पंजाब में पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया के जरिए फंसाने के कई मामलों के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। कथित तौर पर विदेशी नेटवर्क से जुड़ी फर्जी महिला प्रोफाइल्स के माध्यम से संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिशों को गंभीर खतरे के रूप में देखा जा रहा है। इसी परिप्रेक्ष्य में Ministry of Home Affairs ने पुलिस बलों के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है।

सोशल मीडिया बना नया हथियार
गृह मंत्रालय के अनुसार, संदिग्ध खुफिया तंत्र फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं। ये लोग आकर्षक प्रोफाइल फोटो और भरोसेमंद पहचान का इस्तेमाल करते हुए खुद को पत्रकार, रिसर्चर, एनजीओ कार्यकर्ता या पूर्व अधिकारी बताकर संपर्क साधते हैं। शुरुआती बातचीत सामान्य विषयों पर होती है, लेकिन धीरे-धीरे चर्चा का रुख संवेदनशील जानकारियों की ओर मोड़ दिया जाता है।
अक्सर भावनात्मक जुड़ाव या दोस्ती का माहौल बनाकर लक्ष्य व्यक्ति को विश्वास में लिया जाता है। इसके बाद ड्यूटी, लोकेशन, ऑपरेशन या यूनिट से संबंधित विवरण मांगे जाते हैं। मंत्रालय का मानना है कि यह एक सुनियोजित रणनीति है, जिसका उद्देश्य सुरक्षा तंत्र में सेंध लगाना है।
पंजाब में सामने आए उदाहरण
हाल के वर्षों में पंजाब के सीमावर्ती जिलों में कई घटनाएं सामने आई हैं।
अमृतसर में एक पुलिसकर्मी को सोशल मीडिया के जरिए संपर्क कर सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल पूछे गए।
तरनतारन में इंस्टाग्राम पर ‘पत्रकार’ बनकर सीमावर्ती क्षेत्रों की तस्वीरें मांगी गईं।
गुरदासपुर में लिंक्डइन पर ‘विदेशी शोधकर्ता’ की पहचान से जानकारी जुटाने का प्रयास हुआ।
एक बीएसएफ जवान को व्हाट्सएप पर महिला प्रोफाइल से संपर्क कर यूनिट से जुड़ी सूचनाएं साझा करने के लिए उकसाया गया।
इन मामलों में समय रहते सतर्कता बरती गई, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गंभीर चेतावनी के रूप में लिया है।
नई SOP के प्रमुख बिंदु
Ministry of Home Affairs द्वारा जारी SOP में कई स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं:
पुलिसकर्मी ड्यूटी, लोकेशन, ऑपरेशन या कार्यालय से जुड़ी कोई भी तस्वीर या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा नहीं करेंगे।
अनजान या संदिग्ध प्रोफाइल की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं की जाएगी।
नौकरी, इनाम, विदेशी यात्रा या सरकारी योजना के नाम पर भेजे गए ऑफर और लिंक पर प्रतिक्रिया देने से बचना होगा।
आधिकारिक संवाद के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और नियमित प्राइवेसी ऑडिट अनिवार्य होंगे।
यदि किसी अकाउंट या डिवाइस के हैक होने का संदेह हो, तो तुरंत उसे अलग कर काउंटर-इंटेलिजेंस जांच कराई जाएगी।
डिजिटल अनुशासन पर जोर
मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि सभी पुलिस इकाइयों में साइबर सुरक्षा पर नियमित प्रशिक्षण आयोजित किया जाए। नए भर्ती कर्मियों को शुरुआत से ही डिजिटल खतरों के प्रति जागरूक किया जाए। वरिष्ठ अधिकारियों के लिए भी समय-समय पर रिफ्रेशर कोर्स आयोजित करने की सिफारिश की गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया का बढ़ता उपयोग सुरक्षा बलों के लिए दोधारी तलवार बन गया है। जहां यह संवाद और सूचना का माध्यम है, वहीं दूसरी ओर गलत इस्तेमाल से राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
व्यक्तिगत सतर्कता भी जरूरी
SOP में यह भी स्पष्ट किया गया है कि तकनीकी उपायों के साथ व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है। किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। लापरवाही या नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि हनीट्रैप केवल गोपनीय सूचनाओं की चोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और करियर को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए डिजिटल व्यवहार में संयम और सावधानी आवश्यक है।
निष्कर्ष
पंजाब में सामने आए मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया के जरिए जासूसी की कोशिशें वास्तविक और गंभीर हैं। केंद्र द्वारा जारी नई SOP सुरक्षा बलों को डिजिटल जाल से बचाने की दिशा में एक अहम कदम है। अब राज्यों और पुलिस इकाइयों पर जिम्मेदारी है कि वे इन निर्देशों को सख्ती से लागू करें और अपने कर्मियों को हर स्तर पर सतर्क रखें।
डिजिटल युग में सुरक्षा केवल हथियारों से नहीं, बल्कि समझदारी और सतर्कता से भी सुनिश्चित की जाती है।
स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !