Breaking News
Home / Uncategorized / अवैध नशा मुक्ति केंद्रों पर कसा शिकंजा, अंबाला में स्वास्थ्य विभाग की सख्ती से बढ़ी जागरूकता

अवैध नशा मुक्ति केंद्रों पर कसा शिकंजा, अंबाला में स्वास्थ्य विभाग की सख्ती से बढ़ी जागरूकता

अंबाला जिले में नशे के खिलाफ लड़ाई को और प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। अवैध रूप से संचालित नशा मुक्ति केंद्रों की बढ़ती शिकायतों और उनसे जुड़े गंभीर मामलों को देखते हुए अब विभाग ने जिले के सभी प्रमुख नागरिक अस्पतालों और अदालत परिसरों में 20 वैध नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की सूची सार्वजनिक रूप से चस्पा कर दी है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराना और उन्हें गलत हाथों में जाने से बचाना है।

पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि नशे की लत से जूझ रहे युवा और उनके परिजन जब इलाज की तलाश में अस्पतालों या अन्य स्थानों पर पहुंचते हैं, तो उन्हें सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। इस स्थिति का फायदा उठाकर कई अवैध नशा मुक्ति केंद्रों के एजेंट उन्हें अपने जाल में फंसा लेते हैं। ये केंद्र न केवल भारी-भरकम फीस वसूलते हैं, बल्कि वहां भर्ती किए गए मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार और प्रताड़ना की शिकायतें भी लगातार सामने आती रही हैं।

स्वास्थ्य विभाग की इस नई पहल के तहत अस्पतालों और कोर्ट परिसरों में लगाए गए बोर्ड अब लोगों के लिए एक भरोसेमंद मार्गदर्शक की तरह काम करेंगे। इन बोर्डों पर स्पष्ट रूप से उन केंद्रों के नाम और विवरण दिए गए हैं, जिन्हें सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। इससे मरीजों और उनके परिजनों को यह समझने में आसानी होगी कि कौन सा केंद्र सुरक्षित और वैध है, और कहां इलाज करवाना उचित रहेगा।

अंबाला में अवैध नशा मुक्ति केंद्रों का मुद्दा पहले भी कई बार चर्चा में रहा है। समय-समय पर प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए ऐसे कई केंद्रों का भंडाफोड़ किया है। इन कार्रवाइयों के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने समाज को झकझोर कर रख दिया। कई मामलों में यह पाया गया कि इन अवैध केंद्रों में युवाओं को बंधक बनाकर रखा जाता था और उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।

एक चर्चित मामले में कैंट क्षेत्र के खतौली स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में युवक को दी जा रही यातनाओं का खुलासा हुआ था। इस घटना के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए न केवल उस केंद्र को बंद कराया, बल्कि उससे जुड़े अन्य अवैध केंद्रों का भी पर्दाफाश किया। खतौली और गरनाला में चल रहे दो अवैध केंद्रों से कुल 27 युवकों को रेस्क्यू किया गया था। इस दौरान एक युवक की मौत का मामला भी सामने आया, जिसने पूरे जिले को हिला कर रख दिया।

इसी तरह, अंबाला सिटी के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी निवासी गौरव की मौत ने भी कई सवाल खड़े किए थे। परिजनों ने आरोप लगाया था कि गांव मौखा माजरा में संचालित एक नशा मुक्ति केंद्र में गौरव को अमानवीय यातनाएं दी गईं, जिसके कारण उसकी मौत हुई। इस मामले में पुलिस ने केंद्र संचालकों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया था। इसके अलावा, साहा थाना क्षेत्र में भी अगस्त 2025 के दौरान दो अवैध नशा मुक्ति केंद्रों का खुलासा हुआ था, जहां से कई युवाओं को छुड़ाया गया।

इन घटनाओं ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया। यही वजह है कि अब स्वास्थ्य विभाग ने न केवल अवैध केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई तेज की है, बल्कि लोगों को जागरूक करने पर भी विशेष ध्यान दिया है। विभाग का मानना है कि जब तक लोग खुद जागरूक नहीं होंगे, तब तक इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

विभाग द्वारा जारी की गई सूची में कुल 20 केंद्र शामिल हैं, जिनमें 15 नशा मुक्ति केंद्र और 5 पुनर्वास केंद्र हैं। इन केंद्रों का चयन उनके मानकों, सुविधाओं और सरकारी नियमों के अनुपालन के आधार पर किया गया है। क्षेत्रवार बात करें तो अंबाला सिटी में सबसे अधिक 11 केंद्र हैं, जबकि अंबाला कैंट में 6, बराड़ा में 2 और नारायणगढ़ में 1 केंद्र को मान्यता प्राप्त है।

जिले में एक सरकारी नशा मुक्ति केंद्र भी संचालित किया जा रहा है, जो अंबाला सिटी में स्थित है। यहां रोजाना ओपीडी में लगभग 100 मरीज पहुंचते हैं। इस केंद्र में सुबह के समय डे-केयर सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे मरीजों को दिनभर उपचार और परामर्श मिल सके। यह केंद्र उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जो नशे की लत से बाहर निकलना चाहते हैं, लेकिन उन्हें सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता।

डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. मुकेश ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल सूची जारी करना नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी है। उन्होंने कहा कि अस्पतालों और कोर्ट परिसरों में इन सूचियों को चस्पा करने से न केवल मरीज और उनके परिजन, बल्कि आम लोग भी जागरूक होंगे और सही निर्णय ले सकेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि नशा मुक्ति केंद्रों की भूमिका केवल इलाज तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का भी काम करते हैं। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि ये केंद्र निर्धारित मानकों के अनुसार ही संचालित हों। अवैध केंद्र न केवल मरीजों के लिए खतरनाक होते हैं, बल्कि वे पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करते हैं।

स्वास्थ्य विभाग की यह पहल निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है, जो न केवल अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाएगी, बल्कि लोगों को सही दिशा भी दिखाएगी। यदि इसी तरह सख्ती और जागरूकता दोनों पर ध्यान दिया जाता रहा, तो आने वाले समय में नशे की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

कुल मिलाकर, अंबाला में शुरू की गई यह पहल प्रशासन की गंभीरता को दर्शाती है। अब देखना यह होगा कि इस कदम का जमीन पर कितना असर पड़ता है और लोग किस हद तक इसका लाभ उठाते हैं। लेकिन इतना तय है कि यह प्रयास नशे के खिलाफ चल रही लड़ाई में एक मजबूत आधार साबित हो सकता है।

Check Also

धूल छंटी तो सामने था मौत का मंजर: महोबा हाईवे पर पिकअप की टक्कर से बिखरीं जिंदगी, तीन महिलाओं की मौत, कई बच्चे हुए अनाथ

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में गुरुवार तड़के हुआ एक सड़क हादसा ऐसा दर्द छोड़ …

उत्तर प्रदेश के कासगंज में खौफनाक पारिवारिक त्रासदी: पिता ने तीन मासूमों को जहर दिया, पत्नी का गला रेता, फिर खुद झूला फंदे पर — गरीबी ने पूरा परिवार निगला

शनिवार को अमांपुर कस्बे से आई एक दर्दनाक खबर ने पूरे इलाके को सन्न कर …

लापरवाही बनी जानलेवा: कानपुर देहात में तालाब में गिरी वैन, चार की मौत

कानपुर देहात में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में …