देश की राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। हर सार्वजनिक स्थल, सरकारी इमारत और संवेदनशील जगहों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। इसी बीच देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित अस्पताल एम्स दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि एम्स की पार्किंग में कई लावारिस वाहन लंबे समय से खड़े हैं, जिनकी न तो जांच की जा रही है और न ही उन्हें हटाने की कोई ठोस व्यवस्था नजर आ रही है। ऐसे में जब राजधानी में ब्लास्ट जैसी घटनाओं की आशंका को देखते हुए सुरक्षा कड़ी की जा रही है, तब एम्स जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में यह लापरवाही चिंता बढ़ाने वाली है।
बेसमेंट पार्किंग में लावारिस दोपहिया वाहन
एम्स में इलाज के लिए रोज़ाना हजारों मरीज और तीमारदार आते हैं। ओपीडी में आने वाले लोगों के लिए बेसमेंट पार्किंग नंबर-3 में वाहनों को पार्क करने की व्यवस्था है। यहीं पर पिलर नंबर यूबी-3/6 के सामने दो स्कूटी और एक बाइक लावारिस हालत में खड़ी पाई गईं।
इन वाहनों पर इतनी धूल जमी हुई है कि साफ नजर आता है कि इन्हें लंबे समय से किसी ने हाथ तक नहीं लगाया। एक बाइक की तो पीछे की नंबर प्लेट तक गायब है, जिससे वाहन की पहचान करना भी मुश्किल हो गया है।
पार्किंग काउंटर के पास भी लापरवाही
सिर्फ एक जगह ही नहीं, बल्कि पार्किंग शुल्क काउंटर के पास भी अलग-अलग राज्यों में पंजीकृत कई दोपहिया वाहन लावारिस हालत में खड़े मिले। कुछ बाइकों के टायरों की हवा तक निकल चुकी है। यही स्थिति पार्किंग के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिली, जहां कई गाड़ियां बिना किसी निगरानी के खड़ी हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि पार्किंग में प्रवेश के समय वाहनों की कोई सुरक्षा जांच नहीं होती, जो मौजूदा हालात में एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
पार्किंग परिसर में फैला कबाड़
सुरक्षा के साथ-साथ स्वच्छता व्यवस्था की भी हालत बेहद खराब है। केंद्र सरकार के स्वच्छता अभियान के दावों के उलट, एम्स की पार्किंग में जगह-जगह कबाड़ जमा है।
टूटी हुई अलमारियां, पत्थर, लोहे की जालियां, कुर्सियां, मेज, वेंटिलेशन डक्ट और अन्य बेकार सामान बिखरा पड़ा है। हैरानी की बात यह है कि दोपहिया वाहनों के निकास मार्ग के बीचों-बीच भी कबाड़ रखा हुआ है, जिससे वाहन चालकों को बाहर निकलने में परेशानी होती है।
दीवारों पर धूल की मोटी परत जमी है और जगह-जगह जाले नजर आते हैं। फर्श पर भी धूल जमा है। वहीं पानी की निकासी के लिए बनी नाली पर लगी लोहे की जाली अंदर की ओर धंसती हुई दिख रही है, जो किसी हादसे को न्योता दे सकती है।
खुले बिजली के बोर्ड बढ़ा रहे खतरा
पार्किंग में बिजली के स्विच बोर्डों की स्थिति भी चिंताजनक है। पिलर नंबर यूबी-3/4 पर लगा बिजली का बोर्ड खुला पड़ा है, जिसमें से स्विच बाहर लटक रहे हैं।
इन बोर्डों के पास ही दोपहिया वाहन पार्क किए जाते हैं, जिससे किसी भी वक्त करंट लगने या आग लगने जैसी घटना हो सकती है। सीढ़ियों के रास्ते से ऊपर जाने पर भी दीवारों पर खुले बिजली बोर्ड साफ नजर आते हैं।
एम्स प्रशासन ने दी कार्रवाई की बात
जब अमर उजाला की टीम ने पार्किंग की बदहाल स्थिति और सुरक्षा खामियों को एम्स की मीडिया सेल प्रमुख डॉ. रीमा दादा के संज्ञान में लाया, तो उन्होंने कहा कि इस मामले में कार्रवाई के लिए सीएसओ और फैकल्टी इंचार्ज को सूचित कर दिया गया है।
हालांकि, सवाल यह है कि जब राजधानी में सुरक्षा को लेकर कोई चूक स्वीकार्य नहीं है, तब देश के सबसे बड़े अस्पताल की पार्किंग में इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो रही है।
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