सौरभ शेखर श्रीवास्तव की ब्यूरो रिपोर्ट दरभंगा। बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देशानुसार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार, दरभंगा के तत्वावधान में शनिवार को व्यवहार न्यायालय, दरभंगा परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर न्यायपालिका और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन का उद्देश्य आम नागरिकों को सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना तथा न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करना है।

राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्घाटन समारोह में जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, दरभंगा शिव गोपाल मिश्र, जिलाधिकारी दरभंगा कौशल कुमार, वरीय पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेड्डी तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव आरती कुमारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, न्यायालय कर्मी तथा बड़ी संख्या में वादकारी भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश शिव गोपाल मिश्र ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य आपसी सहमति एवं सुलहनामे के आधार पर विवादों का त्वरित, सुलभ और कम खर्च में समाधान सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत भारतीय न्याय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण माध्यम है, जिसके जरिए ऐसे मामलों का निपटारा संभव हो पाता है, जिनमें दोनों पक्ष आपसी समझौते के आधार पर समाधान चाहते हैं।
उन्होंने बताया कि लोक अदालत में विशेष रूप से कंपाउंडेबल अर्थात शमनीय मामलों की सुनवाई की जाती है। ऐसे मामलों में यदि दोनों पक्ष सहमति से समाधान के लिए तैयार हों तो उनका निपटारा तत्काल किया जा सकता है। इससे न्यायालयों में वर्षों से लंबित मामलों का बोझ कम होता है और वादकारियों को शीघ्र न्याय प्राप्त होता है।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा कि लोक अदालत का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें मामलों के निपटारे के लिए किसी प्रकार का न्यायालय शुल्क नहीं लिया जाता है। यदि किसी मामले में पहले से न्यायालय शुल्क जमा किया गया हो और वह मामला लोक अदालत के माध्यम से सुलझ जाता है तो वह शुल्क भी वापस कर दिया जाता है। इस प्रकार यह व्यवस्था आम लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि लोक अदालत के निर्णय दोनों पक्षों की सहमति से लिए जाते हैं, इसलिए इसमें किसी प्रकार की अपील का प्रावधान नहीं होता। इससे मामलों का स्थायी समाधान हो जाता है और पक्षकारों के बीच आपसी सौहार्द भी बना रहता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने लंबित मामलों को लोक अदालत के माध्यम से सुलझाने के लिए आगे आएं।

जिलाधिकारी दरभंगा कौशल कुमार ने इस अवसर पर कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से ऐसे मामलों का समाधान किया जाता है, जिन्हें लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बजाय आपसी सहमति से सुलझाया जा सकता है। इससे लोगों का समय और धन दोनों की बचत होती है।
जिलाधिकारी ने कहा कि जिला प्रशासन भी इस आयोजन में हर संभव सहयोग प्रदान कर रहा है ताकि अधिक से अधिक मामलों का निपटारा किया जा सके। उन्होंने कहा कि लोक अदालत समाज में सौहार्द और पारस्परिक समझ को बढ़ावा देने का भी कार्य करती है।

वरीय पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेड्डी ने अपने संबोधन में कहा कि कई बार छोटे-छोटे विवाद न्यायालयों में वर्षों तक लंबित रहते हैं, जिससे पक्षकारों को मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में लोक अदालत एक प्रभावी मंच प्रदान करती है, जहां दोनों पक्ष आपसी सहमति से अपने विवादों का समाधान कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन भी लोक अदालत की इस पहल का स्वागत करता है, क्योंकि इससे समाज में शांति और सौहार्द बनाए रखने में मदद मिलती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे आपसी विवादों को बढ़ाने के बजाय लोक अदालत के माध्यम से सुलझाने की कोशिश करें।
जिला विधिक सेवा प्राधिकार, दरभंगा की सचिव आरती कुमारी ने बताया कि बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार, पटना के निर्देश पर इस राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के सफल संचालन के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकार, दरभंगा द्वारा कुल 28 बेंचों का गठन किया गया है।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि व्यवहार न्यायालय, दरभंगा में 16 बेंच, व्यवहार न्यायालय, बेनीपुर में 05 बेंच तथा व्यवहार न्यायालय, बिरौल में 07 बेंच का गठन किया गया है। इन सभी बेंचों में न्यायिक पदाधिकारी और अधिवक्ताओं की टीम मामलों की सुनवाई कर रही है।

सचिव आरती कुमारी ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई की जा रही है। इनमें मुकदमा पूर्व (प्री-लिटिगेशन) मामले तथा न्यायालयों में लंबित वाद शामिल हैं। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से शमनीय आपराधिक वाद, एन.आई. एक्ट की धारा 138 से संबंधित मामले, बैंक ऋण वसूली वाद, मोटर दुर्घटना दावा वाद तथा श्रम विवाद से जुड़े मामलों का निपटारा लोक अदालत के माध्यम से किया जा रहा है।
इसके अलावा विद्युत एवं पानी बिल संबंधी विवाद, वैवाहिक विवाद, भूमि अधिग्रहण वाद, सेवा संबंधी मामले जैसे वेतन, भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े विवाद भी लोक अदालत में सुने जा रहे हैं। जिला न्यायालय में लंबित राजस्व संबंधी मामलों के साथ-साथ अन्य दीवानी वाद जैसे किराया, सुखाधिकार, निषेधाज्ञा तथा संविदा के विनिर्दिष्ट पालन से संबंधित मामलों का भी निपटारा किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि लोक अदालत के माध्यम से बीएसएनएल सहित विभिन्न संस्थानों से संबंधित मामलों का भी आपसी सुलह के आधार पर तत्काल निष्पादन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में दोनों पक्षों को बुलाकर उनकी सहमति से समाधान कराया जाता है, जिससे विवाद का स्थायी समाधान संभव हो पाता है।
लोक अदालत के दौरान बड़ी संख्या में वादकारी अपने-अपने मामलों के समाधान के लिए न्यायालय परिसर पहुंचे। विभिन्न बेंचों में न्यायिक पदाधिकारियों और अधिवक्ताओं द्वारा पक्षकारों को समझाकर समझौते के आधार पर मामलों का निपटारा कराने का प्रयास किया गया।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों ने आम नागरिकों से अपील की कि वे लोक अदालत की इस व्यवस्था का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपने विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने की पहल करें। उन्होंने कहा कि लोक अदालत न केवल न्यायिक प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाती है, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द और विश्वास को भी मजबूत करती है।
इस अवसर पर विभिन्न बेंचों के पीठासीन पदाधिकारी, अधिवक्ता गण, न्यायालय कर्मी तथा अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे और राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल संचालन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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