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जुताई-बुआई :: बारिश नहीं होने से दोहरी मार झेल रहा किसान

चकरनगर / इटावा (डॉ एस बी एस चौहान) : वर्षा का क्रम थम जाने के कारण किसानों की भी सांसे थम रहीं हैं। बरसात का मौसम चल रहा है लेकिन वर्षा न होने से किसान आसमान की तरफ घूर घूर कर निहार रहा है। कि पानी बरसे और कब खेतों की मौके की जुताई कर फसल की बुवाई करें, और जिन किसानों ने बुआई कर ली है तो उसका जमारा रुका हुआ है और जो अकुंरित हो चुके हैं तो उनकी कोमल फसलें जलाभाव में कुमलाईं हुईं नजर आ रहीं हैं। किसान दोहरी मार को झेलता हुआ भारी परेशान दिखाई दे रहा है। बताते चलें कि बरसात का सीजन चल रहा है आकाश में बादल तो आते हैं लेकिन धरा पर पानी ना आने के कारण किसान आसमान की तरफ दिन और रात निहारता दिखाई देता है पानी कब बरसेगा, पानी कब बरसेगा?

पानी ना बरसने की चलते काफी किसान खेतों में ओठ लेने के लिए हाथ पर हाथ रखे बैठा हुआ है। जिन किसानों की खेतों में फसलें जग गई हैं उनमें निराई गुड़ाई का कार्य होना है वह भी बाधित है किसान इस समय दोहरी दमन कराती से पिसता हुआ नजर आ रहा है जहां एक तरफ कुदरती प्रकोप यह है कि पानी नहीं बरस रहा है। किसान झुंडों के रूप में देव स्थलों पर अपनी-अपनी आस्था को लेकर पूजा भजन करने में जुटा हुआ है कि किसी तरीके से धरातल पर पानी बरसे ताकि फसलों में लहलहट आ जाए और किसानों के दिल खिल जाएं अब दूसरी समस्या यह भी है यह हजारों की तादात में छुट्टा पशु जो जमते ही फसल को नष्ट करने का काम करते हैं। किसान इन फसलों को कहां कहां और कैसे कैसे रखा पाए यह भी एक अहम समस्या है। जब इस संबंध में किसानों से बात की जाती है तो किसान होश उड़ाते हुए बताते हैं कि हम लोग कुदरत की दोहरी दमन दराती से पिसते हुए नजर आ रहे हैं जहां एक तरफ आवारा पशुओं का आतंक जो फसल उजाड़ने में अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ आकाश से पानी न बरसना भी एक समस्या है। जब पानी ही नहीं बरसेगा तो फसल क्या होगी और पानी बरसने के बाद फसल उगे गई तो उसमें आवारा पशु अपनी मौज मस्ती करेंगे तो किसान तो हर तरीके से मुसीबतों के घेरे में खड़ा दिखाई देता है। कुछ किसान पानी लगा कर अपना काम किसी प्रकार से चला रहे हैं और कुछ किसान खेतों में बाड़ लगाकर/ वेरी केटिंग करके फसलों की सुरक्षा करने में लगे हुए हैं लेकिन यह आवारा पशु किसानों की लगाई हुई इस बैटिंग को लांघ कर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते देखे जा सकते हैं। लोगों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए आवारा पशुओं को कब्जे में करने के लिए उपाय यथाशीघ्र किया जाए वर्ना किसानों के परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच रहे हैं।

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