बिहार में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेस-वे के किनारे राज्य में चार आधुनिक इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किए जाएंगे। इसके लिए बिहार सरकार ने जमीन की तलाश शुरू कर दी है और उद्योग विभाग विस्तृत कार्ययोजना पर काम कर रहा है।

प्रस्तावित योजना के तहत ये औद्योगिक पार्क गया, रोहतास, कैमूर और औरंगाबाद जिलों में स्थापित किए जाएंगे। वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेस-वे की बिहार में कुल लंबाई अब 186 किलोमीटर होगी, जिससे राज्य को उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी। इस मार्ग के जरिए कोलकाता और हल्दिया पोर्ट तक लगभग 6 घंटे में पहुंचना संभव होगा, जिससे निर्यात को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
उद्योग विभाग का लक्ष्य इन औद्योगिक पार्कों को निर्यात-केंद्रित हब के रूप में विकसित करना है। यहां उत्पादन इकाइयों के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स और डिस्पैच की बेहतर सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। नई प्रोत्साहन नीति के बाद इन जिलों में निवेश को लेकर उद्यमियों की रुचि बढ़ी है और बड़े उद्योग समूहों के आने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
राज्य सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार के लिए करीब 19 हजार एकड़ भूमि की पहचान की है, जिसका उपयोग मौजूदा और प्रस्तावित दोनों तरह के औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाएगा। नए एलाइनमेंट के बाद एक्सप्रेस-वे का मार्ग सासाराम शहर से होकर गुजरेगा, जिससे सड़क की लंबाई में लगभग 33 किलोमीटर का इजाफा हुआ है और औद्योगिक गतिविधियों को और गति मिलेगी।
उद्योग मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार भौगोलिक रूप से लैंडलॉक्ड राज्य है, इसलिए उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए पड़ोसी राज्यों के पोर्ट से जुड़ाव जरूरी है। वाराणसी–कोलकाता एक्सप्रेस-वे पर बनने वाले ये चार इंडस्ट्रियल पार्क बिहार को औद्योगिक और निर्यात मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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