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बिहार :: अंधराठाढ़ी कमला दित्य सूर्य मंदिर पर्यटन स्थलो की सूची में अब तक शामिल नही .


मधुबनी/अंधराठाढ़ी- रमेश कर्ण :
कमला दित्य सूर्य मंदिर पर्यटन स्थलो की सूची में अब तक शामिल नही करना
यहॉ की लोगो की पुरानी मांग है। कई बार इसकी जॉच पडताल भी की गयी। प्रतिवेदन सरकार तक गया । परन्तु अवतक पर्यटक स्थल के रूप में घोषित नहीं हो पाया है।  ग्रामीणो के द्वारा नये मंदिर के निर्माण के दौरान पुराने मंदिर की नीव में एक समाधि स्थल मिला था। समाधि स्थल के उपर एक शिलापट्ट था।उसपर मगरध्वज योगी का नाम अंकित है। शिलापट्ट के नीचे तपस्वी योगी का नरकंकाल भी मिला था। इसको मिट्टी के बरतन में समेट कर नवनिर्मित मंदिर में प्रतिमा पाद पीठ के नीचे गाड दिया गया । यह भी चर्चा है कि कमलादित्य स्थान में एक भोजपत्र का पेड हुआ करता था। प्राचीन काल में भोजपत्र पर लिखने की प्रथा थी। कमलादित्य स्थान में डाकनी माई का भी स्थाल प्राचीन काल से ही है।मध्यरात्रि में तेज लौ लेकर यदा कदा डाकनी माई के निकलने की भी चर्चा है। यहॉ तंत्र साधना पी रहने का भी साक्ष्य मिलता है। इस स्थान की यह भी खासियत है कि इसके चारो दिशा के कोण में सामान दूरी पर मदनेश्वर स्थान, मुक्तेश्वर स्थान ,चदेश्वर स्थान , हुलेश्वर स्थान नाम के चार प्रसिद्ध शिव मंदीर है। इतिहासिक साक्ष्य है कि कमलादित्य स्थान के नाम से तकरीवन 22एकड जमीन थी।अतिक्रमण और जमीन कुछ लोगो द्वारा खरीदने के कारण कमलादित्य स्थान फिलहाल कुछ कट्ठो में सिमट कर रह गया है।कमलादित्य स्थान पहुॅच पथ का अबतक काली करण नहीं हो पाया हैं । पूर्व सांसद प्रो रामदेव भंडारी के स्थानीय विकास एच्छिक कोष से आधा अधुरा खरंजाकरण हुआ था। इसके बादतत्कालीन विधायक नीतीश मिश्रा ने एक यात्री सेड का निर्माण कराया । पंचायत की ओर से सोलर लाईट , चापाकल आदि की यवस्था की गयी है। यहॉ बासन्तिक दूर्गा पूजा होती है और मेला लगता है।

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