मुरादाबाद में साइबर अपराध का एक ऐसा संगठित नेटवर्क सामने आया है, जिसने हजारों लोगों की मेहनत की कमाई को निशाना बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस की गहन जांच में यह खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने 1100 बैंक खातों का इस्तेमाल करते हुए पिछले तीन वर्षों में करीब 34 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। इस पूरे मामले की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इन खातों को गरीब और जरूरतमंद लोगों के नाम पर खुलवाया गया था, जिन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि वे एक बड़े अपराध का हिस्सा बन रहे हैं।

साइबर पुलिस द्वारा चिन्हित किए गए इन खातों में केवल ठगी से प्राप्त रकम का ही लेनदेन हुआ। जांच में यह पाया गया कि इन खातों का उपयोग किसी भी सामान्य बैंकिंग गतिविधि के लिए नहीं किया गया, बल्कि इन्हें केवल धोखाधड़ी के पैसे को इधर-उधर करने के लिए इस्तेमाल किया गया। यही कारण है कि पुलिस ने इन्हें संदिग्ध मानते हुए इनकी गहन जांच शुरू की।
एसपी क्राइम सुभाषचंद्र गंगवार के अनुसार, वर्ष 2023 से लेकर अब तक मुरादाबाद जिले में कुल 34 करोड़ रुपये की साइबर ठगी सामने आई है। इनमें से कई मामलों में पीड़ितों ने समय रहते साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके चलते करीब 9 करोड़ रुपये की राशि वापस दिलाने में सफलता मिली है। यह दर्शाता है कि त्वरित कार्रवाई से नुकसान को कम किया जा सकता है।
जांच के दौरान यह सामने आया कि 1100 बैंक खातों में से लगभग 500 खाते बंद हो चुके हैं, जबकि शेष खाते अभी भी सक्रिय हैं और उन पर नजर रखी जा रही है। इन खातों में सबसे अधिक संख्या मुरादाबाद जिले की है, जहां करीब 400 खाते खुले पाए गए हैं। इसके अलावा बदायूं जिले में भी बड़ी संख्या में ऐसे खाते मिले हैं, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई।
इतना ही नहीं, संभल, रामपुर, बिजनौर जैसे अन्य जिलों के लोगों को भी इस नेटवर्क का हिस्सा बनाया गया। ठगों ने इन लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए। कई मामलों में खाताधारकों को कुछ पैसे भी दिए गए, जिससे उन्हें शक न हो और वे इस प्रक्रिया को सामान्य समझें।
खाता खुलने के बाद ठग उन खातों का पूरा नियंत्रण अपने पास रख लेते थे। जब भी किसी व्यक्ति से ऑनलाइन ठगी की जाती, तो वह रकम सीधे इन खातों में डाली जाती थी। इसके बाद बेहद तेजी से, महज कुछ घंटों के भीतर, यह रकम अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी। इस प्रक्रिया को इस तरह अंजाम दिया जाता था कि पैसे का स्रोत और गंतव्य दोनों छिपे रहें।
पुलिस के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क काफी सुनियोजित और तकनीकी रूप से मजबूत था। ठग लगातार नए-नए खातों का इस्तेमाल करते थे और जैसे ही किसी खाते पर शक होता, उसे बंद कर देते थे। इससे जांच एजेंसियों के लिए अपराधियों तक पहुंचना और भी कठिन हो जाता था।
हालांकि अब साइबर पुलिस इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए तेजी से काम कर रही है। अब तक करीब 800 बैंक खाताधारकों तक पुलिस पहुंच चुकी है और उनसे पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह पाया गया है कि अधिकतर खाताधारक निर्दोष हैं और उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि उनके खातों का इस्तेमाल गैरकानूनी गतिविधियों के लिए हो रहा है।
पुलिस अब इन खाताधारकों के जरिए उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने इन खातों को खुलवाने और संचालित करने में अहम भूमिका निभाई। माना जा रहा है कि इस गिरोह के पीछे एक बड़ा और संगठित नेटवर्क काम कर रहा है, जिसमें कई लोग शामिल हो सकते हैं।
इस मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब पहले से कहीं ज्यादा चालाक और संगठित हो गए हैं। वे लोगों की जरूरतों और कमजोरियों का फायदा उठाकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं। खासतौर पर गरीब और कम पढ़े-लिखे लोग इनके आसान शिकार बन जाते हैं।
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने लोगों को जागरूक रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि किसी भी व्यक्ति के कहने पर बैंक खाता न खुलवाएं और अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे आधार नंबर, बैंक डिटेल, ओटीपी आदि किसी के साथ साझा न करें। इसके अलावा किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या लिंक से सावधान रहें।
ऑनलाइन लेनदेन करते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वेबसाइट सुरक्षित हो और उसका URL “https” से शुरू होता हो। सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग करते समय भी सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि ऐसे नेटवर्क पर डेटा चोरी होने की संभावना अधिक होती है।
यदि किसी के साथ साइबर ठगी होती है, तो उसे तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए और शिकायत दर्ज करानी चाहिए। समय पर की गई शिकायत से पैसे वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
कुल मिलाकर, मुरादाबाद का यह मामला एक बड़ी चेतावनी है कि साइबर अपराध किस तरह तेजी से फैल रहा है और किस तरह आम लोगों को इसका शिकार बनाया जा रहा है। ऐसे में जरूरी है कि हम सभी सतर्क रहें, जागरूकता बढ़ाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें, ताकि इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके।
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