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दरभंगा में सरकारी जमीन घोटाले पर डीएम की बड़ी कार्रवाई : तीन राजस्व कर्मचारी निलंबित, आठ अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के आदेश

सौरभ शेखर श्रीवास्तव की ब्यूरो रिपोर्ट दरभंगा। सरकारी भूमि की सुरक्षा, राजस्व अभिलेखों की शुचिता और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में दरभंगा जिला प्रशासन ने एक बड़ी और महत्वपूर्ण कार्रवाई की है।

जिलाधिकारी (डीएम) कौशल कुमार ने सदर अंचल के खोजकीपुर मौजा स्थित गैरमजरूआ खास (झील) भूमि का अवैध रूप से दाखिल-खारिज कर रैयती जमाबंदी कायम किए जाने के गंभीर मामले में तीन राजस्व कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही जांच में दोषी पाए गए आठ राजस्व अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध प्रपत्र-‘क’ गठित कर विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

  • खोजकीपुर मौजा की सरकारी झील भूमि पर अवैध दाखिल-खारिज का खुलासा।
  • डीएम कौशल कुमार ने तीन राजस्व कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया।
  • आठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर प्रपत्र-‘क’ गठित कर विभागीय कार्रवाई के आदेश।
  • जांच में 27 मामलों में अवैध रैयती जमाबंदी कायम होने की पुष्टि।
  • सरकारी भूमि पर अनियमितता करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

यह कार्रवाई सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा, फर्जी दाखिल-खारिज और राजस्व अभिलेखों में अनियमितता के खिलाफ जिला प्रशासन के सख्त रुख को दर्शाती है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी संपत्ति के साथ किसी भी प्रकार की हेराफेरी अथवा नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

 

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खोजकीपुर मौजा की सरकारी झील भूमि पर हो रही थी अवैध खरीद-बिक्री

जिलाधिकारी कौशल कुमार ने बताया कि जिला प्रशासन को सूचना प्राप्त हुई थी कि सदर अंचल के खोजकीपुर मौजा, थाना संख्या-600 अंतर्गत लगभग 04 बीघा 13 कट्ठा 10 धूर गैरमजरूआ खास (झील) भूमि पर प्रॉपर्टी डीलरों द्वारा मिट्टी भरकर अवैध रूप से प्लॉटिंग एवं खरीद-बिक्री की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया और इसकी विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच कराने का निर्णय लिया।

सरकारी अभिलेखों के अनुसार उक्त भूमि गैरमजरूआ खास श्रेणी की है, जिसका उपयोग सार्वजनिक हित और जल संरक्षण के लिए होना चाहिए। ऐसी भूमि को निजी स्वामित्व में परिवर्तित कर उसकी खरीद-बिक्री करना कानूनन अपराध है।

कौशल कुमार जिलाधिकारी दरभंगा

डीएम ने गठित किया द्वि-सदस्यीय जांच दल

मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ने अपर समाहर्त्ता की अध्यक्षता में भूमि सुधार उप समाहर्त्ता (डीसीएलआर), सदर, दरभंगा को सदस्य बनाते हुए एक द्वि-सदस्यीय जांच दल का गठन किया। जांच दल को पूरे प्रकरण की तह तक जाकर तथ्यों की जांच करने, संबंधित अभिलेखों का परीक्षण करने तथा दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की पहचान कर संयुक्त प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था।

जांच टीम ने राजस्व अभिलेख, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया, जमाबंदी अभिलेख एवं अन्य दस्तावेजों की गहन जांच की। जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।

27 मामलों में अवैध रूप से कायम कर दी गई रैयती जमाबंदी

जांच प्रतिवेदन में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि तत्कालीन अंचल अधिकारी, राजस्व अधिकारी तथा संबंधित राजस्व कर्मचारियों द्वारा सरकारी गैरमजरूआ खास भूमि के कुल 27 मामलों में नियमों की अनदेखी करते हुए दाखिल-खारिज स्वीकृत कर रैयती जमाबंदी कायम कर दी गई।

प्रतिवेदन में कहा गया कि यह कार्य कर्तव्य की घोर अवहेलना तथा कुत्सित भावना से किया गया, जिससे सरकारी भूमि निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज हो गई और बाद में उसकी खरीद-बिक्री का रास्ता खुल गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने तत्काल कठोर कार्रवाई का आदेश दिया।

तीन राजस्व कर्मचारी तत्काल प्रभाव से निलंबित

जांच में प्रत्यक्ष रूप से दोषी पाए जाने पर जिलाधिकारी कौशल कुमार ने तीन राजस्व कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

निलंबित किए गए कर्मचारियों में—

– चन्दन कुमार शर्मा, राजस्व कर्मचारी, सदर अंचल, दरभंगा

– नन्द लाल दास, तत्कालीन राजस्व कर्मचारी, सदर दरभंगा (वर्तमान में जाले अंचल, प्रतिनियुक्ति पर बहेड़ी अंचल)

– नेहाल कुमार, राजस्व कर्मचारी, सदर अंचल, दरभंगा

शामिल हैं। निलंबन अवधि के दौरान इनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई भी जारी रहेगी।

 

आठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई

जिलाधिकारी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर आठ अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली के तहत प्रपत्र-‘क’ गठित कर विभागीय कार्रवाई प्रारंभ करने का निर्देश दिया है।

इनमें शामिल हैं—

अरुण कुमार सक्सेना, तत्कालीन अंचल अधिकारी, सदर, दरभंगा (वर्तमान में सेवानिवृत्त)

– इन्द्रसान साह, तत्कालीन अंचल अधिकारी, सदर, दरभंगा (वर्तमान में सेवानिवृत्त)

– रंधीर कुमार, तत्कालीन अंचल अधिकारी, सदर, दरभंगा (वर्तमान में अंचल अधिकारी, गौनाहा, पश्चिम चम्पारण)

– विनीत चित्रा, राजस्व अधिकारी

– बबन पाल, तत्कालीन राजस्व कर्मचारी (प्रोन्नति के बाद अन्य जिले में पदस्थापित)

– राधेश्याम चौधरी, तत्कालीन राजस्व कर्मचारी (सेवानिवृत्त)

– भरत कुमार, तत्कालीन राजस्व कर्मचारी (सेवानिवृत्त)

– पूर्णानन्द झा, तत्कालीन राजस्व कर्मचारी (सेवानिवृत्त)

जिला प्रशासन के अनुसार, विभागीय जांच में यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सरकारी भूमि की सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह गंभीर

जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कहा कि सरकारी भूमि आम जनता की संपत्ति है और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध अतिक्रमण, फर्जी दाखिल-खारिज, गलत तरीके से रैयती जमाबंदी कायम करना अथवा राजस्व अभिलेखों में हेराफेरी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।

उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी, कर्मचारी, प्रॉपर्टी डीलर अथवा अन्य व्यक्ति की संलिप्तता ऐसे मामलों में पाई जाती है तो उसके विरुद्ध विधि-सम्मत कठोर कार्रवाई की जाएगी।

 

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राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में अहम कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कार्रवाई से जिले में राजस्व प्रशासन को एक स्पष्ट संदेश गया है कि सरकारी भूमि से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या मिलीभगत अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इससे भविष्य में दाखिल-खारिज, जमाबंदी एवं भूमि अभिलेखों के रख-रखाव में अधिक सतर्कता बरती जाएगी।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में सरकारी भूमि, तालाब, झील, पोखर, गैरमजरूआ खास एवं अन्य सार्वजनिक संपत्तियों से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा की जाएगी। जहां भी अनियमितता मिलेगी, वहां तत्काल जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जिला प्रशासन ने दिए सख्त संकेत

दरभंगा जिला प्रशासन की इस कार्रवाई को सरकारी भूमि की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और फर्जी जमाबंदी की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में इस मामले में हुई कार्रवाई से यह संदेश गया है कि अब राजस्व विभाग में जवाबदेही तय की जाएगी और सरकारी संपत्ति से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं होगी।

जिलाधिकारी कौशल कुमार ने दोहराया कि जिला प्रशासन सरकारी भूमि की सुरक्षा, राजस्व अभिलेखों की शुचिता तथा पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी इस प्रकार की अनियमितताओं के विरुद्ध जांच और कार्रवाई का अभियान लगातार जारी रहेगा, ताकि सरकारी भूमि की रक्षा हो सके और आम जनता का प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हो।

 

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