उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिला में एक शादी समारोह उस वक्त तनाव और नाराजगी में बदल गया, जब बारात निकलने से ठीक पहले दूल्हे के घर की बिजली अचानक काट दी गई। इस अप्रत्याशित घटना से शादी की तैयारियां बाधित हो गईं और मेहमानों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पीड़ित परिवार ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।

यह मामला नूरपुर क्षेत्र की डायमंड सिटी कॉलोनी का है। यहां रहने वाले शुभम चौहान की शादी थी और घर में कई दिनों से जश्न का माहौल बना हुआ था। रिश्तेदार दूर-दूर से पहुंच चुके थे, घर में पारंपरिक रस्में चल रही थीं और बारात की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं।
परिवार के मुताबिक, जिस समय शुभम चौहान शेरवानी पहनकर बारात के लिए तैयार खड़े थे, उसी दौरान अचानक पूरे घर की बिजली चली गई। शुरुआत में लोगों ने इसे सामान्य कटौती समझा, लेकिन कुछ ही देर में पता चला कि बिजली विभाग के कर्मचारी ने घर का कनेक्शन ही काट दिया है।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि नूरपुर बिजली विभाग का एक लाइनमैन मौके पर पहुंचा और बिना किसी पूर्व सूचना के खंभे पर चढ़कर सप्लाई बंद कर दी। इस कार्रवाई से घर में अंधेरा छा गया और शादी की तैयारियां पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गईं।
बिजली जाते ही सजावट की लाइटें बुझ गईं, साउंड सिस्टम बंद हो गया और घर के अंदर चल रही रस्मों में भी बाधा आ गई। मेहमानों को काफी असुविधा हुई और दूल्हा पक्ष को उनके सामने शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। परिवार के सदस्य व्यवस्था संभालने में जुट गए, लेकिन माहौल में अचानक आई इस रुकावट से खुशी फीकी पड़ गई।
दूल्हे शुभम चौहान ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने करीब दो महीने पहले ही बिजली का कनेक्शन लिया था और समय पर बिल भी जमा किया जा रहा था। उनका सवाल है कि अगर कोई बकाया या तकनीकी समस्या थी तो विभाग ने पहले सूचना क्यों नहीं दी।
परिवार का आरोप है कि बिजली विभाग के कर्मचारियों ने मौके की संवेदनशीलता को नजरअंदाज किया। उनका कहना है कि शादी जैसे अहम अवसर पर इस तरह की कार्रवाई पूरी तरह अमानवीय है। अगर विभाग को कोई कार्रवाई करनी भी थी तो कम से कम पहले नोटिस दिया जाना चाहिए था।
स्थानीय निवासियों में भी इस घटना को लेकर गुस्सा देखा गया। कॉलोनी के लोगों का कहना है कि विभाग को नियमों के साथ-साथ मानवीय पहलुओं का भी ध्यान रखना चाहिए। उनका मानना है कि बिना सूचना के कनेक्शन काटना विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।
बताया जा रहा है कि भारी मशक्कत के बाद परिवार ने वैकल्पिक व्यवस्था कर किसी तरह बारात को रवाना किया, लेकिन इस घटना की कसक परिवार के मन में बनी हुई है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि शादी जैसे खुशी के मौके पर उन्हें अपमानजनक स्थिति से गुजरना पड़ा।
परिवार ने प्रशासन और बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करने की भी अपील की है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े।
फिलहाल इस मामले में बिजली विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने का इंतजार किया जा रहा है। यदि जांच में लापरवाही या प्रक्रिया का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई संभव है।
यह घटना एक बार फिर सरकारी सेवाओं में संवेदनशीलता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े करती है। शादी जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक अवसर पर हुई इस कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर बहस छेड़ दी है कि क्या विभागीय नियमों के साथ मानवीय दृष्टिकोण को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पीड़ित परिवार अब न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है और चाहता है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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