मेरठ।
नौचंदी थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर सेक्टर-3 में सोमवार को एक हृदयविदारक घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया। महज 14 वर्ष की उम्र, कक्षा 9 में पढ़ने वाला एक किशोर, जिसने बचपन की मासूम शरारतों और सपनों के बीच अपनी जिंदगी खत्म कर ली। वजह इतनी छोटी थी कि किसी ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि वह एक परिवार के लिए जिंदगी भर का दर्द बन जाएगी—पतंग उड़ाने से मना किया जाना।

यह घटना गणतंत्र दिवस की छुट्टी वाले दिन दोपहर की है। कॉलोनी के लोग जब राष्ट्रीय पर्व की खुशियों में डूबे हुए थे, तभी एक घर में मातम पसर गया। शास्त्रीनगर सेक्टर-3 निवासी किशोर पिछले तीन दिनों से लगातार अपने दोस्तों के साथ पतंग उड़ाने में व्यस्त था। वसंत पंचमी के दिन बारिश के बावजूद भी वह छत पर पतंग उड़ाने पहुंच गया था। परिवार के अनुसार पढ़ाई से ज्यादा समय पतंग उड़ाने में देने को लेकर घर में पहले से ही नाराजगी थी।
सोमवार सुबह भी छुट्टी होने के कारण किशोर अपने दोस्तों के साथ छत पर पतंग उड़ाने चला गया। मां ने जब देखा कि बेटा फिर वही कर रहा है तो वह नाराज हो गईं। करीब 11 बजे उन्होंने दोस्तों के सामने ही बेटे को डांट दिया। किसी ने नहीं सोचा था कि मां की यह डांट बेटे के मन में इतना गहरा असर छोड़ देगी।
बताया जा रहा है कि दोस्तों के सामने डांट लगने से किशोर खुद को अपमानित महसूस करने लगा। वह बिना कुछ कहे छत से नीचे उतरा और सीधे मकान के ऊपर बने कमरे में चला गया। वहां उसने दुपट्टे से फंदा बनाया और पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली।
करीब एक घंटे बाद जब परिजन ऊपर कमरे में पहुंचे तो नजारा देख चीख-पुकार मच गई। परिवार के लोग उसे तुरंत लोकप्रिय अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल की ओर से किशोर की मृत्यु की सूचना पुलिस को दी गई।
सूचना मिलते ही नौचंदी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी ने बताया कि मृतक कक्षा नौ का छात्र था और उसके पिता पेशे से चालक हैं। परिवार ने किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से इनकार कर दिया। परिजनों के अनुरोध पर बिना पोस्टमार्टम कराए पुलिस ने पंचनामा भरकर शव उन्हें सौंप दिया।
इस घटना के बाद कॉलोनी में शोक की लहर दौड़ गई। हर कोई यही सवाल कर रहा था कि क्या बच्चों की भावनाओं को हम समझ पा रहे हैं? क्या एक मामूली डांट किसी नन्ही जान को इस हद तक तोड़ सकती है?
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि किशोरावस्था बेहद संवेदनशील समय होता है। इस उम्र में बच्चे छोटी-छोटी बातों को भी बहुत बड़ा बना लेते हैं। सार्वजनिक रूप से डांटना, अपमान या तुलना कई बार बच्चों को मानसिक रूप से तोड़ देती है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है—कि बच्चों से संवाद, धैर्य और समझदारी कितनी जरूरी है। एक पल की नाराजगी ने एक हंसता-खेलता घर हमेशा के लिए उजाड़ दिया।
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