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दरभंगा में भव्य योग कार्यक्रम, योग के साथ जल एवं पर्यावरण संरक्षण का दिया गया संदेश

सौरभ शेखर श्रीवास्तव की ब्यूरो रिपोर्ट दरभंगा। 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जिला गंगा समिति, जिला आयुष समिति एवं खेल विभाग, दरभंगा के संयुक्त तत्वावधान में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) परिसर में भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, विभिन्न विभागों के कर्मियों, नमामि गंगे के स्वयंसेवकों, युवाओं एवं आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर योग, पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

 

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इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की थीम “स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग (Yoga for Healthy Ageing)” रही। इसी थीम के अनुरूप आयोजित कार्यक्रम में योग को केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन स्थापित करने वाली जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत किया गया।

 

 

कार्यक्रम में दरभंगा सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर, राज्यसभा सांसद डॉ. धर्मशिला गुप्ता, जिलाधिकारी कौशल कुमार, उप विकास आयुक्त स्वप्निल, नगर आयुक्त राकेश कुमार गुप्ता, उपनिदेशक जनसंपर्क सत्येंद्र प्रसाद, जिला खेल पदाधिकारी परिमल सुरेश कुमार, उप निर्वाचन पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

 

 

योगाचार्यों ने कराया कॉमन योग प्रोटोकॉल का अभ्यास

कार्यक्रम के दौरान योगाचार्य रोशन उपाध्याय एवं मृदुला तिवारी ने कॉमन योग प्रोटोकॉल के अंतर्गत उपस्थित प्रतिभागियों को विभिन्न योगासन एवं प्राणायाम का अभ्यास कराया। योग सत्र में ग्रीवा संचालासन, स्कंध संचालासन, ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्धचक्रासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वज्रासन, तितली आसन, उष्ट्रासन, शशांकासन, भुजंगासन, मकरासन, सेतुबंधासन, अर्ध हलासन, पवनमुक्तासन एवं शवासन का अभ्यास कराया गया।

इसके अलावा प्रतिभागियों ने कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम तथा ध्यान की विभिन्न विधियों का भी अभ्यास किया। योगाचार्यों ने प्रत्येक योगासन के स्वास्थ्य लाभों की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि नियमित योगाभ्यास न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक तनाव को कम करने, एकाग्रता बढ़ाने तथा जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, तनाव और विभिन्न स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच योग सबसे सरल, प्रभावी एवं वैज्ञानिक उपाय के रूप में उभरकर सामने आया है। योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर व्यक्ति दीर्घकाल तक स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन जी सकता है।

 

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योग भारत की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर : डॉ. गोपाल जी ठाकुर

अपने संबोधन में सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने कहा कि योग भारत की हजारों वर्षों पुरानी गौरवशाली परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे आज पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों के कारण संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को मान्यता मिली और आज यह विश्वव्यापी जनआंदोलन का रूप ले चुका है।

उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करने वाली संपूर्ण जीवन पद्धति है। योग हमें अनुशासन, आत्मसंयम और प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना सिखाता है।

सांसद ने युवाओं से नियमित योगाभ्यास अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ युवा ही विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को स्वस्थ बनाने के साथ-साथ समाज को भी सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।

डॉ. ठाकुर ने पर्यावरण एवं जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाता है। उन्होंने गंगा एवं उसकी सहायक नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ एवं अविरल बनाए रखने के लिए जनभागीदारी को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रत्येक नागरिक को इसमें अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

योग से मिलता है मानसिक और भावनात्मक संतुलन : डॉ. धर्मशिला गुप्ता

राज्यसभा सांसद डॉ. धर्मशिला गुप्ता ने कहा कि योग शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों के दौर में योग का महत्व और भी बढ़ गया है।

 

उन्होंने कहा कि योग व्यक्ति को केवल शारीरिक रूप से ही सशक्त नहीं बनाता, बल्कि मानसिक शांति, भावनात्मक संतुलन एवं आत्मविश्वास भी प्रदान करता है। नियमित योगाभ्यास से तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

डॉ. गुप्ता ने महिलाओं, युवाओं एवं वरिष्ठ नागरिकों से योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण का आधार होते हैं।

उन्होंने जल स्रोतों के संरक्षण को जनआंदोलन बनाने पर बल देते हुए कहा कि नदियों, तालाबों और पोखरों की स्वच्छता एवं संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी नागरिकों से जल संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

योग और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक : कौशल कुमार

जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कहा कि योग एवं पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। स्वस्थ शरीर और स्वस्थ पर्यावरण दोनों ही सतत विकास के लिए अनिवार्य हैं। उन्होंने कहा कि योग हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना सिखाता है तथा पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का बोध कराता है।

उन्होंने लोगों से जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वच्छता तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की अपील की। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से गंगा, उसकी सहायक नदियों, तालाबों एवं अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि लोगों को जल स्रोतों में प्लास्टिक एवं कूड़ा-कचरा नहीं फेंकना चाहिए तथा जल स्रोतों के पुनर्जीवन और संरक्षण के लिए सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण के बिना स्वस्थ समाज और बेहतर भविष्य की कल्पना संभव नहीं है।

नमामि गंगे अभियान के तहत हुआ सामूहिक जल अर्पण

कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत आयोजित सामूहिक “जल अर्पण” कार्यक्रम रहा। इस दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, स्वयंसेवकों एवं नागरिकों ने नदियों एवं अन्य जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से सामूहिक रूप से जल अर्पित किया।

इस अवसर पर जल संरक्षण, नदी संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और सामाजिक जीवनधारा है। इसकी स्वच्छता और अविरलता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

प्रतिभागियों ने लिया योग एवं पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी प्रतिभागियों को नमामि गंगे एवं योग संकल्प भी दिलाया गया। संकल्प के माध्यम से लोगों ने गंगा एवं अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ एवं प्रदूषणमुक्त बनाए रखने, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण तथा जलीय जीवों के संरक्षण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।

 

 

साथ ही प्रतिभागियों ने अपने दैनिक जीवन में योग को अपनाने, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने, स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली विकसित करने तथा समाज में स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का भी संकल्प लिया।

स्वयंसेवकों एवं विभागीय कर्मियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका

कार्यक्रम के सफल आयोजन में जिला परियोजना पदाधिकारी, जिला गंगा समिति, दरभंगा फारूक इमाम के नेतृत्व में नमामि गंगे कार्यक्रम की संयोजक पूजा कुमारी, सुनील कुमार, परवेज आलम सहित 50 से अधिक स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसके अतिरिक्त जिला आयुष समिति, दरभंगा एवं खेल विभाग, दरभंगा के अधिकारियों और कर्मियों ने कार्यक्रम के सफल संचालन में सक्रिय योगदान दिया। कार्यक्रम का मंच संचालन अक्षय कुमार झा द्वारा किया गया, जिन्होंने कार्यक्रम को सुव्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से संचालित किया।

कार्यक्रम के अंत में नगर आयुक्त राकेश कुमार गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, योग प्रशिक्षकों, स्वयंसेवकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सभी लोगों से नियमित योगाभ्यास को जीवन का हिस्सा बनाने तथा पर्यावरण एवं जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखने का आह्वान किया।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश देने में सफल रहा, बल्कि योग, पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों के संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने यह सिद्ध किया कि समाज में योग के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है और लोग स्वस्थ जीवनशैली के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को भी गंभीरता से समझने लगे हैं।

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