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पुरातत्व विभाग की कार्यशैली पर विफरे नीतीश

साईक्लोपियन वॉल को वर्ल्ड हेरिटेज साईट का मिले दर्जा

बिहारशरीफ। राजगीर के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित तीन दिवसीय राजगीर महोत्सव के उदधाटन के अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुरातत्व विभाग की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी जतायी। उन्होने हाल के दिनों में पुरातत्व विभाग द्वारा राजगीर के किला मैदान में राजगीर महोत्सव के आयोजन को लेकर लगायी गयी रोक पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि किला मैदान में आगे से कोई कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जायेगा। कार्यक्रमों के आयोजन के लिए हमनें यहॉ कन्वेंशन सेंटर का निर्माण करा दिया है। यहॉ का दृश्य मनोरम है। उन्होने पुरातत्व विभाग के कार्यकलाप पर सवाल उठाते हुये कहा कि नालंदा में कई ऐसे स्थल है जहॉ खुदाई की जरूरत है लेकिन पुरातत्व विभाग कोई काम हीं नहीं करता। उन्होने कहा कि तेल्हाड़ा में भी नालंदा विश्वविद्यालय की तरह विश्वविद्यालय हुआ करता था उसकी खुदाई की जरूरत थी। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा कई बार प्रयास किया गया और पुरातत्व विभाग से खुदाई की बात कही गयी लेकिन पुरातत्व विभाग द्वारा खुदाई नहीं की गयी। जिसके बाद राज्य सरकार द्वारा अनुमति लेकर खुद से खुदाई शुरू करायी गयी। खुदाई में ईसा पूर्व शताब्दी तक पहुंचने का प्रमाण मिला। अब आगे अनुमति मिलेगी तो आगे की खुदाई हो सकेगी। उन्होने कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर में जितनी खुदाई हुयी है उसमें 5वीं शताब्दी का होने का प्रमाण मिला। अब भी यहॉ बड़े पैमाने पर खुदाई की जरूरत है लेकिन पुरातत्व विभाग खुदाई करने का काम नहीं कर रही है। उन्होने कहा कि राजगीर में हीं साईक्लोपियन वॉल है। यह दुनिया का सबसे पुराना है। जिस प्रकार राज्य सरकार के प्रयास से प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय को वर्ल्ड हेरिटेज साईट का दर्जा दिलाने का काम किया गया उसी प्रकार साईक्लोपियन वॉल को वर्ल्ड हेरिटेज साईट का दर्जा दिलाने के लिए काम किया जायेगा।

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