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महू में दूषित पानी से फैली बीमारी, दर्जनों बच्चे हेपेटाइटिस की चपेट में.

इंदौर जिले के महू नगर में जलजनित बीमारियों ने गंभीर रूप ले लिया है। दूषित पेयजल की आपूर्ति के चलते बच्चों से लेकर युवाओं तक पीलिया, टाइफाइड और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है और स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।

भागीरथपुरा के बाद अब महू कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र के पत्ती बाजार स्थित नीम गली, यादव मोहल्ला, चंदर मार्ग और सुरकी गली जैसे इलाकों में बीमारियों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। शनिवार को पीलिया और टाइफाइड के दो नए मरीज सामने आने के बाद कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 32 तक पहुंच गई है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या बच्चों की है, जो हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई वायरस से संक्रमित पाए गए हैं।

बच्चों पर सबसे ज्यादा असर

अस्पताल में भर्ती मरीजों की जांच रिपोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता और बढ़ा दी है। रक्त नमूनों की जांच में कई बच्चों के शरीर में हेपेटाइटिस ए और ई वायरस की पुष्टि हुई है। डॉक्टरों के अनुसार, इन वायरसों का सीधा संबंध दूषित पानी से होता है। संक्रमित बच्चों के लिवर में सूजन पाई गई है, जिससे उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

हालांकि राहत की बात यह रही कि शुक्रवार तक अस्पताल में भर्ती 10 मरीजों में से सात को शनिवार को छुट्टी दे दी गई, लेकिन दो नए मामलों के साथ अब भी पांच बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज जारी है। मेवाड़ा अस्पताल में भर्ती 19 वर्षीय भूमिका स्वामी की रिपोर्ट में हेपेटाइटिस ए पाया गया है, जबकि 12 वर्षीय मोहम्मद उमर शलमानी में हेपेटाइटिस ए और ई दोनों वायरस की पुष्टि हुई है।

दूषित पानी बना बीमारी की वजह

चिकित्सक डॉ. विमल कुमार सक्सेना के मुताबिक हेपेटाइटिस ए और ई वायरस आमतौर पर उस पानी में पनपते हैं, जिसमें गंदगी या मल-मूत्र की मिलावट हो। यदि ऐसे पानी का लंबे समय तक सेवन किया जाए तो संक्रमण तेजी से फैलता है। समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में यह बीमारी जानलेवा भी हो सकती है, खासकर बच्चों और कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों के लिए।

महू के गायकवाड क्षेत्र से भी दूषित पानी की शिकायतें सामने आई हैं। वहां से भी पानी के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी से बदबू आती है और रंग भी साफ नहीं है, बावजूद इसके मजबूरी में वही पानी पीना पड़ रहा है।

पानी साफ या गंदा? जांच पर सवाल

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर बीमारियां पानी से फैल रही हैं, तो फिर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) की जांच में पानी को दूषित क्यों नहीं माना गया। पीएचई द्वारा पत्ती बाजार क्षेत्र से लिए गए नर्मदा जल और बोरवेल के कुल 16 सैंपल की जांच रिपोर्ट में पानी को सामान्य बताया गया है।

महू के एसडीएम राकेश परमार ने बताया कि फिलहाल स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों के घरों से लिए गए पानी के सैंपल की विस्तृत जांच रिपोर्ट पुणे से आनी बाकी है। इन सैंपलों में माइक्रोऑर्गेनिज्म और वायरोलॉजी से जुड़ी जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि इन रिपोर्ट्स के आने के बाद ही बीमारी की असली वजह पूरी तरह साफ हो पाएगी।

जर्जर ड्रेनेज सिस्टम बना खतरा

महू कैंटोनमेंट क्षेत्र में अंग्रेजों के जमाने का ड्रेनेज सिस्टम आज भी इस्तेमाल में है। करीब 70 साल पुरानी पाइप लाइनों से पूरे इलाके में नर्मदा जल की सप्लाई की जाती है। जिन क्षेत्रों में नर्मदा लाइन नहीं है, वहां सरकारी और निजी बोरवेल के जरिए पानी पहुंचाया जाता है।

समस्या यह है कि कई इलाकों में पेयजल की पाइपलाइन नालियों के पास या उनके अंदर से गुजरती है। पत्ती बाजार, चंदर मार्ग और सुरकी गली जैसे क्षेत्रों में जल निकासी के लिए बनी नालियों पर लोगों ने अतिक्रमण कर घर बना लिए हैं। पिछले करीब 10 वर्षों से ये नालियां घरों के नीचे दबी हुई हैं, जिससे किसी भी तरह की लीकेज या टूट-फूट की स्थिति में गंदा पानी सीधे सप्लाई लाइन में मिल सकता है।

स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी चिंता

लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। प्रभावित इलाकों में दवाइयों का वितरण किया जा रहा है और लोगों को उबला हुआ पानी पीने की सलाह दी जा रही है। साथ ही, पानी की टंकियों और पाइपलाइनों की जांच भी शुरू कर दी गई है।

वायरस की पहचान जरूरी

इसी बीच, एक अलग लेकिन अहम चिकित्सा शोध भी चर्चा में है। एम्स भोपाल के शोधकर्ताओं ने अपनी एक स्टडी में बताया है कि कई बार मामूली दिखने वाले वायरस भी जानलेवा साबित हो सकते हैं। पार्वोवायरस बी19 नामक वायरस पर किए गए शोध में सामने आया है कि यह कुछ मामलों में दिमाग में गंभीर संक्रमण और सूजन पैदा कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब दिमागी बुखार का कारण स्पष्ट न हो, तब इस वायरस की जांच मरीज की जान बचा सकती है। यह वायरस आमतौर पर बच्चों में गालों पर लाल चकत्ते और हल्का बुखार पैदा करता है, लेकिन दुर्लभ मामलों में यह इंसेफ्लाइटिस का कारण बन सकता है।

सतर्कता ही बचाव

महू में फैले जलजनित रोगों ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि साफ पानी और मजबूत जल निकासी व्यवस्था कितनी जरूरी है। जब तक पेयजल और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त नहीं किया जाता, तब तक ऐसी बीमारियों का खतरा बना रहेगा। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि समय रहते हालात पर काबू पाया जा सके।

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