मुंबई, 21 जून 2026। 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (एमआईएफएफ) 2026 में विश्व सिनेमा की विविधता, रचनात्मकता और कलात्मक उत्कृष्टता का भव्य उत्सव देखने को मिल रहा है। वृत्तचित्र, लघु कथा और एनीमेशन फिल्मों के लिए दक्षिण एशिया के सबसे प्रतिष्ठित मंचों में से एक यह महोत्सव इस वर्ष भी दर्शकों को अनूठे सिनेमाई अनुभव प्रदान कर रहा है। इसी क्रम में महोत्सव के विशेष आकर्षणों में शामिल रही प्रसिद्ध एनिमेटेड क्लासिक फिल्म ‘एलिस इन वंडरलैंड’ की विशेष स्क्रीनिंग, जिसने सभी आयु वर्ग के दर्शकों को कल्पना, रोमांच और आश्चर्य से भरी दुनिया की सैर कराई।

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महोत्सव में आयोजित इस विशेष प्रदर्शन ने दर्शकों को एक ऐसी फिल्म को बड़े पर्दे पर देखने का अवसर दिया, जिसने सात दशकों से अधिक समय तक दुनिया भर के करोड़ों लोगों की कल्पनाओं को आकार दिया है। फिल्म की रंगीन दुनिया, यादगार किरदार, मनमोहक संगीत और अद्भुत एनीमेशन ने दर्शकों को एक बार फिर उस जादुई संसार में पहुंचा दिया, जहां तर्क और कल्पना की सीमाएं धुंधली हो जाती हैं।
कालजयी साहित्य से कालजयी सिनेमा तक की यात्रा
‘एलिस इन वंडरलैंड’ विश्व प्रसिद्ध लेखक Lewis Carroll के अमर उपन्यास पर आधारित है। यह कहानी पहली बार साहित्य के रूप में सामने आई थी और शीघ्र ही बच्चों तथा वयस्कों दोनों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हो गई। अपनी अनूठी कल्पनाशीलता, व्यंग्यात्मक शैली और दार्शनिक संकेतों के कारण यह कृति विश्व साहित्य की महानतम रचनाओं में गिनी जाती है।
फिल्म का निर्देशन प्रसिद्ध एनीमेशन निर्देशकों Wilfred Jackson, Clyde Geronimi और Hamilton Luske ने किया था। इन निर्देशकों ने मूल साहित्यिक रचना की आत्मा को सुरक्षित रखते हुए उसे जीवंत रंगों, गतिशील पात्रों और संगीत के माध्यम से एक ऐसे सिनेमाई अनुभव में बदल दिया, जो आज भी उतना ही आकर्षक लगता है जितना अपनी पहली रिलीज के समय था।
एमआईएफएफ 2026 में इस फिल्म का प्रदर्शन केवल एक स्क्रीनिंग नहीं था, बल्कि यह एनीमेशन कला और क्लासिक कहानी कहने की परंपरा का उत्सव भी था। इससे दर्शकों को यह समझने का अवसर मिला कि किस प्रकार साहित्य और सिनेमा मिलकर समय की सीमाओं को पार करने वाली कृतियों का निर्माण करते हैं।
एलिस की अद्भुत यात्रा
फिल्म की कहानी एक जिज्ञासु और कल्पनाशील लड़की एलिस के इर्द-गिर्द घूमती है। एक दिन वह एक सफेद खरगोश का पीछा करते हुए एक रहस्यमयी बिल में गिर जाती है और पहुंच जाती है वंडरलैंड नामक एक अद्भुत दुनिया में।
यह दुनिया सामान्य नियमों से बिल्कुल अलग है। यहां फूल बातें करते हैं, जानवर तर्क करते हैं, समय कभी रुक जाता है तो कभी भागने लगता है और हर मोड़ पर कोई नया आश्चर्य दर्शकों का इंतजार करता है। अपनी यात्रा के दौरान एलिस कई विचित्र और यादगार पात्रों से मिलती है, जिनमें हमेशा जल्दबाजी में रहने वाला सफेद खरगोश, रहस्यमयी चेशायर बिल्ली, चाय पार्टी करने वाले अनोखे पात्र और शक्तिशाली क्वीन ऑफ हार्ट्स प्रमुख हैं।
इन पात्रों के माध्यम से फिल्म दर्शकों को केवल मनोरंजन ही नहीं देती, बल्कि जिज्ञासा, आत्मविश्वास, साहस और नई संभावनाओं को स्वीकार करने का संदेश भी देती है। यही कारण है कि यह कहानी पीढ़ी दर पीढ़ी प्रासंगिक बनी हुई है।
रंगों, संगीत और कल्पना का अद्भुत संगम
‘एलिस इन वंडरलैंड’ की सबसे बड़ी विशेषताओं में उसका दृश्य सौंदर्य है। फिल्म का प्रत्येक दृश्य रंगों, रचनात्मक डिजाइनों और कल्पनाशीलता से भरपूर है। वंडरलैंड के परिदृश्य, पात्रों की संरचना और वातावरण को इस प्रकार तैयार किया गया है कि दर्शक स्वयं को उस दुनिया का हिस्सा महसूस करने लगते हैं।
फिल्म का संगीत भी इसकी सफलता का महत्वपूर्ण आधार रहा है। ‘द अनबर्थडे सॉन्ग’ और ‘गोल्डन आफ्टरनून’ जैसे गीत आज भी लोकप्रिय हैं और दर्शकों के मन में विशेष स्थान रखते हैं। ये गीत केवल मनोरंजन नहीं करते, बल्कि कहानी को आगे बढ़ाने और पात्रों की विशेषताओं को उजागर करने का कार्य भी करते हैं।
एमआईएफएफ 2026 में जब ये गीत बड़े पर्दे और उच्च गुणवत्ता वाली ध्वनि प्रणाली के साथ प्रस्तुत किए गए, तो दर्शकों ने उन्हें नए उत्साह और ऊर्जा के साथ अनुभव किया। कई दर्शकों के लिए यह पुरानी यादों को ताजा करने वाला क्षण था, जबकि युवा दर्शकों के लिए यह एक नई खोज जैसा अनुभव साबित हुआ।
सात दशक बाद भी कायम है लोकप्रियता
फिल्म की पहली रिलीज को सत्तर वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन इसकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। इसका कारण केवल इसकी मनोरंजक कहानी नहीं, बल्कि इसके भीतर छिपे सार्वभौमिक विषय हैं। जिज्ञासा, खोज, आत्म-परिचय और कल्पना की स्वतंत्रता जैसे विषय हर पीढ़ी को प्रभावित करते हैं।
आज के डिजिटल और तकनीक-प्रधान युग में भी यह फिल्म दर्शकों को याद दिलाती है कि कल्पना की शक्ति असीमित होती है। यह बच्चों को सपने देखने के लिए प्रेरित करती है और वयस्कों को अपने भीतर के बच्चे से दोबारा जुड़ने का अवसर देती है।
फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि ‘एलिस इन वंडरलैंड’ उन दुर्लभ फिल्मों में से है जो मनोरंजन और कलात्मक उत्कृष्टता के बीच संतुलन स्थापित करती हैं। यही वजह है कि इसे एनीमेशन इतिहास की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में गिना जाता है।
एमआईएफएफ 2026 के विविधतापूर्ण कार्यक्रम में विशेष आकर्षण
19वां मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव इस वर्ष 15 से 21 जून तक आयोजित किया गया है और इसमें दुनिया भर से सैकड़ों फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। महोत्सव में वृत्तचित्र, लघु कथा, एनीमेशन, प्रायोगिक और नवाचार आधारित फिल्मों के साथ-साथ कई विशेष क्यूरेटेड खंड, मास्टरक्लास, पैनल चर्चा और उद्योग संवाद भी शामिल किए गए हैं। �
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ऑस्कर पुरस्कार प्राप्त लघु फिल्मों की स्क्रीनिंग, अंतरराष्ट्रीय फिल्मकारों की मास्टरक्लास, नई मीडिया और एआई आधारित फिल्मों के प्रदर्शन तथा विभिन्न देशों की चयनित फिल्मों के साथ-साथ ‘एलिस इन वंडरलैंड’ की प्रस्तुति ने महोत्सव के कार्यक्रम को और अधिक समृद्ध बनाया। �
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महोत्सव के आयोजकों का मानना है कि क्लासिक फिल्मों की स्क्रीनिंग दर्शकों को सिनेमा के इतिहास और विकास को समझने का अवसर प्रदान करती है। साथ ही यह नई पीढ़ी के फिल्मकारों को यह जानने में मदद करती है कि कालजयी रचनाएं किस प्रकार समय की कसौटी पर खरी उतरती हैं।
एनीमेशन कला की स्थायी शक्ति का प्रमाण
एमआईएफएफ 2026 में ‘एलिस इन वंडरलैंड’ की स्क्रीनिंग ने एक बार फिर सिद्ध किया कि उत्कृष्ट कहानी, सशक्त कल्पना और रचनात्मक प्रस्तुति कभी पुरानी नहीं होती। यह फिल्म दर्शकों को केवल एक काल्पनिक दुनिया में नहीं ले जाती, बल्कि उन्हें यह सोचने पर भी मजबूर करती है कि वास्तविकता और कल्पना के बीच की सीमाएं कितनी लचीली हो सकती हैं।
फिल्म का यह विशेष प्रदर्शन एनीमेशन कला की स्थायी शक्ति का भी प्रमाण है। जिस समय यह फिल्म बनाई गई थी, उस दौर की तकनीकी सीमाओं के बावजूद इसके निर्माताओं ने जो दृश्य संसार रचा, वह आज भी प्रेरणादायक माना जाता है। आधुनिक तकनीक से सुसज्जित वर्तमान पीढ़ी के एनीमेटरों और फिल्मकारों के लिए भी यह फिल्म रचनात्मकता का महत्वपूर्ण स्रोत बनी हुई है।
सिनेमा के जादू का उत्सव
‘एलिस इन वंडरलैंड’ की विशेष स्क्रीनिंग ने एमआईएफएफ 2026 के उस उद्देश्य को साकार किया, जिसके तहत सिनेमा को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि कल्पना, संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इस फिल्म ने दर्शकों को याद दिलाया कि महान कहानियां समय, भाषा और पीढ़ियों की सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ने की क्षमता रखती हैं।
मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 में इस कालजयी फिल्म का प्रदर्शन न केवल एनीमेशन इतिहास को श्रद्धांजलि था, बल्कि यह सिनेमा की उस अनंत शक्ति का उत्सव भी था, जो दर्शकों को सपने देखने, नई दुनियाओं की खोज करने और अपनी कल्पनाओं को उड़ान देने के लिए प्रेरित करती है। ‘एलिस इन वंडरलैंड’ ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सच्चा जादू केवल कहानियों में नहीं, बल्कि उन्हें सुनाने और अनुभव करने की कला में भी छिपा होता है।
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