अलीगढ़ में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के दौरान फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। अलीगढ़ के पते पर स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने आरटीओ कार्यालय पहुंचे एक कश्मीरी युवक को पुलिस ने जांच के बाद गिरफ्तार कर लिया। युवक के आधार कार्ड में स्थानीय एजेंट द्वारा पता बदलकर अलीगढ़ का दर्ज किया गया था। पूछताछ और जांच पूरी होने के बाद शनिवार को उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया, जबकि इस फर्जीवाड़े में शामिल स्थानीय एजेंट की तलाश जारी है।
आरटीओ जांच में खुली पोल
यह घटना शुक्रवार दोपहर की है। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले के मट्टन थाना क्षेत्र स्थित अकड़शील गांव का रहने वाला जुनैद वानी, अपने गांव के ही एक अन्य युवक फरहद नबी के साथ अलीगढ़ के आरटीओ कार्यालय पहुंचा था। जुनैद ने पहले ही एक एजेंट के माध्यम से स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन कर रखा था और शुक्रवार को उसे दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया था।
आरटीओ कार्यालय में तैनात लिपिक लव कुमार ने जब आधार कार्ड नंबर को डीजी लॉकर से मिलान किया, तो दस्तावेजों में गड़बड़ी नजर आई। आधार कार्ड की हार्ड कॉपी पर जेल रोड, गगन स्कूल के पास अलीगढ़ का पता दर्ज था, जबकि डीजी लॉकर में मौजूद आधार में जुनैद का मूल पता कश्मीर का था। इस विरोधाभास ने अधिकारियों को सतर्क कर दिया।
पुलिस, एटीएस और खुफिया एजेंसियां सक्रिय
लिपिक ने तुरंत इस बारे में आरआई अनुराग वर्मा को सूचना दी। इसके बाद बन्नादेवी थाना पुलिस को मौके पर बुला लिया गया। पुलिस दोनों युवकों को आधार कार्ड समेत थाने ले गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एटीएस और खुफिया विभाग की टीमें भी जांच में जुट गईं।
रात भर चली पूछताछ के बाद जुनैद के साथी फरहद नबी को छोड़ दिया गया, जबकि दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा सामने आने पर जुनैद वानी को शनिवार को जेल भेज दिया गया।
आठ हजार रुपये में बदला गया पता
पूछताछ में सामने आया कि जुनैद और उसका साथी करीब तीन महीने पहले अनंतनाग से अलीगढ़ शॉल बेचने आए थे। वे कार से आसपास के इलाकों में घूम-घूम कर शॉल बेचते थे और सरायों में किराये पर रहते थे। इसी दौरान जुनैद ने जमालपुर निवासी मुबीन नाम के एजेंट से ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए संपर्क किया।
आरोप है कि एजेंट ने आधार कार्ड को एडिट कर उसमें अलीगढ़ का स्थायी पता दर्ज कर दिया। इसी फर्जी आधार के आधार पर पहले लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया गया। बाद में स्थायी डीएल बनवाने के लिए जुनैद आरटीओ कार्यालय पहुंचा था। इस पूरे फर्जीवाड़े के लिए एजेंट ने उससे आठ हजार रुपये वसूले।
कश्मीर से भी कराई गई तस्दीक
सुरक्षा एजेंसियों ने पकड़े गए युवक के बारे में कश्मीर से भी पूरी तस्दीक कराई। साथ ही अलीगढ़ में जहां वे ठहरे हुए थे, वहां से भी उनके साथियों, पते और दस्तावेजों की गहन जांच की गई। जांच में यह साफ हुआ कि मामला सिर्फ ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए फर्जीवाड़े तक सीमित है। किसी तरह की संदिग्ध या राष्ट्रविरोधी गतिविधि के संकेत नहीं मिले हैं।
एजेंट की तलाश जारी
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, आरटीओ कार्यालय में दस्तावेजों में गड़बड़ी पाए जाने की सूचना पर तत्काल कार्रवाई की गई। एटीएस और खुफिया जांच पूरी होने के बाद फर्जीवाड़े के आरोप में कश्मीरी युवक को जेल भेजा गया है।
अब पुलिस की टीमें स्थानीय एजेंट मुबीन की तलाश में दबिश दे रही हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
अलीगढ़ में इससे पहले भी दूसरे राज्यों के लोगों के अलावा नेपाल, बांग्लादेश और रोहिंग्या समुदाय से जुड़े लोगों के आधार कार्ड में फर्जीवाड़े के मामले सामने आते रहे हैं। हाल ही में एसटीएफ ने क्वार्सी इलाके में जनसेवा केंद्र के दो संचालकों को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा पालीमुकीमपुर क्षेत्र में भी ऐसे गिरोह का खुलासा हो चुका है।
निष्कर्ष:
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा कर पहचान बदलने की कोशिशें लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन की सख्ती और डिजिटल सत्यापन की वजह से बड़ा फर्जीवाड़ा समय रहते पकड़ा गया है, लेकिन ऐसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए एजेंटों और जनसेवा केंद्रों की निगरानी और कड़ी करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
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