नई दिल्ली। भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विविध लोक परंपराओं और क्षेत्रीय विशेषताओं को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने की अपनी निरंतर पहल के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्लोवाकिया की नेशनल काउंसिल (संसद) के स्पीकर रिचर्ड राशी को बिहार और झारखंड की प्रसिद्ध पारंपरिक मिठाई ‘ठेकुआ’ उपहार स्वरूप भेंट की। यह विशेष उपहार भारत की सांस्कृतिक विविधता, लोक परंपराओं और क्षेत्रीय पहचान को विश्व समुदाय के समक्ष प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विदेशी नेताओं और गणमान्य व्यक्तियों को भारत के विभिन्न राज्यों की विशिष्ट कलाओं, हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पादों और सांस्कृतिक प्रतीकों को उपहार के रूप में भेंट करने की परंपरा लंबे समय से जारी है। इसी कड़ी में ठेकुआ का चयन न केवल बिहार और झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का सम्मान है, बल्कि यह भारत की “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को भी सशक्त रूप से अभिव्यक्त करता है।

ठेकुआ बिहार और झारखंड का एक अत्यंत लोकप्रिय पारंपरिक व्यंजन है, जिसकी पहचान केवल एक मिठाई के रूप में नहीं, बल्कि लोक आस्था, पारिवारिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक के रूप में की जाती है। इसे गेहूं के आटे, गुड़ अथवा चीनी, घी तथा सौंफ जैसी पारंपरिक सामग्री से तैयार किया जाता है। इसकी विशिष्ट सुगंध, स्वाद और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की क्षमता इसे अन्य पारंपरिक व्यंजनों से अलग पहचान प्रदान करती है।
विशेष रूप से सूर्य उपासना के महान लोकपर्व छठ पूजा में ठेकुआ का महत्व अत्यंत विशेष माना जाता है। छठ पर्व के दौरान इसे प्रसाद के रूप में तैयार किया जाता है और श्रद्धापूर्वक भगवान सूर्य को अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह प्रसाद शुद्धता, समर्पण और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। यही कारण है कि ठेकुआ केवल भोजन नहीं, बल्कि आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों का जीवंत प्रतिनिधि माना जाता है।
बिहार और झारखंड के ग्रामीण तथा शहरी परिवारों में पीढ़ियों से ठेकुआ बनाने की परंपरा चली आ रही है। घर की महिलाएं विशेष अवसरों, त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में इसे प्रेम और समर्पण के साथ तैयार करती हैं। इसकी निर्माण प्रक्रिया में पारिवारिक सहभागिता और सामूहिकता का भाव भी देखने को मिलता है, जो भारतीय परिवार व्यवस्था और सामाजिक एकजुटता को प्रतिबिंबित करता है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्लोवाकिया संसद के स्पीकर रिचर्ड राशी को ठेकुआ भेंट करना केवल एक औपचारिक कूटनीतिक उपहार नहीं है, बल्कि यह भारत की लोक संस्कृति और क्षेत्रीय परंपराओं के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है। यह उपहार दर्शाता है कि भारत अपनी सांस्कृतिक जड़ों से गहराई से जुड़ा हुआ है और विश्व समुदाय के साथ अपने सांस्कृतिक मूल्यों को साझा करने में गर्व महसूस करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सांस्कृतिक उपहार देशों के बीच संबंधों को केवल राजनीतिक और आर्थिक स्तर तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें मानवीय और सांस्कृतिक आधार भी प्रदान करते हैं। भोजन और पाक परंपराएं किसी भी समाज की पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। ऐसे में ठेकुआ जैसे पारंपरिक व्यंजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत करना भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पिछले कुछ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों के नेताओं को भारत के अलग-अलग राज्यों की विशिष्ट कलाकृतियां, हस्तशिल्प उत्पाद, पारंपरिक वस्तुएं और सांस्कृतिक प्रतीक उपहार स्वरूप प्रदान किए हैं। इन उपहारों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विविधता, कारीगरों की प्रतिभा और स्थानीय उत्पादों की वैश्विक पहचान को बढ़ावा मिला है। ठेकुआ का चयन भी इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है, जिसके माध्यम से भारत के क्षेत्रीय उत्पादों और लोक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।
यह पहल प्रधानमंत्री के ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ दृष्टिकोण को भी साकार करती है। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाले पारंपरिक उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलने से न केवल सांस्कृतिक प्रतिष्ठा बढ़ती है, बल्कि स्थानीय कारीगरों, उद्यमियों और पारंपरिक उत्पाद निर्माताओं को भी प्रोत्साहन प्राप्त होता है। इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और पारंपरिक ज्ञान एवं कौशल के संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है।

बिहार और झारखंड के लोगों के लिए यह अवसर विशेष गर्व का विषय है कि उनकी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक ठेकुआ अब अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का हिस्सा बना है। इससे इन राज्यों की समृद्ध खाद्य परंपरा, लोक संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना बढ़ेगी। साथ ही यह युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और पारंपरिक विरासत के प्रति जागरूक करने में भी सहायक सिद्ध होगा।
भारत और स्लोवाकिया के बीच वर्षों से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं। दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग निरंतर बढ़ रहा है। ऐसे में सांस्कृतिक महत्व वाले उपहारों का आदान-प्रदान दोनों देशों के बीच पारस्परिक समझ, सम्मान और मित्रता को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
ठेकुआ की यह भेंट भारत की उस सांस्कृतिक सोच को भी रेखांकित करती है, जिसमें विविधता को शक्ति माना जाता है। भारत के प्रत्येक राज्य, प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक समुदाय की अपनी विशिष्ट परंपराएं, कलाएं और खान-पान की संस्कृति है। इन्हीं विविधताओं का समन्वय भारत की पहचान को विश्व में अद्वितीय बनाता है। प्रधानमंत्री द्वारा क्षेत्रीय सांस्कृतिक प्रतीकों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सम्मान दिलाने की पहल इस विविधता को वैश्विक पहचान प्रदान करने का एक सशक्त माध्यम बन रही है।
यह उपहार न केवल भारत और स्लोवाकिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रतीक है, बल्कि बिहार और झारखंड की लोक संस्कृति, खाद्य परंपरा और सामाजिक मूल्यों को भी विश्व समुदाय के समक्ष प्रतिष्ठित करने का अवसर प्रदान करता है। आने वाले समय में इस प्रकार की पहलें भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को और अधिक प्रभावशाली बनाएंगी तथा देश की समृद्ध विरासत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

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