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दरभंगा में ‘वंडर एप’ लांच, अब मातृत्व मृत्यु दर पर लगेगी रोक

डेस्क : जिलाधिकारी, दरभंगा डाॅ. त्यागराजन एस.एम. ने कहा है क वंडर एप के इस्तेमाल से मातृत्व मृत्यु दर पर पूर्ण रूपेण रोक लग सकेगी। अभी इस जिला में मातृत्व मृत्यु दर 177 है, जो राष्ट्रीय एवं राज्य औसत से काफी ज्यादा है। जागरूकता की कमी एवं समुचित मेकेनिज्म के प्रचलन में नहीं रहने के चलते जिला में मातृत्व मृत्यु दर ज्यादा है।

स्वास्थ्य विभाग का व्यापक नेटवर्क रहने के बावजूद मेटेरनल डेथ हो जा रहे है। जो अत्यंत चिंतनीय है। इस समस्या का निदान वंडर एप से संभव है। वंडर एप को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर जिला के दो प्रखण्डों यथा – बहादुरपुर एवं बेनीपुर में लाॅच किया गया है। इसके सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं। अब इस एप कोे पूरे जिला में लाॅच किया जायेगा।


उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग, बिहार को इस एप के लाॅचिंग के बारे में प्रस्ताव भेजा गया है। जिस पर विभाग की स्वीकृति शीघ्र प्राप्त होने की संभावना है। वे समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की बैठक में वंडर एप के आॅरियेंटेशन वर्कशाॅप में चिकित्सकों एवं चिकित्सा कर्मियों को संबोधित कर रहे थे।


उन्होंने कहा कि पहले सभी को वंडर एप के बारे में जानना जरूरी है। इस एप के बारे में जानकारी हो जाने पर इसका क्रियान्वयन भी बिल्कुल आसान होगा। यह एक मोबाईल सपोर्टेड एप है। इसे आसानी से किसी भी एंड्रायड मोबाईल में डाउनलोड किया जा सकता है।


वंडर एप आई.टी. बेस्ड एप है। इस एप में गर्भवती महिला की विस्तृत ब्यौरा की प्रविष्टि की जाती है। उक्त महिला के सामान्य जानकारी के साथ-साथ महिला के गर्भावस्था का ब्यौरा, मेडिकल हिस्ट्री, सर्जिकल हिस्ट्री एवं फैमिली हिस्ट्री का डाटा बेस तैयार किया जाता है।

अगर अमुक महिला के सेकेन्ड डिलीवरी होने जा रहा है तो पहले डिलिवरी का पूरा इतिहास का डाटा बेस तैयार करना है। इसमें यह देखा जायेगा कि उक्त महिला को पहला प्रसव सामान्य हुआ था या सिजेरियन हुआ था। अगर सिजेरियन हुआ था तो कोई जटिलता उत्पन्न हुई थी। मसलन क्या वह महिला किसी अन्य रोग से ग्रसित है। डायबीटिज, ब्लड प्रेसर आदि की शिकायत है। इस से संबंधित पूरी जानकारी एप पर डाली जायेगी। इसके ऐसा किये जाने पर उक्त महिला के प्रसव के दौरान या पूर्व में कोई जटिलता उत्पन्न होगी तो इसको टैकल करना आसान हो जायेगा।


उन्होंने कहा कि वंडर एप पर मरीज का संपूर्ण ब्यौरा मौजूद रहने पर प्राइमरी स्टेज पर ही किसी भी कपलीकेशन को ट्रैक किया जा सकेगा और इसके साथ ही जच्चा-बच्चा के अकाल मृत्यु को रोक सकेगे। उन्होंने कहा कि वंडर एप के इस्तेमाल से मातृत्व मृत्यु दर में कमी लाकर जिला में हम एक नजीर/उदाहरण पेश कर सकेगे। इस एप से काम करना बिलकुल आसान है। बस गर्भवती महिला का पता चलते ही इनका पूरा ब्यौरा वंडर एप पर डाल देनी है। इसके बाद यह एप जरूरी एलर्ट मैसेज भेजता रहेगा। जिसका फोलो-अप संबंधित चिकित्सक एवं चिकित्सा कर्मी के द्वारा की जायेगी।
उन्होंने कहा कि यह बिलकुल नया प्रयोग है। इसमें कुछ पी.एच.सी. के ए.एन.एम. को लीडरशिप देकर चैपियन बनाना होगा। फिर ये अन्य ए.एन.एम. को लीडरशिप प्रदान करेगी। इससे जिला में लीडरशिप का एक चैन विकसित होगा।


उन्होंने कहा कि मरीज के प्रथम निबंधन के वक्त ही उनका हिस्ट्री रिकाॅर्ड कर लेना सुविधा जनक होगा। इस बावत सभी एम.ओ.आई.सी. को अपने क्षेत्राधीन सभी गर्भवती महिलाओं का एक सप्ताह के अंदर डाटा बेस तैयार कर लेने का निदेश दिया गया। उन्होंने कहा कि 03-04 सितम्बर को वंडर एप पर गर्भवती महिलाओं के डाटा बेस की प्रगति की समीक्षा की जायेगी।
जिलाधिकारी ने कहा कि वंडर एप पर गर्भवती महिला का निबंधन एवं डाटा बेस अपलोड हो जाने पर एलर्ट मैसेज का फोलो-अप करने की जवाबदेही एम.ओ.आई.सी./प्रभारी चिकित्सकों की होगी। उन्होंने सुविधा हेतु सभी मरोजो का वंडर फाइल तैयार कर लेने का सुझाव दिया।


इसके पूर्व केयर इंडिया की डाॅ. श्रद्धा द्वारा वंडर एप पर गर्भवती महिलाओं के निबंधन एवं मेडिकल/सोशल हिस्ट्री की आॅनलाईन इन्ट्री करने की विधि का प्राजेक्टर पर पावर प्वाइंट प्रजेटेशन किया गया।
इस वर्कशाॅप में सिविल सर्जन डाॅ. ए.के. झा, डी.आई.ओ. श्री ए.के. मिश्रा, जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी श्री सुशील कुमार शर्मा, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, केयर इंडिया की डाॅ. श्रद्धा, सभी ए.एन.एम./बी.एच.एम. व डाटा इन्ट्री आॅपरेटर आदि सम्मलित हुए।

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