डगरुआ थाना क्षेत्र के एक गांव से सामने आई यह सनसनीखेज घटना पूरे इलाके को हिलाकर रख देने वाली है। दस दिन पहले लापता हुई एक युवती का शव मिलने के बाद इस मामले ने भयावह मोड़ ले लिया। पुलिस जांच में जो सच्चाई सामने आई, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि उसके अन्य साथियों की तलाश जारी है।

जानकारी के अनुसार, 11 मार्च की रात युवती अचानक अपने घर से गायब हो गई थी। परिजनों ने 12 मार्च को थाने में शिकायत दर्ज कराई और बेटी की तलाश शुरू कर दी। कई दिनों तक कोई सुराग नहीं मिलने पर परिवार वालों को गांव के ही एक युवक, सचिन कुमार, पर शक हुआ। उन्होंने 18 मार्च को पुलिस को इस बारे में बताया, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया।
परिजनों का कहना है कि पुलिस ने न सिर्फ उनकी शिकायत को नजरअंदाज किया, बल्कि उन्हें ही उल्टा फटकार लगाई। इस व्यवहार से नाराज होकर परिवार और ग्रामीणों ने थाने में हंगामा किया। मामला बढ़ता देख स्थानीय जनप्रतिनिधियों को बीच में आना पड़ा, जिसके बाद पुलिस ने जांच के लिए कुछ समय मांगा।
इसी दौरान पुलिस ने दो संदिग्धों को हिरासत में लिया, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। इस कदम से लोगों का गुस्सा और बढ़ गया। आखिरकार दबाव में आकर पुलिस ने मुख्य आरोपी सचिन कुमार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने जो खुलासा किया, वह बेहद चौंकाने वाला था।
पुलिस के मुताबिक, सचिन पिछले चार महीनों से युवती के संपर्क में था। घटना वाली रात उसने युवती को मेले में घूमने के बहाने बुलाया। इसके बाद वह उसे अपने दोस्तों के पास ले गया, जहां पहले से ही साजिश रची गई थी। वहां उसने युवती के साथ दुष्कर्म किया और फिर अपने दोस्तों के साथ भी संबंध बनाने के लिए दबाव डालने लगा।
जब युवती ने इस घिनौनी मांग का विरोध किया, तो सभी आरोपियों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने शव को बोरे में बंद कर मक्के के खेत में फेंक दिया। पहचान छिपाने के लिए शव पर एसिड और नमक डाल दिया गया, ताकि कोई उसे पहचान न सके।
जब पुलिस शव बरामद करने के लिए मौके पर पहुंची, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। भीड़ ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया, जिसमें दो होमगार्ड घायल हो गए। हालात बिगड़ते देख पुलिस को पीछे हटना पड़ा। इस घटना के विरोध में लोगों ने पूर्णिया-किशनगंज फोरलेन सड़क को जाम कर दिया, जिससे कई घंटों तक यातायात प्रभावित रहा।
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि अगर पुलिस समय पर कार्रवाई करती, तो युवती की जान बचाई जा सकती थी। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने जानबूझकर आरोपियों को बचाने की कोशिश की।
हालांकि, पुलिस अधीक्षक ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायत मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू कर दी थी। उन्होंने बताया कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीम बनाई गई है।
इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके में डर और गुस्से का माहौल पैदा कर दिया है। लोग न्याय की मांग कर रहे हैं और दोषियों को कड़ी सजा देने की अपील कर रहे हैं। यह घटना एक बार फिर समाज में महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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