उत्तर भारत में मौसम इन दिनों अस्थिर बना हुआ है। पश्चिमी विक्षोभ भले ही कमजोर पड़ चुका हो, लेकिन इसका असर अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यही कारण है कि राजस्थान, उत्तर-पश्चिमी भारत और पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम बार-बार करवट ले रहा है। कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो रही है तो कहीं तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसके साथ ही गर्मी और उमस ने लोगों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।

मौसम विभाग के अनुसार हाल ही में सक्रिय रहा पश्चिमी विक्षोभ अब कमजोर हो चुका है, लेकिन इसके अवशेष अभी भी उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित कर रहे हैं। यह विक्षोभ उत्तर पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के आसपास सक्रिय था, जिससे व्यापक स्तर पर मौसम में बदलाव देखने को मिला। अब इसके कमजोर पड़ने के बावजूद वातावरण में अस्थिरता बनी हुई है, जिसके चलते अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम की गतिविधियां जारी हैं।
राजस्थान के ऊपर बना ऊपरी हवा का चक्रवात अब उत्तर-पूर्वी राजस्थान की ओर खिसक गया है। इस बदलाव ने राज्य के मौसम को और सक्रिय कर दिया है। पूर्वी राजस्थान में हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। हवाओं की रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे तापमान में गिरावट तो आएगी, लेकिन साथ ही जनजीवन भी प्रभावित हो सकता है।
हालांकि उत्तर भारत के कुछ अन्य हिस्सों, विशेषकर मैदानी और पहाड़ी इलाकों में फिलहाल मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रह सकता है, लेकिन यह स्थिति ज्यादा समय तक स्थिर नहीं रहेगी। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं और फिर से बारिश या आंधी-तूफान की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं।
अगर पिछले 24 घंटों के मौसम पर नजर डालें तो देश के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई है। असम और मेघालय में भारी वर्षा हुई, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल के गंगा तटीय क्षेत्रों, अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और तटीय कर्नाटक में भी बारिश देखी गई। इसके अलावा राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी गरज के साथ बौछारें पड़ीं।
पूर्वोत्तर भारत में मौसम की स्थिति और अधिक गंभीर बनी हुई है। अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है। इन राज्यों में लगातार हो रही वर्षा से बाढ़ और भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे स्थानीय प्रशासन सतर्क हो गया है।
दूसरी ओर, मध्य भारत के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि का खतरा बना हुआ है। किसानों के लिए यह स्थिति चिंता का कारण है, क्योंकि इस समय कई फसलें तैयार अवस्था में हैं। ओलावृष्टि होने पर फसलों को भारी नुकसान हो सकता है, जिससे आर्थिक संकट भी गहरा सकता है।
मौसम की इस अनिश्चितता के बीच गर्मी और उमस ने आम लोगों का जीवन मुश्किल कर दिया है। दिन में तेज धूप और उच्च आर्द्रता के कारण लोगों को घुटन महसूस हो रही है। खासकर शहरी क्षेत्रों में, जहां कंक्रीट के ढांचे अधिक हैं, वहां हीट आइलैंड प्रभाव के कारण तापमान और अधिक महसूस होता है। इससे लोगों की काम करने की क्षमता पर भी असर पड़ रहा है।
वैश्विक स्तर पर भी बढ़ती गर्मी और उमस एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। हाल ही में एक पर्यावरणीय शोध पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि अत्यधिक तापमान और नमी के कारण लोगों के काम करने और सामान्य गतिविधियां करने के सुरक्षित घंटे लगातार घट रहे हैं। यह समस्या खासतौर पर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ज्यादा गंभीर है।
वैज्ञानिकों ने 1950 से 2024 तक के मौसम आंकड़ों का विश्लेषण किया। इस अध्ययन से पता चला कि पिछले कुछ दशकों में गर्मी के कारण दैनिक गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ा है। पहले जहां लोग दिन के अधिक समय तक काम कर सकते थे, वहीं अब अत्यधिक तापमान के कारण उन्हें सीमित समय में ही काम करना पड़ रहा है।
इसका सबसे अधिक असर बुजुर्गों पर पड़ रहा है। अध्ययन के अनुसार बुजुर्गों के लिए सालाना असुरक्षित घंटों की संख्या 600 से बढ़कर लगभग 900 घंटे तक पहुंच गई है। इसका मतलब है कि साल के करीब तीन महीने तक वे सुरक्षित रूप से बाहर निकलकर सामान्य गतिविधियां नहीं कर सकते।
हालांकि यह समस्या केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। युवा आबादी भी इससे प्रभावित हो रही है। अध्ययन के अनुसार दुनिया के लगभग 35 प्रतिशत युवा ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं, जहां गर्मियों के दौरान दिन के सबसे गर्म घंटों में काम करना सुरक्षित नहीं होता। वहीं बुजुर्गों के लिए यह आंकड़ा 78 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
शोध में यह भी सामने आया है कि दुनिया के कई हिस्से जीवनयोग्यता की सीमा के करीब पहुंच चुके हैं। खासकर फारस की खाड़ी, उप-सहारा पश्चिम अफ्रीका, दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ क्षेत्रों में तापमान और आर्द्रता का स्तर इतना अधिक हो जाता है कि मानव शरीर अपने आप को ठंडा नहीं रख पाता। ऐसी स्थिति में बिना किसी कृत्रिम ठंडक के बाहर रहना बेहद खतरनाक हो सकता है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में मौसम की अनिश्चितता और बढ़ सकती है। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही लोगों को भी बदलते मौसम के अनुरूप अपनी दिनचर्या में बदलाव करना होगा।
फिलहाल उत्तर भारत के लोगों के लिए सलाह यही है कि वे मौसम के ताजा अपडेट पर नजर रखें। तेज आंधी, बारिश या ओलावृष्टि की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर रहें और अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। वहीं गर्मी और उमस से बचने के लिए पर्याप्त पानी पिएं और हल्के कपड़े पहनें।
कुल मिलाकर, कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के बावजूद मौसम की अस्थिरता यह साफ संकेत दे रही है कि जलवायु का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आने वाले दिनों में भी मौसम इसी तरह चौंकाने वाले बदलाव दिखा सकता है, जिसके लिए सतर्क रहना बेहद जरूरी है।
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