से पुरे पौधों को संक्रमित करता है।इससे संक्रमित पौधों की शाखाओ और पत्ते पीले हो जाते है।कभी-कभी एक शाखा या पौधे के एक तरफ का भाग प्रभावित हो जाता है।संक्रमित पौधे अक्सर मर जाते है।एक गहरे भूरे रंग की संवाहनी मलिनकिरण तने तक फैल जाती है।लक्षण अक्सर पहली पहल के दौरान प्रकट होते है। संक्रमित टमाटर का पौधा शुरू में छोटे कद का और सीधा दिखता है बाद में गंभीर संक्रमित पौधों में वृद्धि कम होती है दूसरे पौधों की अपेक्षा बहुत छोटा रहता है हालांकि सबसे नैदानिक लक्षण पत्तियों में होते हैं संक्रमित पौधों की पत्तियां छोटी होती हैं ऊपर की ओर मुड़ी दिल्ली दिखाने लगती हैं संक्रमित पौधा की आंतरिक गांठे काकरोद विकास के साथ-साथ कम बढ़वार भावना दिखाई देता है अगर पौधों में संक्रमण जल्दी हो जाता है तो फल उत्पादन नाटकी रूप से बहुत ही कम हो जाता है या भारी संक्रमण पौधों के साथ क्षेत्रों में 100% नुकसान होने के लिए असामान्य नहीं है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि टमाटर की खेती करने वाले किसान भाई फसल में कीट लगने पर कीटनाशक दवाओं के बजाय नीम की फली से बना नीम का पाउडर व साबुन का खेत के रकबे के अनुसार इस्तेमाल कर फसल में छिड़काव करें तो ज्यादा फायदेमंद होगा।