मेरठ की अदालतों से शनिवार को आए तीन अहम फैसलों ने गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक सख्ती का स्पष्ट संदेश दिया। एक ओर जहां 10 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई, वहीं किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में चार आरोपियों को दोषी करार दिया गया। इसके अलावा एक अलग मामले में ट्रस्ट विवाद से जुड़े आरोपी की जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई।

10 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म: आरोपी को 20 वर्ष का कारावास
अपर जिला जज एवं विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम शिवानी सिंह प्रथम की अदालत ने किदवई नगर निवासी मोहम्मद जाहिद उर्फ गुल्लू को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 30 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। यह फैसला बाल संरक्षण से जुड़े गंभीर मामलों में अदालत की सख्त दृष्टि को दर्शाता है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 8 जनवरी 2024 को थाना लिसाड़ी गेट में पीड़िता के पिता ने तहरीर देकर मामला दर्ज कराया था। शिकायत में बताया गया कि उनकी 10 वर्षीय मासूम बेटी के साथ आरोपी पिछले करीब डेढ़ माह से दुष्कर्म कर रहा था। आरोपी ने बच्ची को किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी थी। डर और दबाव में बच्ची चुप रही, लेकिन बाद में उसने साहस जुटाकर अपने पिता को पूरी बात बताई।
मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आठ गवाह पेश किए, जिनमें पीड़िता, उसके परिजन और चिकित्सीय साक्ष्य शामिल थे। न्यायालय ने सभी गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी पाया। अदालत ने माना कि प्रस्तुत साक्ष्य आरोपी के अपराध को साबित करने के लिए पर्याप्त हैं, जिसके आधार पर उसे 20 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई गई।
किशोरी दुष्कर्म और हत्या: चार आरोपी दोषी करार
दूसरे मामले में अपर जिला जज पॉक्सो अधिनियम मोहम्मद बाबर खान की अदालत ने किशोरी से दुष्कर्म और हत्या के आरोप में चार आरोपियों—लखन उर्फ अभय, विकास, रॉबिंस कुमार उर्फ रॉबिन और रोहित उर्फ राजा उर्फ रॉकी—को दोषी करार दिया है। सभी आरोपी गांव कपसाड़ के निवासी बताए गए हैं। सजा पर अंतिम सुनवाई के लिए अदालत ने 11 फरवरी की तारीख तय की है।
अभियोजन के अनुसार, 21 अप्रैल 2021 को सरधना थाना क्षेत्र में पीड़िता के परिजन ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि नाबालिग भतीजी ट्यूशन पढ़ने के लिए घर से निकली थी, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटी। काफी खोजबीन के बाद वह गंभीर और बदहवास हालत में मिली। उसने परिजनों को बताया कि चारों आरोपियों ने उसके साथ दुष्कर्म किया और उसे मारने की नीयत से जहर पिला दिया।
पीड़िता को गंभीर अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। इस घटना से क्षेत्र में आक्रोश फैल गया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की और आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाए। न्यायालय में अभियोजन पक्ष ने 12 गवाह पेश किए। गवाहों के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी करार दिया। अब 11 फरवरी को सजा की अवधि पर अंतिम निर्णय सुनाया जाएगा।
ट्रस्ट विवाद में जमानत अर्जी खारिज
इसी दिन एक अन्य मामले में अपर जिला जज कोर्ट संख्या-2 आलोक द्विवेदी ने सत्यकाम एजुकेशनल ट्रस्ट विवाद से जुड़े आरोपी प्रबंधक अनुज शर्मा की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी पर फर्जी हस्ताक्षर और जाली दस्तावेज तैयार करने जैसे गंभीर आरोप हैं।
अधिवक्ता की ओर से दलील दी गई कि अनुज शर्मा को झूठा फंसाया गया है और उनके निर्दोष होने के पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं। जमानत प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया कि जांच में सहयोग किया गया है और हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
हालांकि अभियोजन पक्ष ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए न्यायालय के समक्ष ऐसे साक्ष्य प्रस्तुत किए, जो आरोपी की संलिप्तता दर्शाते हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने पाया कि जमानत देने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है। परिणामस्वरूप जमानत याचिका खारिज कर दी गई।
न्यायालयों का स्पष्ट संदेश
शनिवार को आए इन फैसलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बाल अपराध और गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायालय सख्त रुख अपना रहा है। विशेषकर पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में अदालतें त्वरित सुनवाई और कठोर दंड के माध्यम से यह संदेश दे रही हैं कि बच्चों के विरुद्ध अपराध किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
पीड़ित परिवारों के लिए ये फैसले न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। वहीं समाज के लिए भी यह चेतावनी है कि कानून ऐसे अपराधों के प्रति बेहद गंभीर है और दोषियों को सजा से बचना आसान नहीं होगा।
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