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बिहार :: पुस्तकालय के जनक डा० एस० आर० रंगनाथन की मनाई गई 125वीं जयंती

दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. जयगोपाल ने कहा कि डॉ. एस.आर रंगनाथन पुस्तकालय विज्ञान के पुरोधा हैं। उनके बताए गए रास्ते पर चलने की आवश्यकता है। वे शनिवार को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान संस्थान, केन्द्रीय पुस्तकालय परिसर में डा० एस० आर० रंगनाथन की 125वीं जयन्ती को संबोधित करते हुए उक्त बातें कही। केन्द्रीय पुस्तकालय परिसर में स्थापित डा० एस० आर० रंगनाथन की मूर्ति पर माल्यार्पण प्रतिकुलपति प्रो० जयगोपाल डा० एस० आर० रंगनाथन पुस्तकालय क्षेत्र के एक मान पुरोधा थे उनके द्वारा प्रतिपादित नियमों एवं परिनियमों का अक्षरशः पालन आज पूरे विश्व स्तर पर किया जा रहा है। अपने संबोधन में प्रो० राम भरत ठाकुर ने कहा कि डा० एस० आर० रंगनाथन पुस्तकालय के जनक माने जाते हैं, इस क्रम में उन्होंने कहा कि उत्तम पुस्तक का संग्रह ही वर्त्तमान युग का सच्चा विश्वविद्यालय है। पुस्तकें घर की रोशनी समाज की ज्योति और कुल की आभा होती है। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के शिक्षक प्रो० गोपाल कृष्ण झा ने कहा कि पुस्तकालय के उन्नयन हेतु डा० एस० आर० रंगनाथन प्रतिपादित पुस्तकालय विज्ञान के सूत्र एवं उपसूत्र के आधार पर ही पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विषय को विज्ञान की श्रेणी प्राप्त हुई, जिसे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त हुई। पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के शिक्षक प्रो० मिथिलेश कुमार पासवान ने कहा कि रंगनाथन द्वारा निर्मित पुस्तकालय के पंच-सूत्र आज भी सभी प्रकार के पुस्तकालयों में मान्य है।केन्द्रीय पुस्तकालय रूपकान्त झा सूचीकार ने कहा कि डा० एस० आर० रंगनाथन को पुस्तकालय के क्षेत्र में सिद्धहस्त महापुरूषों के श्रेणी में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर गिने जाते हैं। इस अवसर पर केन्द्रीय पुस्तकालय तथा पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के कर्मचारियों यथा रजनीश कुमार मिश्र, शंभूनाथ झा, रमेश मिश्र, शम्भू दास, लालबाबू यादव, अजीत राम आदि उपस्थित थे।

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