उत्तर-पश्चिम भारत में एक बार फिर मौसम ने करवट ली है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले दो दिनों तक यह अस्थिरता बनी रह सकती है, जिससे कई इलाकों में बादल, बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रह सकता है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में हल्की से मध्यम बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में हिमपात की स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही उत्तर भारत के मैदानी राज्यों में भी बदलते मौसम का असर देखा जा रहा है।
पश्चिमी विक्षोभ बना मुख्य कारण
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण-पूर्वी पाकिस्तान और उससे सटे पश्चिमी राजस्थान के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण यह मौसमीय बदलाव देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर निचले स्तर पर चक्रवाती परिसंचरण बन रहा है और अरब सागर से मध्य भारत तक एक निम्न दबाव क्षेत्र फैला हुआ है।
इन सभी प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत में बादल, बारिश, तेज हवाएं और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि जैसी स्थितियां बन रही हैं।
दिल्ली-एनसीआर समेत मैदानी राज्यों में असर
मैदानी इलाकों में भी मौसम का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। दिल्ली-एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ हल्की फुहारें दर्ज की गईं। कई जगहों पर बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश भी हुई।
पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वी राजस्थान के कई इलाकों में भी इसी तरह की स्थिति रही। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 48 घंटों में इन क्षेत्रों में हल्की बारिश और तेज हवाएं फिर चल सकती हैं।
उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी
उत्तराखंड में कई स्थानों पर बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। चारधाम मार्गों और ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में ठंड और फिसलन बढ़ सकती है, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
इसी तरह हिमाचल प्रदेश में भी बादलों का असर बना रहा। राजधानी शिमला सहित सिरमौर और सोलन जिलों में हल्की बारिश दर्ज की गई, जबकि कुल्लू, लाहौल-स्पीति और रोहतांग दर्रे के आसपास ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई।
मौसम विभाग का अनुमान है कि 22 फरवरी तक प्रदेश में मौसम अपेक्षाकृत साफ रह सकता है, लेकिन 23 फरवरी को एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से फिर बारिश और बर्फबारी की संभावना बन सकती है।
कई राज्यों में बारिश और ओले
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश दर्ज की गई।
कुछ स्थानों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। हरियाणा, पूर्वी राजस्थान और उत्तरी मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में ओलावृष्टि भी देखी गई, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
मौसम विभाग ने पहले ही इन परिस्थितियों को देखते हुए कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया था, जिसके चलते प्रशासन को सतर्क रहने को कहा गया है।
समुद्री क्षेत्रों में भी चेतावनी
मौसम का असर केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका तट के पास बने कम दबाव क्षेत्र के कारण समुद्री इलाकों में तेज हवाएं चलने का अनुमान है।
अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह में गरज-चमक के साथ बारिश और 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। समुद्र में हवा की गति 45 से 55 किमी प्रति घंटे तक पहुंचने की संभावना है।
मौसम विभाग ने मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी है और तटीय प्रशासन को सतर्क रहने को कहा है।
तापमान में उतार-चढ़ाव
आईएमडी के अनुसार अगले दो दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, जबकि अधिकतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी संभव है।
पश्चिमी भारत में भी तापमान में बदलाव देखने को मिल सकता है। गुजरात और महाराष्ट्र में न्यूनतम तापमान 2 से 3 डिग्री तक बढ़ने की संभावना है, जबकि मध्य भारत में कुछ दिनों बाद अधिकतम तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।
पूर्वी भारत में कोहरे की आशंका
पूर्वी भारत में मौसम का अलग असर दिख सकता है। ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में सुबह के समय घना कोहरा छाने की संभावना जताई गई है। इससे दृश्यता कम हो सकती है और सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है।
मौसम विभाग ने वाहन चालकों को धीमी गति से वाहन चलाने और आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।
किसानों और आम लोगों के लिए सलाह
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बदलते मौसम का असर फसलों, खासकर गेहूं और सरसों की खेती पर पड़ सकता है। लगातार नमी और ओलावृष्टि से नुकसान की आशंका रहती है।
साथ ही लोगों को भी स्वास्थ्य संबंधी सावधानी बरतने की जरूरत है, क्योंकि अचानक तापमान परिवर्तन से सर्दी-जुकाम, खांसी और वायरल संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश का असर अगले दो दिनों तक जारी रह सकता है।
मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और लोगों से मौसम अपडेट पर ध्यान देने तथा आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील कर रहा है।
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