उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने महिलाओं की सुरक्षा और नस्लीय भेदभाव दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एम्स गोरखपुर की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर के साथ तीन युवकों द्वारा करीब डेढ़ किलोमीटर तक पीछा कर छेड़छाड़, नस्लीय टिप्पणी और अभद्र हरकत करने का मामला सामने आया है।

पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीसरे की तलाश जारी है।
🚶♀️ मॉल से निकली डॉक्टर, पीछे लग गए युवक
घटना 22 फरवरी की रात करीब आठ बजे की है। नागालैंड की रहने वाली पीड़िता मोहद्दीपुर स्थित ओरियन मॉल से बाहर निकलीं और हॉस्टल लौटने के लिए पैदल जा रही थीं।
इसी दौरान तीन युवक उनके पीछे लग गए। शुरुआत में वे उन्हें घूरते रहे, फिर हंसी-मजाक और फब्तियां कसने लगे।
पीड़िता के अनुसार आरोपियों ने रास्ते भर नस्लीय टिप्पणी की और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। यह पीछा मॉल से लेकर एम्स गेट नंबर-2 तक जारी रहा।
🚨 गेट के पास बढ़ी बदसलूकी
जब पीड़िता संस्थान के गेट के पास पहुंचीं, तब एक आरोपी ने अचानक शर्ट उतार दी और अशोभनीय हरकत करने लगा।
इसके बाद उसने महिला डॉक्टर को छूने की कोशिश की और अनुचित शारीरिक स्पर्श किया।
जब पीड़िता ने विरोध किया तो आरोपियों ने उन्हें धमकी दी कि अगर किसी से शिकायत की तो जान से मार देंगे।
👩⚕️ डॉक्टर सदमे में, मामला दर्ज
घटना से घबराई पीड़िता ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। एम्स थाना में उनकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया।
पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की और फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर ली।
👮 दो आरोपी गिरफ्तार, तीसरे की तलाश
पुलिस ने देर शाम दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों देवरिया जिले के रहने वाले छात्र बताए जा रहे हैं।
तीसरा आरोपी फरार है और उसे पकड़ने के लिए चार टीमें गठित की गई हैं। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
📱 सोशल मीडिया पर उठा मामला
घटना सामने आने के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों के संगठन नाफोर्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर मामले को उठाया।
संगठन ने इसे न सिर्फ यौन उत्पीड़न बल्कि नस्लीय भेदभाव का गंभीर मामला बताया। पोस्ट में कहा गया कि पूर्वोत्तर से होने के कारण डॉक्टर को अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।
⚖️ कानून के तहत क्या कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों पर छेड़छाड़, धमकी और अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। यदि नस्लीय टिप्पणी की पुष्टि होती है, तो मामले में अतिरिक्त धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर पीछा करना, अनुचित स्पर्श और धमकी देना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।
❗ सुरक्षा पर उठे सवाल
यह घटना मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल बन गई है।
शहर के व्यस्त इलाके में इतनी देर तक पीछा होने के बावजूद किसी ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया?
क्या सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा के इंतजाम पर्याप्त हैं?
इन सवालों पर अब बहस शुरू हो गई है।
🧭 आगे क्या होगा
पुलिस तीसरे आरोपी की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
साथ ही डॉक्टरों के संगठनों ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और परिसर के आसपास सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
यह मामला अब सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक चेतावनी बन गया है
कि नस्लीय पूर्वाग्रह और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे अभी भी गंभीर चुनौती बने हुए हैं
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