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खुशखबरी :: मिथिला पाग पर डाक टिकट जारी, राष्ट्रीय स्तर पर मिथिला वासियों को मिला बड़ा सम्मान 

डेस्क : मिथिला की संस्कृति को ध्यान में रखकर भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा ‘‘मिथिला पाग’’ पर डाक टिकट जारी की गई है। मिथिला के सांस्कृतिक धरोहर को पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर इतना बड़ा सम्मान दिया गया है , जिससे मिथिलावासियों में खुशी की लहर है। यह संपूर्ण मिथिलावासी को मोदी सरकार की ओर से अनुपम भेंट है। 

भारत सरकार के डाक विभाग द्वारा जारी की गई एक बुकलेट में बताया गया है कि ‘‘पाग बिहार के मिथिला क्षेत्र के मैथिल लोगों की शिरोवस्त्र का नाम है। पाग आदर सम्मान का प्रतीक है और मिथिला क्षेत्र के लोग इसे बड़े गर्व से पहनते हैंं। पाग के इस्तेमाल की शुरूआत प्रोगैतिहासिक काल मे हुई। प्रारंभ में इसे पत्तों से तैयार किया जाता था। आधुनिक काल में इसका परिवर्तित रूप देखने को मिलता है। पाग विभिन्न रूप रंगो और आकारों के होते है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षो से पाग को राष्ट्रीय-अंर्तराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए मिथिलालोक फांउडेशन ‘‘पाग बचाउ अभिआन’’ चला रहा है। इस अभियान से अब तक लगभग एक करोड से ज्यादा मैथिल जुड़ चुके है।

पाग डाक टिकट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मिथिलालोक फांउडेशन के चेयरमैन डा बीरबल झा ने कहा कि पाग मिथिला की सांस्कृतिक पहचान एवं धरोहर है। भारत सरकार द्वारा इसे मान्यता मिलने से मिथिला को ही नहींं बल्कि भारतीय संस्कृति को मजबूती मिली है। हर मैथिल को इस पर गर्व करना चाहिए एवं पाग की स्मिता एवं महत्व को बढ़ाने के लिए आगे आना चाहिए। आगे डा झा ने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए पाग को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की है।

डा झा इन दिनों मिथिला पाग पर किताब लिख रहें है जो शीघ्र ही प्रकाशित होने वाली है। इस किताब में पाग की इतिहास की चर्चा विभिन्न चित्रों के साथ होगी। वे मिथिला की प्रतिष्ठा को पाग से जोड़ते हुए बताते हैंं कि यह पाग मिथिला के आन बान शान से जुड़ा हुआ है। उन्होंने अपील किया कि पाग रक्षार्थ एवं मिथिला के विकास में हर किसी को अपना योगदान देना चाहिए। पिछले वर्ष क्राफ्ट म्यूजियम में मिथिलालोक फांडेशन द्वारा पाग प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया था। जो पूरी दुनिया का ध्यान आकर्शित किया था। पाग रक्षार्थ के क्रम मे फरवरी 2016 में हजारों मैथिल मिथिलालोक फांउडेशन के बैनर तले दिल्ली और बिहार में पाग पहन कर ‘‘पाग मार्च’’ निकाला था।

डा बीरबल झा द्वारा लिखित गीत आउ हम सब मिल क पाग बचाबी, मैथिल क्षेत्र में सुपर हिट रहा। आज भी इस गीत तो घर घर में सुना जाता है। इस गाने के माध्याम से सभी मिथिलावासी से अपील की गई कि जाति-पाती से उपर उठ कर मिथिला की सांस्कृतिक चिन्ह पाग को बचाने के लिए आगे आए। पाग से कभी बंचित रही महिला भी अब बड़ी संख्या में इस अभियान से जुड़ रही है।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री प्रभात झा ने कहा कि डा बीरबल झा बिहार में एक्सट्रा आॅर्डिनरी पर्सनालिटी है उन्होने पाग बचाओ अभियान के माध्यम से मिथिला संस्कृति को मजबूत कर रहे है। उनके प्रयास का नतीजा है कि मिथिला की पहचान पाग राष्ट्रीय स्तर पर पहुंची है।

बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री राम लखन राम रमन ने कहा कि मुझे यह जानकर खुशी हुई कि जिस भूली बिसरी संस्कृति को मुहिम बना कर डा बीरबल झा ने पाग बचाउ अभियान चलाया , उस अभियान को अब चर्तुमुखी समर्थन मिल रहा है। सरकार द्वारा पाग डाक टिकट जारी करना डा झा की मुहिम की एक बड़ी जीत है। बिहार के कई विधायक पिछले वर्ष जून के महीने में पहली बार पाग पहनकर बिहार विधानसभा में पहुंचे थे। यह कार्यक्रम राम लखन राम रमन के नेतृत्व में किया गया था।

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