रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय से लंबित बकाया को लेकर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपना लिया है। Noida के सेक्टर-1 में स्थित गायत्री डेवलपवेल कंपनी के ओरा, एपेक्स ओरा और गायत्री हॉस्पिटैलिटी एंड रीयलकॉन अपार्टमेंट्स को कुर्क किए जाने के बाद अब उनकी नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इन संपत्तियों की अनुमानित बाजार कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है।

कंपनी के निदेशक Hariom Dixit के खिलाफ पहले से कई शिकायतें दर्ज हैं। घर खरीदारों की ओर से भुगतान न मिलने की शिकायतें Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority (रेरा) में की गई थीं। जांच के बाद वर्ष 2019 में 18 रिकवरी सर्टिफिकेट जारी किए गए थे। बावजूद इसके, वर्षों तक बकाया राशि की वसूली नहीं हो सकी।
बताया जाता है कि आगरा के 20 से अधिक निवेशकों ने अलग-अलग परियोजनाओं में पैसा लगाया था। बिल्डर ने शुरुआती दौर में सात खरीदारों को भुगतान कर दिया, लेकिन 11 निवेशकों के लगभग 4.08 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं। आरसी जारी होने के बाद भी जब रकम नहीं लौटी, तो प्रशासन ने संपत्तियों की तलाश शुरू की। कंपनी के रजिस्ट्रार रिकॉर्ड खंगालने पर नोएडा स्थित इन बहुमूल्य परिसंपत्तियों का पता चला।
इसके बाद एसडीएम सदर Sachin Rajput के नेतृत्व में राजस्व टीम ने कार्रवाई करते हुए तीनों प्रोजेक्ट्स को कुर्क कर सील कर दिया। कुर्की के दबाव में बिल्डर की ओर से 40 लाख रुपये जमा कराए गए, लेकिन यह कुल बकाया की तुलना में बेहद कम है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि शेष राशि शीघ्र जमा नहीं की गई तो नीलामी की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
नीलामी से प्राप्त धनराशि सीधे उन घर खरीदारों को दी जाएगी, जिनकी रकम वर्षों से अटकी हुई है। नियमों के तहत बिल्डर या उसके परिवार के सदस्य नीलामी में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से कराई जाएगी, ताकि प्रभावित निवेशकों को जल्द राहत मिल सके।
इस प्रकरण ने एक बार फिर रियल एस्टेट क्षेत्र में जवाबदेही के सवाल खड़े कर दिए हैं। कई खरीदारों ने अपनी जीवनभर की बचत इन परियोजनाओं में लगाई थी। निर्माण कार्य अधूरा रह गया और धन वापसी भी नहीं हुई, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। प्रशासन की ताजा कार्रवाई से उनमें उम्मीद जगी है कि अब उनका पैसा वापस मिल सकता है।
हरिओम दीक्षित के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले सिकंदरा और हरीपर्वत समेत कई थानों में दर्ज हैं। कुछ मामलों में पुलिस चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है। हालांकि, गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
इसी बीच प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि अन्य बकायेदार बिल्डरों के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में एक अन्य परियोजना ‘द क्राउन फेज-1’ में भी कुर्की की कार्रवाई की गई है। इससे साफ है कि बकाया न चुकाने वाले बिल्डरों पर शिकंजा कसने का अभियान व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रेरा व्यवस्था का मकसद ही घर खरीदारों को सुरक्षा देना है। यदि आदेशों के बावजूद बिल्डर भुगतान नहीं करते, तो संपत्ति कुर्की और नीलामी ही अंतिम उपाय बनता है। इस कार्रवाई से बाजार में यह संदेश गया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों को अब राहत नहीं मिलेगी।
कुल मिलाकर, ओरा, एपेक्स और रीयलकॉन प्रोजेक्ट्स की प्रस्तावित नीलामी सिर्फ एक कारोबारी कार्रवाई नहीं, बल्कि उन निवेशकों के लिए उम्मीद की किरण है जो वर्षों से न्याय का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में नीलामी प्रक्रिया आगे बढ़ने पर यह मामला रियल एस्टेट क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
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