सौरभ शेखर श्रीवास्तव की ब्यूरो रिपोर्ट दरभंगा। मिथिलांचल के चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में दरभंगा पहली बार यूरोलॉजी के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला की मेजबानी करने जा रहा है। बिहार यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में यूरो स्टोन रिसर्च सेंटर मिडटर्म वर्कशॉप-2026 का आयोजन आगामी 4 एवं 5 जुलाई 2026 को होटल गार्सिया इंटरनेशनल, दरभंगा में किया जाएगा। इस दो दिवसीय शैक्षणिक एवं वैज्ञानिक सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों के प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट, एंडोयूरोलॉजिस्ट एवं सर्जन भाग लेंगे।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए यूरो स्टोन रिसर्च सेंटर के निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि यह आयोजन दरभंगा ही नहीं बल्कि पूरे बिहार के चिकित्सा जगत के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में लगभग 400 से अधिक चिकित्सक, सर्जन, यूरोलॉजिस्ट और मेडिकल विशेषज्ञ शामिल होंगे। दरभंगा के इतिहास में पहली बार यूरोलॉजी के क्षेत्र में इतने बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है।
डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान लगातार नई तकनीकों की ओर बढ़ रहा है। ऐसे समय में विशेषज्ञों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान और नवीन उपचार पद्धतियों की जानकारी साझा करना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है, ताकि युवा चिकित्सकों और मेडिकल विद्यार्थियों को देश-विदेश के अनुभवी विशेषज्ञों से सीखने का अवसर मिल सके।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन के दौरान यूरोलॉजी से संबंधित नवीनतम तकनीकों, आधुनिक सर्जिकल प्रक्रियाओं, एंडोस्कोपिक सर्जरी, लेजर तकनीक, किडनी स्टोन के अत्याधुनिक उपचार, प्रोस्टेट रोगों के प्रबंधन तथा अन्य जटिल यूरोलॉजिकल समस्याओं के समाधान पर विस्तृत चर्चा होगी। विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे और प्रतिभागियों को नई चिकित्सा पद्धतियों से अवगत कराएंगे।

इस कार्यशाला की सबसे बड़ी विशेषता लाइव सर्जिकल डेमोंस्ट्रेशन होगी। डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि सम्मेलन के दौरान पांच मरीजों का लाइव उपचार एवं सर्जिकल प्रक्रिया प्रदर्शित की जाएगी। ऑपरेशन थिएटर से अत्याधुनिक ऑडियो-वीडियो तकनीक के माध्यम से इन प्रक्रियाओं का सीधा प्रसारण सम्मेलन कक्ष में किया जाएगा, ताकि उपस्थित चिकित्सक प्रत्येक चरण को विस्तार से समझ सकें और विशेषज्ञों से सीधे संवाद भी कर सकें।
उन्होंने कहा कि लाइव सर्जरी सत्र युवा डॉक्टरों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा। इससे उन्हें जटिल सर्जिकल तकनीकों को व्यावहारिक रूप से समझने और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के उपयोग की जानकारी प्राप्त होगी। ऐसे शैक्षणिक आयोजन चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. मनोज कुमार ने भविष्य की योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दरभंगा में चिकित्सा सेवाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) आधारित तकनीक और रोबोटिक सर्जरी की सुविधा विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में यदि यह सुविधा उपलब्ध होती है तो मरीजों को महानगरों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही अत्याधुनिक उपचार मिल सकेगा।
उन्होंने बताया कि सम्मेलन में प्रतिभागियों को एआई आधारित चिकित्सा तकनीकों, डिजिटल सर्जिकल सिस्टम और रोबोटिक सर्जरी से जुड़ी नवीनतम जानकारियों से भी अवगत कराया जाएगा। आधुनिक चिकित्सा में इन तकनीकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है और भविष्य में इनका व्यापक उपयोग होने की संभावना है।
डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि बिहार में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के लिए इस प्रकार के वैज्ञानिक सम्मेलन अत्यंत आवश्यक हैं। इससे न केवल चिकित्सकों का ज्ञान बढ़ता है बल्कि मरीजों को भी आधुनिक एवं सुरक्षित उपचार का लाभ मिलता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह कार्यशाला दरभंगा को राष्ट्रीय चिकित्सा मानचित्र पर और अधिक मजबूत पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होगी।
उन्होंने बताया कि कार्यक्रम की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजन समिति विभिन्न तकनीकी एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है ताकि सभी प्रतिभागियों को उच्च स्तरीय शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से आने वाले विशेषज्ञों के स्वागत एवं आवास की भी समुचित व्यवस्था की जा रही है।

आयोजन समिति के अनुसार सम्मेलन में शोधपत्र प्रस्तुतिकरण, वैज्ञानिक सत्र, विशेषज्ञ व्याख्यान, केस डिस्कशन तथा आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। इससे प्रतिभागियों को नई तकनीकों और चिकित्सा उपकरणों की जानकारी एक ही मंच पर प्राप्त होगी।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन क्षेत्रीय चिकित्सा संस्थानों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक विशेषज्ञों से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं। इससे चिकित्सा अनुसंधान, प्रशिक्षण और रोगियों के उपचार की गुणवत्ता में सकारात्मक सुधार होता है।

दरभंगा लंबे समय से शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है। अब यूरोलॉजी के क्षेत्र में इस स्तर का आयोजन शहर की प्रतिष्ठा को और मजबूत करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से स्थानीय चिकित्सकों को नवीनतम तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा, जिससे भविष्य में मरीजों को बेहतर और उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
डॉ. मनोज कुमार ने सभी चिकित्सकों, मेडिकल प्रोफेशनल्स और संबंधित विशेषज्ञों से इस दो दिवसीय कार्यशाला में भाग लेने का आग्रह करते हुए कहा कि यह सम्मेलन ज्ञान, अनुभव और आधुनिक तकनीकों के आदान-प्रदान का उत्कृष्ट मंच साबित होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस आयोजन से बिहार में यूरोलॉजी सेवाओं के विकास को नई गति मिलेगी तथा आने वाले वर्षों में दरभंगा चिकित्सा नवाचार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा।

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