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यूपी में आरटीई दाखिलों को बढ़ावा: 1.05 लाख बच्चों को मिला प्रवेश, शेष के लिए एक हफ्ते का अतिरिक्त मौका; होमगार्ड भर्ती परीक्षा की तैयारी तेज

उत्तर प्रदेश में शिक्षा और रोजगार दोनों मोर्चों पर इस समय महत्वपूर्ण गतिविधियां चल रही हैं। एक ओर जहां निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा के अधिकार के तहत हजारों बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने का अभियान जारी है, वहीं दूसरी ओर होमगार्ड भर्ती परीक्षा को लेकर प्रशासन ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। दोनों ही पहलें प्रदेश के सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।

सबसे पहले बात करें शिक्षा की, तो निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम यानी आरटीई के तहत इस साल भी बड़े स्तर पर बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया चलाई गई। राज्य में इस सत्र के लिए कुल 1.95 लाख सीटें निर्धारित की गई थीं, जिनमें से अब तक लगभग 1.05 लाख बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित किया जा चुका है। हालांकि, अभी भी करीब 90 हजार सीटें खाली हैं, जिन्हें भरने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है।

अधिकारियों के अनुसार, इस अतिरिक्त समय के दौरान सभी जिलों में विशेष अभियान चलाया जाएगा, ताकि कोई भी पात्र बच्चा शिक्षा से वंचित न रह जाए। इस अभियान के तहत अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा, स्कूलों से समन्वय स्थापित किया जाएगा और प्रवेश प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।

समग्र शिक्षा अभियान के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में शेष बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित करें। इसके लिए रोजाना प्रगति रिपोर्ट मुख्यालय को भेजनी होगी, जिसमें यह जानकारी होगी कि कितने बच्चों को प्रवेश मिला और किन कारणों से कुछ बच्चे अब भी दाखिले से वंचित हैं।

सरकार ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का भी सहारा लिया है। सभी जिलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गूगल शीट के माध्यम से रोजाना डेटा अपडेट करें, जिससे मुख्यालय स्तर पर निगरानी आसान हो सके। इसके अलावा, जिन निजी स्कूलों द्वारा प्रवेश देने में आनाकानी की जा रही है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए गए हैं। ऐसे स्कूलों को नोटिस भेजे जाएंगे और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

इस वर्ष आरटीई के तहत आवेदन प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने के लिए इसे तीन चरणों में पूरा किया गया। खास बात यह रही कि अप्रैल शुरू होने से पहले ही आवेदन और चयन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई, जिससे दाखिलों में तेजी आई। अब अंतिम चरण में बचे हुए बच्चों को भी शिक्षा के दायरे में लाने पर जोर दिया जा रहा है।

शिक्षा के साथ-साथ प्रदेश में रोजगार से जुड़ी एक बड़ी प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। होमगार्ड स्वयंसेवकों की भर्ती के लिए 41,424 पदों पर लिखित परीक्षा आयोजित की जानी है, जिसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। यह परीक्षा 25 से 27 अप्रैल के बीच आयोजित होगी और इसमें करीब 25 लाख से अधिक अभ्यर्थी हिस्सा लेंगे।

इस विशाल परीक्षा को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने पूरी तैयारी कर ली है। बोर्ड के अध्यक्ष एसबी शिरडकर के अनुसार, परीक्षा से पहले 23 अप्रैल को एक रिहर्सल किया जाएगा, जिसमें प्रश्नपत्रों को सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की प्रक्रिया का अभ्यास किया जाएगा।

यह ड्रिल इसलिए महत्वपूर्ण है ताकि वास्तविक परीक्षा के दिन किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो और सभी केंद्रों तक प्रश्नपत्र समय पर और सुरक्षित पहुंच सके। इसके अलावा, 18 अप्रैल को यूपी-112 मुख्यालय में सभी नोडल अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें अंतिम तैयारियों की समीक्षा की जाएगी और जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया जाएगा।

इस परीक्षा को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। प्रदेश के 74 जिलों में कुल 1053 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां तीन दिनों में छह पालियों में परीक्षा आयोजित होगी। केवल श्रावस्ती जिले को छोड़कर बाकी सभी जिलों में केंद्र स्थापित किए गए हैं।

नकल माफिया और सॉल्वर गैंग पर नजर रखने के लिए एसटीएफ और स्थानीय पुलिस को विशेष निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है, ताकि कोई अफवाह या भ्रामक जानकारी फैलाकर परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित न कर सके।

इन दोनों पहलों—आरटीई के तहत बच्चों का प्रवेश और होमगार्ड भर्ती परीक्षा—से यह स्पष्ट होता है कि प्रदेश सरकार शिक्षा और रोजगार दोनों क्षेत्रों में सुधार के लिए सक्रिय है। एक ओर जहां गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। आरटीई के तहत अभी भी बड़ी संख्या में बच्चों का दाखिला बाकी है, जिसे तय समय में पूरा करना प्रशासन के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है। वहीं, इतनी बड़ी भर्ती परीक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना भी एक कठिन कार्य है।

अंततः, यह कहा जा सकता है कि अगर प्रशासनिक प्रयास इसी तरह जारी रहे और सभी संबंधित पक्ष मिलकर काम करें, तो दोनों ही पहलें सफल हो सकती हैं। इससे न केवल शिक्षा का स्तर सुधरेगा, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, जो राज्य के समग्र विकास के लिए बेहद जरूरी है।

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